आयुर्वेद भारतीय परंपरा और लोकाचार का एक अभिन्न अंग है: प्रधानमंत्री मोदी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 01 Dec 2023 09:56 PM
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तिरुवनंतपुरम. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि आयुर्वेद भारतीय परंपरा और लोकाचार का एक अभिन्न अंग है और यह केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं बल्कि जीवन जीने का तरीका है. उन्होंने यहां जारी वैश्विक आयुर्वेद महोत्सव (जीएएफ) के प्रतिनिधियों को भेजे संदेश में कहा कि आयुर्वेद के जन्मस्थान के रूप में, भारत अपने वैश्विक पदचिह्नों का विस्तार करने के लिए कटिबद्ध है.

प्रधानमंत्री चूंकि विदेश में हैं, इसलिए केंद्रीय विदेश और संसदीय मामलों के राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने पांच दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में उनका संदेश पढ़ा. सम्मेलन की शुरुआत उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने की. मोदी ने कहा, ह्लभारतीय परंपरा और लोकाचार का एक अभिन्न अंग, आयुर्वेद केवल एक चिकित्सा प्रणाली नहीं है, बल्कि जीवन का एक संपूर्ण तरीका है… आयुर्वेद के जन्मस्थान के रूप में, भारत अपने वैश्विक पदचिह्न का विस्तार करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है.ह्व उन्होंने कहा कि चाहे योग दिवस को स्वास्थ्य एवं कल्याण के वैश्विक त्योहार के रूप में मनाना हो या भारत में पारंपरिक चिकित्सा के लिए डब्ल्यूएचओ ग्लोबल सेंटर की स्थापना हो, मानवता की भलाई के लिए दृढ़ता से काम करने की देश की प्रतिबद्धता प्रभाव डाल रही है.

मोदी ने कहा कि आयुर्वेद बीमारी के इलाज के अलावा लोगों के कल्याण को बढ़ावा देता है. उन्होंने कहा, “शारीरिक शक्ति और मानसिक कल्याण दोनों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, आयुर्वेद समग्र कल्याण की एक व्यापक प्रणाली है. एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य का विचार, स्वास्थ्य की सार्वभौमिक दृष्टि, वसुधैव कुटुंबकम के प्राचीन भारतीय सिद्धांत में निहित है.”

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