40 की उम्र के बाद महिलाओं के लिए ज़रूरी पोषण

Author: www.navabharat.news
UPDATED: Wed, 21 May 2025 11:31 AM
40 की उम्र के बाद महिलाओं के लिए ज़रूरी पोषण
ऑडियो सुनें

40 की उम्र महिलाओं के जीवन में एक विशेष मोड़ होता है। यह वो उम्र होती है जब शरीर में कई अंदरूनी बदलाव शुरू हो जाते हैं, जिनमें सबसे प्रमुख होता है हार्मोनल असंतुलन। मेनोपॉज़ की ओर बढ़ता शरीर, मेटाबॉलिज्म का धीमा होना, ऊर्जा में कमी, थकावट, बालों का झड़ना, त्वचा की चमक का कम होना, और कभी-कभी भावनात्मक अस्थिरता भी – ये सब मिलकर जीवन को प्रभावित करते हैं। ऐसे में एक महिला को खुद की देखभाल पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो जाती है, और इसका सबसे पहला कदम है – पोषण यानी खानपान।

डेस्क पर बैठने वाली दिनचर्या, घर और करियर की जिम्मेदारियों के बीच महिलाएं अक्सर अपने खाने-पीने को प्राथमिकता नहीं देतीं। कई बार वो अपने परिवार के स्वास्थ्य के बारे में सोचती हैं, लेकिन अपनी थाली अधूरी छोड़ देती हैं।

डाइटिशियन इस पर ज़ोर देती हैं कि “40 की उम्र कोई रुकावट नहीं, बल्कि शरीर को नई दिशा देने का अवसर है। यदि इस समय आप संतुलित पोषण लेना शुरू करें, तो आने वाले साल आपकी सेहत के सबसे अच्छे साल बन सकते हैं।”

सबसे पहले बात करते हैं कैल्शियम और विटामिन 𝒟 की। उम्र के साथ हड्डियां कमजोर होती जाती हैं, खासकर महिलाओं में, जो मेनोपॉज़ के दौरान तेज़ी से हड्डी खोने लगती हैं। दूध, दही, पनीर, तिल, राजगीरा जैसे खाद्य पदार्थ, और सुबह की हल्की धूप, इन दोनों पोषक तत्वों के बेहतरीन स्रोत हैं। शिल्पी गोयल कहती हैं, “हर महिला को दिन में कम से कम 1000 𝓂ℊ कैल्शियम आहार से ज़रूर लेना चाहिए, ताकि 50 की उम्र में फ्रैक्चर या ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से बचा जा सके।”

इसके बाद आता है प्रोटीन। मसल लॉस यानी मांसपेशियों की ताक़त में गिरावट एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इसे रोका जा सकता है। अंडा, पनीर, दालें, चना, सोया और सूखे मेवे – ये सभी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। रोज़ की थाली में प्रोटीन की एक मात्रा होना अनिवार्य है, खासकर उस महिला के लिए जो शरीर में स्थिर ऊर्जा चाहती है।

फाइबर का सेवन भी बेहद अहम है। 40 की उम्र के बाद पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे कब्ज, एसिडिटी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और ओट्स को आहार में शामिल करना बहुत ज़रूरी हो जाता है। ये शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं और वजन को भी नियंत्रित रखते हैं।

अगला महत्वपूर्ण तत्व है ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सिडेंट्स। ये त्वचा की झुर्रियों से लेकर हृदय की सेहत तक, कई स्तरों पर काम करते हैं। अलसी के बीज, अखरोट, चिया सीड्स, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां और बेरीज़ जैसे फूड्स रोज़मर्रा की थाली में होने चाहिए। डाइटिशियन  कहती हैं, “त्वचा पर ग्लो लगाने वाले प्रोडक्ट्स से ज़्यादा असर उस थाली से पड़ता है जो आप हर दिन खाते हैं।”

इसके साथ ही आयरन और विटामिन ℬ12 की पूर्ति भी न भूलें। आयरन की कमी से थकान, बाल झड़ना और चक्कर आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं ℬ12 की कमी से न्यूरोलॉजिकल समस्याएं और ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। इनकी भरपाई के लिए गुड़, चुकंदर, पालक, अंडा, मछली और फोर्टिफाइड फ़ूड्स का सेवन करें। शिल्पी गोयल सलाह देती हैं, “हर महिला को साल में एक बार विटामिन 𝒟 और ℬ12 की जाँच ज़रूर करवानी चाहिए। इनकी कमी शरीर में बिना शोर किए असर डालती है।”

सिर्फ पोषक तत्वों का सेवन ही काफी नहीं, बल्कि खाने का तरीका और दिनचर्या भी महत्वपूर्ण है। दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से करें। नाश्ते में प्रोटीन युक्त आहार जैसे मूंग दाल चिला, ओट्स या अंडा टोस्ट लें। दोपहर में रोटी, दाल, सब्जी और सलाद का संतुलन रखें। शाम को हल्का स्नैक जैसे मखाना या भुना चना लें। रात का खाना हल्का और जल्दी खाएं – जैसे वेजिटेबल सूप या ग्रिल्ड पनीर के साथ एक रोटी।

डाइटिशियन के अनुसार, “डाइट सिर्फ वजन कम करने का साधन नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है। इस उम्र में हमारा लक्ष्य होना चाहिए – लंबा, स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीना। और वह सिर्फ पोषण से ही संभव है।”

अंत में, कुछ और बातें जिन्हें नजरअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए – रोज़ाना 30 मिनट की वॉक या योग करें। तनाव से दूर रहें, नींद पूरी लें और भरपूर पानी पिएं। ये सभी चीजें मिलकर आपके पोषण को पूरा करती हैं।

Source: https://www.nutrishilp.com/

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By www.navabharat.news