अमेरिका ने यूक्रेन के मुद्दे पर भारत से समर्थन मांगा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 19 Jul 2024 09:01 PM
अमेरिका ने यूक्रेन के मुद्दे पर भारत से समर्थन मांगा
ऑडियो सुनें

वाशिंगटन/कोलकाता. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने विभिन्न क्षेत्रों में भारत के साथ द्विपक्षीय सहयोग को रेखांकित करते हुए कहा है कि अमेरिका चाहता है कि भारत यूक्रेन में स्थायी और न्यायपूर्ण शांति स्थापित करने के उसके प्रयासों का समर्थन करे. विदेश मंत्रालय के प्रधान उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हाल में हुई बैठकों के बारे में बृहस्पतिवार को पूछे गए एक सवाल के जवाब में ये बातें कहीं.

उन्होंने कहा, “भारत अनेक प्रमुख क्षेत्रों में हमारा साझेदार है, और यह बात पिछले ग्रीष्मकाल में स्पष्ट रूप से प्रर्दिशत हुई थी, जब प्रधानमंत्री मोदी राजकीय यात्रा पर अमेरिका आए थे.ह्व पटेल ने कहा, ” इसके अलावा, यूक्रेन-रूस के बीच जारी जंग और यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता व संप्रभुता पर उसके प्रभाव के संदर्भ में, हम भारत समेत अपने सभी साझेदारों से यूक्रेन में स्थायी व न्यायपूर्ण शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन करने का अनुरोध करते हैं.” विदेश मंत्रालय ने रूस से कहा कि वह यूक्रेन के संप्रभु क्षेत्र से अपने सैनिक वापस बुलाए.

मोदी 22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए 8-9 जुलाई को रूस में थे. यूक्रेन में जारी संघर्ष के बीच पश्चिमी देशों की इस शिखर सम्मेलन पर गहरी नजर थी. रूस और यूक्रेन के बीच 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से मोदी की यह पहली रूस यात्रा थी. नौ जुलाई को पुतिन के साथ वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे कहा था कि यूक्रेन संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान में संभव नहीं है और शांति के प्रयास बम व गोलियों के बीच सफल नहीं होते हैं.

भारत रूस के साथ अपने संबंधों का दृढ़तापूर्वक बचाव करता रहा है तथा यूक्रेन संघर्ष के बावजूद दोनों देशों के संबंध मजबूत रहे हैं.
भारत ने अभी तक 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की निंदा नहीं की है और वह लगातार बातचीत व कूटनीति के माध्यम से संघर्ष के समाधान की वकालत करता रहा है.

यूक्रेन-रूस संघर्ष को सुलझाने में ‘बड़ी भूमिका’ निभा सकता है भारत: अमेरिकी राजदूत गार्सेटी

भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने शुक्रवार को कहा कि रूस और यूक्रेन के साथ मजबूत संबंध रखने वाला भारत दोनों देशों के बीच संघर्ष को सुलझाने में एक ”बड़ी भूमिका” निभा सकता है. गार्सेटी ने कहा कि ”इस मामले पर निर्णय लेना विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र पर निर्भर करता है.” अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भारत की बढ़ती भूमिका का स्वागत करते हुए और भारतीय महासागर में समुद्री डाकुओं द्वारा अपहृत मालवाहक जहाजों को छुड़ाने के लिए भारतीय नौसेना की साहसिक कार्रवाई की सराहना करते हुए अमेरिकी राजदूत ने कहा कि भारत ‘ग्लोबल साउथ’ के सशक्तिकरण में भी बहुत अच्छा काम कर रहा है.

उन्होंने कहा, ”हम विश्व में किसी भी युद्ध के बेहतर समाधान के लिए भारत द्वारा निभायी जाने वाली किसी भी भूमिका का स्वागत करते हैं.” उन्होंने कहा, ”भारत के यूक्रेन और रूस दोनों के साथ अतीत में अविश्वसनीय रूप से मजबूत संबंध रहे हैं और इसलिए वह (भारत) एक बड़ी भूमिका निभा सकता है.” उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर निर्णय भारत को लेना है. उन्होंने कहा, ”हम किसी भी देश का स्वागत करते हैं जो किसी अन्य देश की सीमाओं की संप्रभुता में बाधा डालने वाले और निर्दोष नागरिकों को बहुत पीड़ा पहुंचाने वाले अनुचित आक्रमण के खिलाफ खड़ा होता है.” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आठ और नौ जुलाई को रूस की यात्रा की थी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक की थी.

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा था कि रूस के साथ भारत के संबंधों के बारे में अपनी चिंताओं को लेकर अमेरिका काफी स्पष्ट रहा है. अमेरिकी विदेश विभाग ने यह भी कहा था कि वाशिंगटन “भारत से यूक्रेन में एक स्थायी और न्यायपूर्ण शांति को साकार करने के प्रयासों का समर्थन करने का आग्रह करता है.” कोलकाता में एक शिक्षा बैठक के दौरान संवाददाताओं से बात करते हुए, गार्सेटी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सबसे बुनियादी सिद्धांत सीमाओं की संप्रभुता है. उन्होंने कहा, “हमने सीमा के मसले पर भारत का समर्थन किया है और सामन कारण से यूक्रेनी लोगों के खिलाफ इस अकारण युद्ध में हमने इतना मजबूत रुख अपनाया है.” अमेरिकी राजदूत ने कहा कि पिछली बार जब उन्होंने पिछले साल जुलाई में भारत के पूर्वोत्तर पर बात की थी, तो उनकी बात को गलत समझा गया था, जहां मणिपुर में अशांति देखी जा रही है.

गार्सेटी ने कहा, “मैंने सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही कि मनुष्य के रूप में, जब हम कहीं भी पीड़ा देखते हैं, चाहे वह अमेरिका में हो, भारत में हो या किसी तीसरे देश में, जब भी हम मानवीय पीड़ा देखते हैं, तो हमें पीड़ा होती है.” उन्होंने दोहराया कि यह भारत का मुद्दा है जिसे भारत और भारतीयों को सुलझाना है, न कि अमेरिका को. उन्होंने कहा, “हम पूर्वोत्तर से प्यार करते हैं और अगर भारत सरकार स्वास्थ्य, आर्थिक विकास, युवा सशक्तिकरण के मामले में हमसे मदद मांगती है, तो हम पूर्वोत्तर में किसी भी (इनमें से किसी भी मुद्दे) पर सहायता करने के लिए तैयार हैं.”

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By Yogesh Kumar Sahu