बांग्ला कवि नजरुल की पौत्री ने गीत की धुन बदलने संबंधी करार को सार्वजनिक करने की मांग की

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 22 Nov 2023 07:57 PM
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कोलकाता. बांग्ला कवि काजी नजरुल इस्लाम के एक लोकप्रिय देशभक्ति गीत का इस्तेमाल एक हिंदी फिल्म में करने से जुड़े समझौते की खुद को प्राप्त हुई प्रति में विसंगतियों की ओर इशारा करते हुए उनकी पौत्री अनिंदिता काजी ने सोमवार को मूल करार सार्वजनिक किये जाने की मांग की.

इस साल आई फिल्म ‘पिप्पा’ में गीत ‘करार ओई लोउहो कोपाट’ के संगीतकार ए आर रहमान के संस्करण पर विवाद खड़ा हो गया है और इस्लाम के परिवार ने और गायकों ने इसकी धुन और लय में बदलाव पर अप्रसन्नता जताई है. यह फिल्म हाल में एक ओटीटी मंच पर प्रर्दिशत हुई जिसमें 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान के कुछ वास्तविक घटनाक्रम को चित्रित किया गया है. इसी युद्ध के बाद बांग्लादेश का जन्म हुआ था.

विद्रोही कवि के रूप में मशहूर नजरुल इस्लाम का जन्म 1899 में पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्द्धमान जिले में हुआ था. बंगाल में उनका गीत संग्रह ‘नजरुल गीती’ लोकप्रियता के मामले में संभवत: रवींद्रनाथ टैगोर के बाद दूसरे स्थान पर माना जाता है. बाद में वह बांग्लादेश के राष्ट्र कवि बन गए थे. अनिंदिता ने अपनी दिवंगत मां कल्याणी काजी और ‘पिप्पा’ के निर्माताओं के बीच सितंबर 2021 में हुए समझौते के बारे में अपने भाई काजी अनिर्बान के दावे में विसंगतियों की बात कही है.

चश्मदीद के रूप में करार पर हस्ताक्षर करने वाले अनिर्बान ने हालांकि आरोपों का खंडन किया है. अनिंदिता ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा, ”समझौते की एक प्रति मुझे भेजी गई और मुझे अनेक वजहों से इसकी प्रामाणिकता पर संदेह है. यह एक खाली कागज पर लिखा लगता है. इस पर गवाह के दस्तखत 4 सितंबर, 2021 के हैं जबकि समझौते की तारीख आठ सितंबर थी.” फिल्म निर्माताओं ने हाल में एक इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा कि इस करार से उन्हें नई धुन के साथ गीत का इस्तेमाल करने की अनुमति मिली थी. हालांकि उन्होंने कहा कि यदि उनके बनाए गीत से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें खेद है.

अनिंदिता ने हैरानी जताई कि यह पोस्ट एक लैटरहैड पर क्यों नहीं लिखी गई. उन्होंने कहा, ”भारत और बांग्लादेश की सरकारों को अनिर्बान से मूल दस्तावेज जमा कराने चाहिए.” अनिर्बान ने सारे दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी मां कल्याणी काजी अपने जीवन में नजरुल की समस्त रचनात्मक संपत्तियों की एकमात्र उत्तराधिकारी थीं और उन्होंने अपनी ओर से उन्हें निर्माण कंपनी के साथ बातचीत के लिये अधिकृत किया था.

न्यूजर्सी में रहने वाले अनिर्बान ने कहा, ”यह हैरान करने वाली बात है कि जब ए आर रहमान जैसे संगीतकार इस प्रतिष्ठित गीत पर काम करेंगे तो मेरी मां अपने अन्य बच्चों को इसके बारे में नहीं बताएंगी. कोलकाता में (मई में) उनकी मृत्यु से पहले मैंने उनके साथ काफी समय बिताया था. जब मैं दूर रहता था तब भी वह मुझसे फोन पर नियमित रूप से बात करती रहती थीं.” वहीं अनिंदिता ने कहा कि ‘पिप्पा’ की टीम ने 102 साल पुराने गीत की धुन बदलने के संबंध में करार के उपयोग के बारे में लोगों को सूचित किया था लेकिन हैरानी की बात है कि अनिर्बान ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई.

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