इस्लामाबाद. पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और 1971 की ढाका त्रासदी की परिस्थितियों के बीच तुलना की और आगाह किया कि नकदी संकट से जूझ रहे देश में मौजूदा हालात के परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था ठप पड़ सकती है.
समाचार पत्र ‘डॉन’ ने अपनी एक खबर में बताया कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक अध्यक्ष खान ने रावलपिंडी की अदियाला जेल से एक संदेश में मौजूदा सरकार को याद दिलाया कि ”देश और संस्थान स्थिर अर्थव्यवस्था के बिना नहीं बच सकते.” पीटीआई के केंद्रीय सूचना सचिव रऊफ हसन ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खान का संदेश मीडिया को सुनाया. पार्टी की कानूनी टीम ने बुधवार को जेल में 71 वर्षीय नेता से मुलाकात की थी. बैरिस्टर रज़ा ने मीडिया को बताया कि खान अपने निश्चय में दृढ़ लेकिन देश और जनता के प्रति चिंतित नजर आए.
रज़ा ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री का संदेश सुनाया,” जब आप जनता को अधिकार नहीं देते तब आप यह नहीं कह सकते कि अर्थव्यवस्था आगे बढ़ेगी.” उन्होंने तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा,”1970 में सेना प्रमुख या’ा खान त्रिशंकु संसद चाहते थे लेकिन जब शेख मुजीबुर रहमान की पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला तो सेना ने धोखाधड़ी से उपचुनाव कराया, जिसमें अवामी लीग की 80 सीटें छीन ली गईं क्योंकि या’ा खान राष्ट्रपति बनना चाहते थे.”
खान ने अपने संदेश में कहा, ”मैं हमूदुर रहमान आयोग की रिपोर्ट की याद दिलाना चाहता हूं कि हम फिर से वही गलतियां दोहराने जा रहे हैं जो हमने अतीत में की थीं. 1970 में ‘लंदन प्लान’ था और आज फिर से ‘लंदन प्लान’ के जरिए एक सरकारी थोपी गई है.” खान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने लगातार कहा है कि आठ फरवरी के आम चुनावों के नतीजे में धांधली हुई थी और पाकिस्तान सेना ने सत्ता संभालने के लिए पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) का साथ दिया है.