केरल उच्च न्यायालय ने डॉ. वंदना दास की हत्या की सीबीआई जांच संबंधी याचिका खारिज की

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 06 Feb 2024 07:15 PM
केरल उच्च न्यायालय ने डॉ. वंदना दास की हत्या की सीबीआई जांच संबंधी याचिका खारिज की
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कोच्चि. केरल उच्च न्यायालय ने पिछले साल मई में कोल्लम जिले के एक तालुका अस्पताल में एक मरीज द्वारा डॉ. वंदना दास की बर्बर तरीके से हत्या किए जाने के मामले में सीबीआई से जांच कराने के अनुरोध वाली याचिका को खारिज करते हुए मंगलवार को कहा कि पुलिस जांच की ईमानदारी या विश्वसनीयता पर शक करने की कोई वजह नहीं है.

उच्च न्यायालय ने साथ ही आरोपी की जमानत याचिका को भी यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उसके द्वारा किया गया अपराध ‘जघन्य’ प्रकृति का था. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष की इस दलील को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि अगर आरोपी को छोड़ा गया तो वह समाज के लिए खतरा साबित हो सकता है.

न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने अपराध की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा, ”उसके (पीड़िता के) पास बैठकर आरोपी लगातार उस पर चाकू से वार करता था जबकि अभागी पीड़िता जमीन पर गिर चुकी थी.” कोट्टायम जिले के कडुथुरुथी क्षेत्र की रहने वाली डॉ. दास अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं. वह अजीजिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक हाउस सर्जन थीं और अपने प्रशिक्षण के हिस्से के रूप में कोट्टाराक्कारा तालुका अस्पताल में काम कर रही थीं.

अदालत ने इस बात पर भी संज्ञान लिया कि आरोपी जी संदीप शराब पीने का आदी है और वह अपनी पत्नी और बच्चों से अलग रहता है. संदीप ने गुस्से में आकर अपनी पत्नी को जान से मारने का भी प्रयास किया था. अदालत ने कहा, ”संदीप के असामाजिक व्यक्तित्व विकार से ग्रस्त होने की बात भी कही जा रही है. अभियोजन पक्ष ने मामले में एक विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति और त्वरित सुनवाई के लिए कदम उठाए जाने की बात कही है.”

अदालत ने कहा, ”इसलिए मुकदमे को पूरा करने में अनावश्यक देरी नहीं हो सकती. उपरोक्त सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह सही नहीं होगा कि याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाए. इसलिए जमानत अर्जी को खारिज किया जाता है.” न्यायमूर्ति थॉमस ने मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच कराने की चिकित्सक के परिजनों की अर्जी को भी खारिज कर दिया.

डॉक्टर के पिता द्वारा दायर यचिका में आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने ”अपना पल्ला झाड़ने की जल्दबाजी में” प्राथमिक बयान में छेड़छाड़ की. अदालत ने कहा कि जिन मामलों में पुलिस शक के घेरे में होती है और उनके खिलाफ ऊंगली उठायी जा सकती है, उनमें जांच सीबीआई को सौंपी जा सकती है.

न्यायमूर्ति थॉमस ने कहा, ”हालांकि, उक्त सिद्धांत कोई अटल नियम नहीं है. इस मामले में जैसा कि पहले देखा गया है कि किसी भी पुलिस अधिकारी पर किसी आपराधिक इरादे या कृत्य का कोई आरोप नहीं है. याचिकाकर्ताओं (मृतका के माता-पिता) ने पुलिस पर केवल ‘कायरतापूर्ण कृत्य’ का आरोप लगाया है.”

उन्होंने कहा, ”याचिकाकर्ता ने पुलिस की ओर से चूक के सिवाय जांच के तरीके में कोई गंभीर खामी नहीं बतायी है.” दास के पिता के. जी. मोहनदास ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि कोट्टारक्करा पुलिस ने अपना पल्ला झाड़ने की जल्दबाजी में मृतका के मित्र द्वारा दिए प्राथमिक बयान में कथित तौर पर छेड़छाड़ की.

याचिका में यह भी कहा गया है कि पुलिस ”अपनी सुरक्षा खामियों को छिपाने” के लिए इस अपराध की बहुत ”उदासीन” तरीके से जांच कर रही है. डॉक्टर दास की पिछले साल मई में कोल्लम जिले के एक तालुका अस्पताल में एक मरीज जी. संदीप ने हत्या कर दी थी. संदीप पेशे से एक स्कूल शिक्षक है.

पुलिस संदीप को इलाज के लिए अस्पताल लाई थी तभी 10 मई की सुबह उसने पैर की चोट के इलाज के दौरान शुरुआत में र्सिजकल कैंची से पुलिस अधिकारियों और एक व्यक्ति पर हमला किया और फिर डॉ. दास पर हमला कर दिया. उसने डॉ. दास पर कैंची से कई वार किए. डॉ. दास को इलाज के लिए तिरुवनंतपुरम के एक निजी अस्पताल ले जाया गया लेकिन उनकी मौत हो गयी. अदालत ने कहा कि ऐसा कोई आरोप नहीं है कि आरोपी को अस्पताल लाने वाले पुलिस अधिकारियों का घटनास्थल से कथित तौर पर भागते वक्त कोई आपराधिक इरादा था.

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