नयी दिल्ली. अनुसंधानकर्ताओं ने अब तक के सबसे पुराने ‘ब्लैक होल’ की खोज की है, जो ब्रह्मांड की शुरुआत में बना था और अपनी ही आकाशगंगा को ‘निगल’ रहा है. नेचर पत्रिका में प्रकाशित इस अनुसंधान पत्र के मुताबिक ‘ब्लैक होल’ का पता लगाने के लिए जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (जेडब्ल्यूएसटी) का उपयोग किया गया. यह ब्लैक होल ‘बिग बैंग'(महाविस्फोट) के करीब 40 करोड़ वर्ष बाद का है और यह करीब 13 अरब वर्ष पुराना है.
अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि आश्चर्यजनक रूप से यह विशाल ब्लैक होल का द्रव्यमान हमारे सूर्य के द्रव्यमान से कुछ लाख गुना ज्यादा है और ब्रह्मांड की शुरुआत से ही अस्तित्व में है. यह विशाल ‘ब्लैक होल’ हमारी ब्लैक होल के बनने और बढ.ने की मौजूदा अवधारणा को चुनौती देता है. खगोलविदों का मानना है कि ‘मिल्की वे’ जैसी आकाशगंगाओं के केंद्र में पाए जाने वाले ऐसे विशालकाय ब्लैक होल को बनने और वर्तमान आकार तक बढ.ने में अरबों साल लगते हैं.
अनुसंधानकर्ताओं ने कहा हाल में खोजे गए ब्लैक होल के आकार से पता चलता है कि इनका निर्माण अन्य तरीकों से हो सकता है.
मानक मॉडल के अनुसार अति सघन द्रव्यमान वाले ब्लैक होल मृत तारों के अवशेषों से बनते हैं और सूर्य के द्रव्यमान से लगभग सौ गुना अधिक द्रव्यमान से ‘ब्लैक होल ‘बना सकते हैं. अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक, अगर ये असामान्य तरीके से बढ.ते हैं तो हाल-फिलहाल में खोजे गए इस ब्लैक होल को अपने वास्तविक आकार तक बढ.ने में लगभग एक अरब साल लगेंगे. हालांकि जब ब्लैक होल का बना था तब ब्रह्मांड एक अरब वर्ष पुराना भी नहीं था.
ब्रिटेन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और अनुसंधानपत्र के मुख्य लेखक रॉबर्टो मैओलिनो ने कहा, ”ब्रह्मांड में इतने विशालकाय ब्लैक होल के दिखाई देने के बाद किसी निष्कर्ष पर पहुंचना बहुत जल्दबाजी होगी.इसलिए हमें उनके बनने के अन्य तरीकों पर विचार करना होगा.” मैओलिनो ने कहा, ”शुरुआत में खोजी गयी आकाशगंगाओं में गैस की मात्रा अधिक थी, इसलिए वहां बड़ी संख्या में ब्लैक होल रहे होंगे.”