कठुआ हमला: आतंकवादियों की तलाश के लिये अभियान तेज

कठुआ आतंकी हमले की जांच में जम्मू-कश्मीर पुलिस की सहायता के लिए एनआईए ने टीम भेजी

कठुआ/जम्मू/नयी दिल्ली/मछेड़ी. जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में सेना के गश्ती दल पर घातक हमले के जिम्मेदार आतंकवादियों का पता लगाने और उन्हें खत्म करने के लिए मंगलवार को व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया. पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) आर.आर. स्वैन अभियान की निगरानी के लिए पहुंचे.

अधिकारियों ने बताया कि हमले में मारे गए पांचों सैनिकों के शव पोस्टमार्टम के बाद सेना को सौंप दिए गए हैं और अंतिम संस्कार के लिए उन्हें हवाई मार्ग से उनके घरों तक पहुंचाया गया है. उन्होंने बताया कि अतिरिक्ति पुलिस महानिदेशक आनंद जैन के साथ डीजीपी स्वैन ने क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया और चल रहे अभियानों की समीक्षा की.

तलाश अभियान का दायरा बढ़ाकर उधमपुर और कठुआ के समीपवर्ती जिलों के बड़े क्षेत्रों को शामिल कर लिया गया है, जिनमें बसंतगढ़, सेओज (उधमपुर का एक ऊंचाई वाला क्षेत्र) और कठुआ जिले के बानी, डग्गर और किंडली के ऊपरी इलाके शामिल हैं. अधिकारियों ने बताया कि भारतीय सेना की ‘पैरा’ इकाई के विशेष सुरक्षा र्किमयों को विशिष्ट क्षेत्रों में आतंकवादियों के खिलाफ लक्षित अभियान के लिए तैनात किया गया है.

जमीनी खोज टीमों को हेलीकॉप्टर और यूएवी निगरानी से सहायता मिल रही है. इसके अतिरिक्त, खोजी कुत्तों और मेटल डिटेक्टरों का उपयोग किया जा रहा है, विशेष रूप से क्षेत्र के घने जंगलों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. अधिकारियों ने बताया कि सेना, पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के साथ मिलकर मछेड़ी, बदनोटे, किंडली और लोहाई मल्हार इलाकों में संयुक्त घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें एक महत्वपूर्ण क्षेत्र को घेर लिया गया.

जम्मू-कश्मीर के बिलावर स्थित उप जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद पांचों सैनिकों के शवों को हवाई मार्ग से ले जाया गया.
बिलावर के अतिरिक्त उपायुक्त विनय खोसला ने बताया कि शवों को सेना को सौंप दिया गया और बाद में उन्हें हवाई मार्ग से वहां से ले जाया गया.

अधिकारियों ने संकेत दिया कि वर्तमान में आतंकवादियों के तीन से चार समूह, जिनमें अधिकतर विदेशी आतंकवादी हैं, इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने कहा कि उन्होंने हाल के दिनों में कठुआ-उधमपुर-डोडा क्षेत्र और पुंछ-राजौरी-रियासी क्षेत्र में विदेशी आतंकवादियों की मौजूदगी में वृद्धि देखी है. सोमवार को मछेड़ी में भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों द्वारा किये गए एक हमले में पांच जवान शहीद हो गए थे और इतनी ही संख्या में सैनिक घायल हुए थे.

कठुआ आतंकी हमले की जांच में जम्मू-कश्मीर पुलिस की सहायता के लिए एनआईए ने टीम भेजी

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) कठुआ में सेना के काफिले पर हुए आतंकवादी हमले की जांच में जम्मू-कश्मीर पुलिस की सहायता करेगा. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. इस हमले में पांच सैनिक मारे गए थे और पांच जवान घायल हुए थे. उन्होंने बताया कि एनआईए के अधिकारियों की एक टीम को पुलिस को जांच में हरसंभव सहयोग देने के लिए जम्मू क्षेत्र के कठुआ भेजा गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी ने आतंकवादी हमले की जांच के लिए मामला दर्ज नहीं किया है.

कठुआ जिला मुख्यालय से लगभग 150 किलोमीटर दूर लोहाई मल्हार के बदनोटा गांव के पास ऊबड़-खाबड़ मछेड़ी-किंडली-मल्हार पहाड़ी मार्ग पर गश्त कर रहे सैनिकों के एक दल पर भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों के एक समूह ने घात लगाकर हमला कर दिया, जिसमें एक जूनियर कमीशंड अधिकारी सहित पांच सैन्यकर्मी मारे गए और पांच अन्य घायल हो गए. यह एक महीने के भीतर जम्मू क्षेत्र में पांचवां आतंकवादी हमला था.

कठुआ मुठभेड़ : पहाड़ी रास्तों पर हिंसा के निशान दे रहे सैनिकों की बहादुरी के सबूत
सेना के गश्ती दल पर घात लगाकर आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले के एक दिन बाद मंगलवार को पेड़ों और पहाड़ी से घिरी सड़क पर खून के धब्बे, बिखरे हुए हेलमेट, गोलियों के खोखे, चकनाचूर शीशे और पंचर टायर वाले वाहन घटना की विभीषका तो बयां कर रहे हैं, साथ ही जवानों द्वारा बहादुरी से किए गए मुकाबले और घंटों चली मुठभेड़ की भी गवाही दे रहे हैं.

भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने सोमवार को जिला मुख्यालय कठुआ से लगभग 150 किलोमीटर दूर बदनोटा गांव के पास माछेड़ी-किंडली-मल्हार पहाड़ी मार्ग पर अपराह्न करीब साढ़े तीन बजे दो सैन्य वाहनों पर ग्रेनेड फेंका और अंधाधुंध गोलीबारी की. हमले में पांच सैनिक शहीद हो गए तथा पांच अन्य घायल हो गए.

यह एक महीने में जम्मू संभाग में पांचवां आतंकवादी हमला था. कश्मीर घाटी की तुलना में अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण क्षेत्र में आतंकवादी घटनाओं में वृद्धि के लिए अधिकारियों ने आतंकियों के पाकिस्तानी आकाओं को जिम्मेदार ठहराया है जो क्षेत्र में आंतकवाद को फिर से भड़काने की कोशिश कर रहे हैं. अधिकारियों ने घटना को याद करते हुए बताया कि सैनिकों ने हताहत होने के बावजूद साहस और दृढ़ता का परिचय दिया तथा कई घंटों तक आतंकवादियों का मुकाबला किया.

उन्होंने बताया कि माना जा रहा है कि तीन आतंकवादियों के समूह ने इस हमले को अंजाम दिया. आतंकवादियों ने सैनिकों पर अचानक हमले के लिए संभवत: पहाड़ी पर फैले घने जंगल की आड़ ली थी, जिसके बाद सैनिकों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की और तब तक लड़ते रहे जब तक आतंकवादी घने जंगल में भाग नहीं गए.

अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के कारण सोमवार देर रात को आतंकवादियों की तलाश करने के लिए अभियान को स्थगित कर दिया था लेकिन मंगलवार को इसे फिर से शुरू किया गया. उन्होंने बताया कि सेना, पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के संयुक्त तलाशी दलों ने कठुआ, उधमपुर और डोडा सहित विभिन्न दिशाओं से अभियान शुरू किया है. अधिकारियों ने बताया कि सेना के विशिष्ट पैरा-कमांडो और खोजी कुत्ते तलाशी अभियान में शामिल हैं जबकि ड्रोन और हेलीकॉप्टर की मदद से आसमान से नजर रखी जा रही है.

एक दिन पहले हुई हिंसा का स्पष्ट संकेत देते हुए दोनों वाहन एक दूसरे से लगभग 300 मीटर की दूरी पर खड़े थे. अधिकारियों ने सड़क की स्थिति को देखते हुए बताया कि वे शायद बहुत अधिक गति से नहीं जा रहे थे और मुड़ते समय गोलीबारी की चपेट में आ गए.
अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीणों ने भी अभियान में अहम भूमिका निभाई और हताहतों के बचाव में मदद की. कई इलाकों में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं और लोग आतंकवादी हमले की निंदा करने के लिए सड़कों पर उतरे हैं.
घटनास्थल से महज कुछ मीटर की दूरी पर दुकान चलाने वाले पूरन चंद शर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा

‘ को बताया, ” हमले से करीब 10 मिनट पहले एक गैर सैनिक बस वहां से गुजरी थी. हमने जोरदार धमाका सुना और शुरुआत में लगा कि टायर फटा है लेकिन कुछ देर बाद ही गोलीबारी की आवाज आने के महसूस हुआ कि मुठभेड़ शुरू हो गयी है.” उन्होंने बताया कि शाम पांच बजे तक गोलीबारी चलती रही और इसके एक घंटे बार भी रूक-रूक कर गोलियां चलीं.

शर्मा ने बताया, ”करीब 12 ग्रामीण घटना के समय मेरी दुकान पर थे. हम गोली से बचने के लिए छिप गए. जब गोलीबारी रूकी, तब हम हताहतों की मदद के लिए मौके पर पहुंचे. ” एक अन्य ग्रामीण विजय कुमार ने बताया कि करीब तीन दशक पहले जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से आतंकवाद का दौर शुरू होने के बाद यह पहली आतंकवादी घटना है. उन्होंने कहा, ”यहां करीब 100 परिवार रहते हैं और हमने इलाके में आतंकवादियों की कोई गतिविधि नहीं देखी.” कुमार का मानना है कि आतंकवादी बस से आए थे जो गोलीबारी से महज कुछ मिनट पहले ही इलाके से गुजरी थी.

घटना के कुछ घंटों बाद मौके पर पहुंचे कठुआ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनायत अली चौधरी आतंकवाद विरोधी अभियान की निगरानी के लिए अन्य अधिकारियों के साथ लावांग-मछेड़ी में डेरा डाले हुए हैं. एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ”आतंकवादियों को पकड़ने और उन्हें मार गिराने के प्रयास जारी हैं. संयुक्त तलाशी दल पूरे इलाके की तलाशी ले रहे हैं और यह जांच का विषय है कि आतंकवादी इस इलाके में कैसे पहुंचे.” पुलिस महानिदेशक आर आर स्वैन व्यक्तिगत रूप से ऊधमपुर जिले के बसंतगढ़ से जुड़े घने जंगलों में चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियान की निगरानी कर रहे हैं. इस इलाके में पहले भी कई मुठभेड़ हो चुकी हैं.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button