उडुपी/बेंगलुरु. उडुपी की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने कॉलेज के शौचालय में अपनी सहपाठी का वीडियो बनाने की आरोपी तीन छात्राओं को शुक्रवार को सशर्त जमानत दे दी. मालपे की पुलिस ने 25 जुलाई को तीन छात्राओं और कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी. शुक्रवार को छात्राओं ने अतिरिक्त दीवानी न्यायाधीश और प्रथम श्रेणी अदालत के न्यायिक मजिस्ट्रेट श्याम प्रकाश के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था.
गृह मंत्री परमेश्वर ने कहा, सरकार घटना को हल्के में नहीं ले रही
कर्नाटक के गृह मंत्री डॉ. जी परमेश्वर ने शुक्रवार को कहा कि सरकार उडुपी कॉलेज के शौचालय में वीडियो बनाने की घटना को हल्के में नहीं ले रही है और इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी. डॉ. परमेश्वर ने कहा कि विपक्षी दल उनके बयान की अलग-अलग तरह से व्याख्या कर रहा है, जो अनुचित है. दरअसल, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस घटना को लेकर अपना आंदोलन तेज कर दिया है.
डॉ. परमेश्वर ने यहां संवाददाताओं से कहा, ”हमारी एक जिम्मेदारी है. हम, जिसके पास सरकार चलाने की जिम्मेदारी है, इस घटना को हल्के में नहीं लेंगे. हमारी जिम्मेदारी है, लेकिन भाजपा के नेता इसकी अलग-अलग तरह से व्याख्या कर रहे हैं, जो उचित नहीं लगता.” उडुपी जिले के एक पैरामेडिकल कॉलेज में 10 दिन पहले शौचालय में अपनी सहपाठी का वीडियो बनाने के सिलसिले में तीन छात्राओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. अदालत ने शुक्रवार को तीनों छात्राओं को सशर्त जमानत दे दी.
भाजपा ने शुक्रवार को तीनों आरोपी लड़कियों के खिलाफ उडुपी में विरोध मार्च निकाला और धरना प्रदर्शन किया. भाजपा ने मांग की कि इस मामले की विस्तृत जांच के लिए इसे राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण को सौंप दिया जाए. भाजपा विधायक गुरुराज गंतीहोल ने कहा कि हो सकता है कि पार्टी सदस्य और राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य खुशबू सुंदर ने मामले को ‘गलत समझा’ लिया हो.
खुशबू सुंदर ने एक बयान में कहा था कि शौचालय में किसी प्रकार का कोई भी छिपा हुआ कैमरा नहीं पाया गया था. इस बीच, हाई ग्राउंड्स पुलिस ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया पर निशाना साधने वाले ट्वीट के लिए भाजपा कार्यकर्ता शकुंतला एचएस को गिरफ्तार कर लिया है.