ज्ञानवापी परिसर में एएसआई सर्वेक्षण की मंजूरी, सर्वे की कवायद शुक्रवार को शुरू होगी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 03 Aug 2023 10:31 PM
ज्ञानवापी परिसर में एएसआई सर्वेक्षण की मंजूरी, सर्वे की कवायद शुक्रवार को शुरू होगी
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प्रयागराज/वाराणसी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण एएसआई द्वारा कराने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी की याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी और सर्वे की अनुमति दे दी. वाराणसी की जिला अदालत के 21 जुलाई के एक आदेश में शहर में स्थित ज्ञानवापी परिसर का सर्वेक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से कराने का आदेश दिया था.

अपने 16 पृष्ठ के आदेश में अदालत ने कहा, ”इस अदालत के विचार में प्रस्तावित वैज्ञानिक सर्वेक्षण न्यायहित में आवश्यक है. इससे वादी और प्रतिवादी दोनों लाभान्वित होंगे और निचली अदालत को निर्णय करने में मदद मिलेगी. निचली अदालत ने सर्वेक्षण का आदेश न्यायोचित तरीके से पारित किया था.” अदालत ने आगे कहा, ”यदि कोई अंतरिम आदेश है तो उसे हटाया जाता है और वाराणसी की जिला अदालत द्वारा 21 जुलाई को पारित आदेश बहाल किया जाता है. संबंधित पक्षों को इस अदालत द्वारा कही गई बातों और एएसआई के हलफनामे को ध्यान में रखकर आदेश का अनुपालन करना होगा.”

अदालत ने कहा, ”चूंकि इस मुकदमे की सुनवाई लंबे समय से लटकती रही है, उचित होगा कि संबंधित अदालत सुनवाई को अनावश्यक टाले बगैर तेजी से पूरी करने का प्रयास करे.” वाराणसी की जिला अदालत ने 21 जुलाई को एएसआई को एक विस्तृत वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया था जिससे यह निर्धारित हो सके कि काशी विश्वनाथ मंदिर के पास स्थित ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण पुराने मंदिर के ढांचे के ऊपर हुआ है या नहीं.

ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन करने वाली अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी ने इस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था जिसने 26 जुलाई की शाम पांच बजे तक सर्वेक्षण पर रोक लगाने के साथ ही कमेटी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील करने को कहा था. इस पर कमेटी ने 25 जुलाई को उच्च न्यायालय में अपील की थी.

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रितिंकर दिवाकर ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 27 जुलाई को मस्जिद कमेटी की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था और उन्होंने निर्णय आने तक एएसआई के सर्वेक्षण पर रोक लगा दी थी. वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट एस. राजालिंगम ने कहा कि एएसआई ने शुक्रवार से सर्वेक्षण शुरू करने के लिए जिला प्रशासन से सहायता मांगी है. उन्होंने बताया, सर्वेक्षण के दौरान सुरक्षा के मुद्दे पर वाराणसी के पुलिस आयुक्त के साथ विस्तृत बातचीत हुई है और जिला प्रशासन शुक्रवार से सर्वेक्षण शुरू करने के लिए पूरी तरह से तैयार है.

अंजुमन इंतेजामिया की याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा, ”एक बार जब पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है कि विवादित संपत्ति को कोई क्षति नहीं होने जा रही, इस अदालत को उनके बयान पर संदेह करने का कोई कारण नजर नहीं आता है.” अदालत ने कहा, ”हमें याचिकाकर्ता की इस दलील में कोई दम नहीं दिखता कि किसी दीवार को खोदे बगैर एएसआई द्वारा चीजों को अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता. आज के इस आधुनिक दौर में कई नई चीजें विकसित की गई हैं. नई तकनीक की मदद और एएसआई के जिम्मेदार अधिकारियों के मार्गदर्शन की मदद से वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया जा सकता है.”

इससे पूर्व, सुनवाई के दौरान, एएसआई के अपर महानिदेशक आलोक त्रिपाठी ने अदालत को सूचित किया था कि एएसआई ढांचे की खुदाई करने नहीं जा रहा है. इस बीच, उच्च न्यायालय ने एएसआई निदेशक को जीपीआर सर्वे, उत्खनन, डेटिंग पद्धति और अन्य आधुनिक तकनीकियों का उपयोग कर ज्ञानवापी मस्जिद का एक विस्तृत वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया जिससे यह पता लगाया जा सके कि क्या वह मस्जिद पहले से मौजूद एक हिंदू मंदिर के ऊपर बनाई गई है. एएसआई निदेशक को उस भवन के तीन गुंबदों के नीचे जीपीआर सर्वेक्षण करने का भी निर्देश दिया गया है.

उच्च न्यायालय के आदेश के कुछ समय के बाद ही अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी ने इस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया. उच्च न्यायालय का निर्णय आने के बाद हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने संवाददाताओं से इसे ”बहुत महत्वपूर्ण निर्णय” बताते हुए कहा कि अंजुमन इंतेजामिया कमेटी ने दलील दी थी कि इस सर्वेक्षण से ढांचा प्रभावित होगा, लेकिन अदालत ने उन सारी दलीलों को खारिज कर दिया है.

उन्होंने कहा कि इससे पूर्व अंजुमन इंतेजामिया कमेटी की दलील थी कि उसे उच्च न्यायालय जाने का मौका नहीं मिला, इसलिए अदालत ने उसकी दलीलों पर सुनवाई की. हिंदू पक्ष के एक अन्य वकील मदन मोहन यादव ने कहा कि यदि दूसरा पक्ष उच्चतम न्यायालय जाने का निर्णय करता है तो वे एक कैविएट दाखिल कर कहेंगे कि इस मामले में उनका पक्ष भी सुना जाए. मस्जिद का वह वजूखाना जहां कथित तौर पर शिवलिंग होने के दावे किए जा रहे हैं, इस सर्वेक्षण का हिस्सा नहीं होगा क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने परिसर में उस जगह को संरक्षित करने का आदेश पूर्व में दिया था.

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