भोपाल/बेंगलुरु/कोलकाता/तिरुवनंतपुरम. वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने सोमवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अयोध्या में नये राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह को राजनीतिक रंग दे दिया है, जो ”दुर्भाग्यपूर्ण एवं दुखद” है. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट पर हालांकि एक पोस्ट में सोमवार को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में एक भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर लोगों को बधाई दी.
इस भव्य कार्यक्रम की अगुवाई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की और देशभर में लाखों लोगों ने अपने घरों एवं मंदिरों में यह कार्यक्रम देखा.
कमलनाथ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश पर अयोध्या में भगवान राम के मंदिर का निर्माण किया गया है. उन्होंने कहा कि चूंकि केंद्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकारें हैं , ऐसे में उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन करना उनकी जिम्मेदारी थी.
पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने कहा, ” जिस तरह भाजपा ने इस कार्यक्रम को राजनीतिक रंग दे दिया है और राजनीतिक मंच पर धर्म को लाने की कोशिश की, वह दुर्भाग्यपूर्ण एवं दुखद है. भगवान राम हमेशा से हम सभी के आस्था के केंद्र रहे हैं और हमेशा रहेंगे. इस पर राजनीति धार्मिक स्वतंत्रता एवं परंपराओं के साथ खेलने जैसा है.” उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को असम में उनकी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान एक मंदिर में जाने से रोका गया.
उन्होंने कहा, ”क्या एक मंदिर में प्रार्थना एवं पूजा-अर्चना पर भी भाजपा के शासन काल में रोक लगा दी गयी है. राहुल जी को मंदिर में जाने के वास्ते अनुमति के लिए धरने पर बैठना पड़ा. यह हमारी आस्था एवं आजादी पर हमला है.” आज दिन में गांधी को असम के नगांव जिले में ऐतिहासिक वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव के जन्मस्थान पर जाने से इस आधार पर रोक दिया गया था कि उनकी यात्रा के दौरान कानून व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती है क्योंकि कई संगठनों ने अयोध्या में राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के सिलसिले में कार्यक्रम करने की योजना बना रखी थी. शंकरदेव के जन्मस्थान जाने के मार्ग में हैबरगांव में राहुल गांधी को रोक दिया था, जहां वह वरिष्ठ पार्टी नेताओं एवं समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गये.
लक्ष्मण, सीता, हनुमान के बिना राम अधूरे हैं, भाजपा ने उन्हें उनसे अलग कर दिया: सिद्धरमैया
, 22 जनवरी (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने सोमवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अयोध्या स्थित मंदिर में केवल भगवान राम की मूर्ति स्थापित कर उन्हें लक्ष्मण, सीता और अंजनेय से अलग कर दिया. सिद्धरमैया ने अयोध्या में केवल भगवान राम की मूर्ति स्थापित किए जाने पर सवाल करते हुए कहा, ”लक्ष्मण, सीता और अंजनेय के बिना राम पूरे नहीं हो सकते. वे (भाजपा) राम को अलग कर रहे हैं. यह सही नहीं है.” मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा भगवान राम की पूजा नहीं करती. उन्होंने कहा कि कांग्रेस महात्मा गांधी के भगवान राम की पूजा करती है.
सिद्धरमैया ने यहां एक राम मंदिर का उद्घाटन करने के बाद संवाददाताओं से कहा, ”कांग्रेस महात्मा गांधी के राम को पूजती है, जबकि भाजपा उनकी पूजा नहीं करती.” उन्होंने कहा कि उनके द्वारा यहां मंदिर का उद्घाटन किए जाने का कोई राजनीतिक कारण नहीं है. उन्होंने कहा, ”मैंने अपने गांव में श्रीरामचंद्र मंदिर बनवाया. मैंने राजनीतिक कारणों से ऐसा नहीं किया.” सिद्धरमैया ने सवाल किया कि क्या अयोध्या में श्रीरामचंद्र पूरे भारत के गांवों में मौजूद श्रीरामचंद्र से अलग हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह किसी और दिन अयोध्या जाएंगे. उन्होंने कहा कि वह सोमवार को वहां नहीं गए क्योंकि भाजपा ”भगवान राम का राजनीतिकरण” कर रही है. सिद्धरमैया ने कहा, ”राम को लेकर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए क्योंकि श्रीरामचंद्र सबके हैं. वह केवल भाजपा के भगवान नहीं हैं. वह हर हिंदू के भगवान हैं.” उन्होंने कहा, ”हम भी श्रीरामचंद्र की पूजा करते हैं और हम भी उनके भक्त हैं. हमने भी राम मंदिर बनवाया है.” मुख्यमंत्री ने भाजपा पर कांग्रेस को हिंदू विरोधी के रूप में पेश करने का आरोप लगाया और इस ”दुष्प्रचार” के लिए उसकी आलोचना की. सिद्धरमैया ने कहा, ”हम श्रीरामचंद्र के खिलाफ नहीं हैं.”
भाजपा महिला विरोधी, भगवान राम के बारे में बात करती है लेकिन देवी सीता पर साध लेती है चुप्पी: ममता
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोकसभा चुनाव से पहले ”धर्म के राजनीतिकरण” का प्रयास करने को लेकर सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आलोचना की और भगवान राम के बारे में विमर्श से देवी सीता को हटा देने के लिए उसे ”महिला विरोधी” करार दिया.
अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दिन तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) द्वारा यहां आयोजित मार्च का नेतृत्व करते हुए ममता ने देश में धर्मनिरपेक्षता और समावेशिता के सिद्धांतों को संरक्षित करने में बंगाल की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया.
रैली में, अपने समापन संबोधन में उन्होंने कहा, ”मैं चुनाव से पहले धर्म का राजनीतिकरण करने में विश्वास नहीं करती. मैं ऐसी परिपाटी के खिलाफ हूं. मुझे भगवान राम की पूजा करने वालों से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन लोगों की खान-पान की आदतों में हस्तक्षेप पर आपत्ति है.” ममता ने विभिन्न धर्मों के धार्मिक नेताओं और पार्टी नेताओं के साथ हाजरा मोड़ से ‘सर्व-धर्म सद्भाव’ मार्च शुरू किया, जो यहां पार्क सर्कस क्रॉसिंग पर समाप्त हुआ.
मुख्यमंत्री ने कहा, ” वे (भाजपा) भगवान राम के बारे में बात करते हैं, लेकिन देवी सीता का क्या? वह वनवास के दौरान हमेशा भगवान राम के साथ रहीं. वे उनके बारे में नहीं बोलते क्योंकि वे महिला विरोधी हैं. हम देवी दुर्गा के उपासक हैं, इसलिए हमें धर्म के बारे में उपदेश देने की उन्हें कोशिश नहीं करनी चाहिए.”
धर्म और सरकार के बीच का अंतर क्षीण होता जा रहा है : विजयन
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सोमवार को अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में सरकार की भूमिका की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि धर्म और सरकार का सीमांकन करने वाली रेखा ”दिन पर दिन क्षीण” होती जा रही है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को संपन्न करने के कुछ घंटों बाद ही विजयन ने एक संदेश में कहा कि वह समय आ गया है जब देश में एक धार्मिक स्थल के उद्घाटन को एक राजकीय कार्यक्रम के तौर पर मनाया जा रहा है.
उन्होंने कहा, ”यह उस परिपाटी से अलग है जिसमें हमारे संवैधानिक पदाधिकारियों को धार्मिक आयोजनों में हिस्सा लेने से आगाह किया गया है, क्योंकि यह एक धर्मनिरपेक्ष राज्य के रूप में हमारी साख पर सवाल उठाएगा.” मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू अकसर कहते थे कि भारतीय धर्मनिरपेक्षता का अर्थ धर्म और सरकार को अलग करना है.
विजयन ने कहा, ”हमारे पास उस अंतर को बनाए रखने की एक मजबूत परंपरा भी है. हालांकि, हाल ही में, धर्म और सरकार का सीमांकन करने वाली रेखा लगातार क्षीण होती जा रही है.” उन्होंने कहा कि इसलिए जिन लोगों ने भारत के संविधान को बनाए रखने की शपथ ली है, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि देश में प्रत्येक व्यक्ति को समान रूप से अपने धर्म को मानने का अधिकार मिले.
विजयन ने कहा, ”साथ ही, हम किसी एक धर्म को अन्य सभी से ऊपर प्रोत्साहित नहीं कर सकते, या किसी एक धर्म को दूसरे धर्म से कमतर नहीं आंक सकते.”
वरिष्ठ मार्क्सवादी नेता ने कहा, ”धर्मनिरपेक्षता भारत के लोकतांत्रिक गणराज्य की आत्मा है और हमारे राष्ट्रीय आंदोलन के दिनों से ही एक राष्ट्र के रूप में हमारी पहचान का हिस्सा रही है.” उन्होंने कहा, ”विभिन्न धर्मों से जुड़े लोगों और जो किसी भी धर्म को नहीं मानते, उन्होंने भी हमारे स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था. यह राष्ट्र समान रूप से सभी लोगों और भारतीय समाज के सभी वर्गों का है.”