भुवनेश्वर. बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने और जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जल संसाधन विभाग की दो उच्चस्तरीय तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) की बैठकों में कुल 85 परियोजना प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी से संबंधित 38 प्रस्तावों की अनुमानित लागत 653.99 करोड़ रुपये है। वहीं, सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े 47 प्रस्तावों को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।
दोनों बैठकों की अध्यक्षता जल संसाधन विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ अभियंता दिलीप कुमार राउत ने की। बैठकें मिश्रित माध्यम (हाइब्रिड मोड) में आयोजित की गईं, जिनमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया।
बाढ़ नियंत्रण की 38 परियोजनाओं पर विचार
राज्य बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 158वीं तकनीकी सलाहकार समिति की बैठक में विभिन्न ड्रेनेज डिवीजनों की ओर से प्रस्तुत 38 परियोजना प्रस्तावों की समीक्षा की गई। इनमें 31 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं और सात समग्र जल निकासी सुधार परियोजनाएं शामिल हैं। इनकी कुल अनुमानित लागत 653.99 करोड़ रुपये बताई गई है।
इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य नदियों के तटबंधों को मजबूत करना, बाढ़ की आशंका वाले संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा करना तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना है। इसके माध्यम से बाढ़ प्रभावित समुदायों को मौसमी आपदाओं से बचाने और जलभराव की समस्या कम करने पर जोर दिया जाएगा।
बाढ़ के बाद पेयजल की शुद्धता और साफ-सफाई सुनिश्चित करें शहरी निकाय : उषा पाढ़ी
ओडिशा में भारी बारिश और बाढ़ के बाद संभावित स्वास्थ्य संबंधी खतरों को देखते हुए राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्रों में पेयजल की शुद्धता और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। आवास एवं शहरी विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव उषा पाढ़ी ने सभी शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के कार्यपालक अधिकारियों और अभियंताओं को निर्देश दिया है कि प्रत्येक घर तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बाढ़ के बाद दूषित पानी और अस्वच्छ वातावरण के कारण जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए एहतियाती उपायों में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
सभी पेयजल स्रोतों की सफाई और शुद्धीकरण अनिवार्य
उषा पाढ़ी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सामुदायिक पेयजल स्रोतों सहित सभी सार्वजनिक जलस्रोतों की पूरी तरह सफाई कराई जाए। इसके बाद उनका उचित तरीके से विसंक्रमण और शुद्धीकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि बाढ़ के पानी से होने वाले संभावित प्रदूषण को रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि दूषित पानी के कारण फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए पहले से ही प्रभावी कदम उठाना जरूरी है। पेयजल की गुणवत्ता और सुरक्षा की नियमित निगरानी की जानी चाहिए।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में चलेगा विशेष स्वच्छता अभियान
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बाढ़ के बाद स्वच्छता व्यवस्था को भी सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रभावित क्षेत्रों में जमा कचरे, मलबे और ठहरे हुए पानी को तत्काल हटाया जाए।
इसके साथ ही सड़कों, सार्वजनिक स्थलों और अन्य प्रभावित इलाकों की व्यापक सफाई कराई जाए, ताकि गंदगी और जलभराव के कारण संक्रमण तथा बीमारियों का खतरा न बढ़े। अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर सामान्य स्वच्छ वातावरण बहाल करने को कहा गया है।
अधिकारियों को स्वयं करनी होगी निगरानी
उषा पाढ़ी ने सभी संबंधित कार्यपालक अधिकारियों और अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जमीन पर किए जा रहे कार्यों की प्रगति की भी नियमित समीक्षा होनी चाहिए।
अधिकारियों को सफाई, जलस्रोतों के शुद्धीकरण और अन्य आवश्यक उपायों की तस्वीरों के साथ नियमित प्रगति रिपोर्ट निर्धारित माध्यमों से भेजने को कहा गया है।
कटक स्थित सेंट्रल रेंज कार्यालय में राष्ट्रीय एकता दिवस, आईजी डॉ सत्यजीत नायक ने दिलाई शपथ
कटक। कटक स्थित सेंट्रल रेंज कार्यालय में शनिवार को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया गया। इस अवसर पर सेंट्रल रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) डॉ सत्यजीत नायक ने पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई।
शपथ के माध्यम से डॉ नायक ने देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा की रक्षा करने तथा नागरिकों के बीच राष्ट्रीय एकजुटता की भावना को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।
——
चक्रवात ‘अर्णव’ के बाद राहत एवं पुनर्वास कार्य तेज
समुद्री चक्रवात अर्णव के बाद उत्पन्न व्यवधानों से प्रभावित ओडिशा के गंजाम और गजपति जिलों में राहत एवं पुनर्वास कार्यों को तेज कर दिया गया है। प्रशासन के समन्वित प्रयासों से क्षेत्र की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है और जनजीवन को सामान्य बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कदम उठाए जा रहे हैं। गंजाम के जिलाधिकारी एवं जिला मजिस्ट्रेट कीर्ति वासन वी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
जिलाधिकारी के अनुसार, क्षेत्र में यातायात की समस्या को काफी हद तक दूर कर लिया गया है। राहत एवं बचाव कार्यों के सुचारू संचालन के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सड़क किनारे और अन्य स्थानों पर खड़े भारी वाहनों को हटाकर दूसरी जगह भेजने की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने बताया कि शुक्रवार शाम से राहत सामग्री के वितरण के लिए 20 ऑटो और 10 ट्रैक्टर लगाए गए हैं। यातायात व्यवस्था में आंशिक सुधार हुआ है और स्थिति में और बेहतर बदलाव देखने को मिला। अधिकांश बसों का परिचालन भी शुरू हो चुका है। शेष बसों का संचालन भी जल्द सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पेयजल आपूर्ति बढ़ाने के लिए 35 टैंकरों की व्यवस्था
प्रशासन ने प्रभावित लोगों तक पेयजल पहुंचाने के लिए आपूर्ति व्यवस्था का विस्तार किया है। जिलाधिकारी के अनुसार, पेयजल टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है तथा पानी की बोतलें वितरित की जा रही हैं।
शनिवार को इस व्यवस्था को और मजबूत करते हुए 30 से 35 टैंकरों को तैनात करने की योजना बनाई गई है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की कमी न हो।