कैनेडियन स्पेस एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री जोशुआ कुट्रिक और NASA के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के एयरलॉक के बाहर सुबह 8:36 बजे (EST) स्पेस वॉक शुरू की। इसका उद्देश्य स्पेस स्टेशन के 3B चैनल पर आठवां और आखिरी IROSA लगाना था, जिससे पावर बढ़ाने का अपग्रेड वाला काम पूरा हो गया।
यह स्पेस वॉक कई प्लेटफॉर्म पर लाइव स्ट्रीम की जा रही है। कुट्रिक स्पेस वॉक क्रू के पहले सदस्य हैं और उन्होंने लाल धारियों वाला सूट पहना है। मेनन क्रू के दूसरे सदस्य हैं, जिन्होंने बिना किसी निशान वाला सूट पहना है।
अंतरिक्ष यात्री साइंटिस्टों ने बताया कि वे आज सुबह 8:30 बजे (EDT) होने वाली स्पेस वॉक के लिए तैयार हुए। उन्होंने लगभग सात घंटे तक काम किया। स्टेशन की पावर क्षमता बढ़ाने के लिए आखिरी ‘रोल-आउट सोलर एरे’ लगाया गया। दो नए सोलर एरे में से दूसरा सोलर एरे लगाया गया। इससे स्टेशन को और ज़्यादा पावर मिलेगी।
कैसा रहता है वातावरण स्पेश स्टेशन के बाहर
शून्य वायुदाब (Vacuum): बाहर कोई हवा या वायुमंडल नहीं है, इसलिए वहां सांस लेने के लिए ऑक्सीजन नहीं मिलती।
तापमान का भारी उतार-चढ़ाव: सूर्य की सीधी रोशनी में तापमान 120°C से 121°C तक पहुंच जाता है, जबकि छाया (shade) में यह गिरकर -160°C से -257°C तक ठंडा हो जाता है।
अंतरिक्ष स्टेशन लगभग 28,000 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी का चक्कर लगाता है और हर 90 मिनट में एक परिक्रमा पूरी करता है। इस वजह से अंतरिक्ष यात्रियों को हर 45 मिनट में एक बार सूर्योदय और सूर्यास्त देखने को मिलता है।
बाहर हर चीज़ और इंसान तैरते रहते हैं। उड़ने या बहने से बचने के लिए यात्रियों को हैंडरेलों, पैरों के क्लिप और सेफ्टी रस्सियों (tethers) का इस्तेमाल करना पड़ता है।
खतरनाक रेडिएशन और दृश्य: बिना वायुमंडल के सूर्य की किरणें और ब्रह्मांडीय विकिरण (cosmic rays) सीधे महसूस होते हैं, और नीचे देखने पर नीला ग्लोब (पृथ्वी), महासागर और बादलों की बेहद खूबसूरत परत दिखाई देती है।
• दस्ताने और मेहनत: बाहर पहना जाने वाला स्पेसवूट खुद एक मिनी-स्पेसशिप की तरह होता है। लेकिन सूट के अंदर दबाव (pressure) होने के कारण हाथों की उंगलियों और जोड़ों को हिलाना काफी थका देने वाला होता है, जिससे एक साधारण सा पेंच कसने में भी बहुत ताकत लगती है।