‘डरो मत’ नारे के साथ खरगे ने कांग्रेस अध्यक्ष का कार्यभार संभाला

कांग्रेस सत्तासीन नेताओं के झूठ एवं नफरत के चक्र को तोड़ेगी: खरगे

नयी दिल्ली. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को पार्टी अध्यक्ष का औपचारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया और कहा कि पार्टी मौजूदा सरकार की ‘‘झूठ एवं नफरत की व्यवस्था’’ को ध्वस्त करेगी. इस मौके पर उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए राहुल गांधी के नारे ‘डरो मत’ को उद्धृत किया. 24 साल बाद गांधी परिवार से बाहर का कोई नेता कांग्रेस का अध्यक्ष बना है.

सोनिया गांधी ने खरगे को पार्टी की बागडोर सौंपते हुए कहा, ‘‘परिवर्तन संसार का नियम है… आज, मैं इस दायित्व से मुक्त हो जाऊंगी और यह भार मेरे सिर से उतर जाएगा और इसलिए राहत महसूस कर रही हूं.’’ दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले 80 वर्षीय खरगे ने 17 अक्टूबर को हुए ऐतिहासिक चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वी 66 वर्षीय शशि थरूर को मात दी थी. पार्टी के 137 साल के इतिहास में छठी बार अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुआ था.

खरगे ने ऐसे समय में कार्यभार संभाला है जब पार्टी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है. कांग्रेस अभी अपने दम पर सिर्फ दो राज्यों में सत्ता में है और तत्काल उसे हिमाचल प्रदेश और गुजरात में विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरना है. दोनों राज्यों में उसे आक्रामक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एक आम आदमी पार्टी (आप) से मुकाबला करना है.

मौजूदा चुनौतियों को स्वीकार करते हुए खरगे ने कहा कि हिमाचल प्रदेश और गुजरात के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी चुनाव होंगे तथा भाजपा को पराजित करने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को अपना सर्वस्व दांव पर लगाना होगा. उन्होंने भाजपा पर कांग्रेस द्वारा स्थापित लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया. खरगे ने यहां कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक समारोह में कहा, “हमें इन राज्यों में जोरदार प्रदर्शन करना होगा और हमें इन राज्यों में सफल होने के लिए सभी की ताकत और ऊर्जा की जरूरत होगी.”

पार्टी अध्यक्ष पद के लिए निर्वाचन पत्र सौंपे जाने के बाद भावुक खरगे ने कहा, “मेरे लिए यह बहुत ही भावुक क्षण है और मैं एक मजदूर के बेटे, एक सामान्य कार्यकर्ता को कांग्रेस का अध्यक्ष चुनने के लिए पार्टी के लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूं.” समारोह के तुरंत बाद, सोनिया गांधी उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यालय तक ले गईं. राहुल गांधी और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ-साथ ‘जी 23’ समूह के नेता भी इस मौके पर मौजूद थे.

पार्टी कार्यकर्ताओं ने पार्टी के झंडे लहराए और उनका जोरदार स्वागत किया. खरगे ने कहा, ‘‘हम महात्मा गांधी के सिपाही हैं और हम किसी से नहीं डरते हैं. जब कांग्रेस का कार्यकर्ता अपने अंदर से डर को निकाल देगा तो बड़े से बड़ा साम्राज्य भी घुटने टेक देगा. इसीलिए मैं राहुल गांधी के शब्दों ‘डरो मत’ को याद करता हूं. यही नारा हम आगे लेकर चलेंगे.’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं जानता हूं कि यह एक कठिन दौर है और देश में कांग्रेस द्वारा स्थापित लोकतंत्र में बदलाव के लिए जिस तरह से प्रयास किए जा रहे हैं, उसे सभी जानते हैं.’’ खरगे ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि इस साल मई में उदयपुर में सोनिया गांधी के नेतृत्व के तहत तैयार ‘ब्लूंिप्रट’ को लागू करना उनकी जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा, ‘‘उदयपुर नव संकल्प ंिचतिन शिविर में हमने तय किया था कि पार्टी में 50 फीसदी पद 50 साल से कम उम्र के लोगों के लिए आरक्षित रहेंगे. सभी संगठनात्मक पद भरे जाएंगे….

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ये कैसा न्यू इंडिया है जिसमें युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है? किसानों को जीप के नीचे कुचल दिया जा रहा है? महिलाओं पर अत्याचार बढ़ता जा रहा है. जनता महंगाई से त्रस्त है और सरकार आंखें बंद करके बैठी है. सरकार अपने चंद पूंजीपति मित्रों को मदद कर रही है.’’ खरगे ने आगे कहा, ‘‘सरकार सो रही है, लेकिन ईडी (प्रवर्तन निदेशालय), आयकर, सीबीआई विपक्ष के दमन के लिए 24 घंटे काम कर रहे हैं. दलित, अल्पसंख्यक और शोषित समाज को अपमानित किया जाता है. उनके मौके छीने जा रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि बहुत से लोग कांग्रेस के साथ औपचारिक तौर पर जुड़े हुए नहीं हैं, लेकिन वे पार्टी की विचारधारा में विश्वास करते हैं और उसका समर्थन करते हैं.

खरगे ने कहा, ‘‘सब जानते हैं कि जिस लोकतंत्र की स्थापना कांग्रेस ने की थी, उसे बदलने की कोशिश आज हो रही है. किसने सोचा होगा कि देश में ऐसी राजनीति का दौर आएगा, जिसमें झूठ का बोलबाला होगा और सत्ता में बैठे लोग लोकतंत्र को कमजोर करने में जुटे होंगे. लेकिन मैं यह भी जानता हूं कि झूठ, फरेब और नफरत का ये तंत्र हम तोड़कर रहेंगे.’’ उन्होंने आरोप लगाया कि नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहा जाता है और महात्मा गांधी को देशद्रोही कहा जाता है. उन्होंने आरोप लगाया कि बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान को बदलने और इसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संविधान से बदलने की कोशिश की जा रही है.

खरगे ने कहा कि इस जिम्मेदारी को संभालना उनके लिए सौभाग्य और गौरव की बात है और अपनी मेहनत और अनुभव से जो कुछ संभव होगा, वह करेंगे. उन्होंने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुरू करने के लिए राहुल गांधी की सराहना करते हुए कहा कि इससे देश में नई ऊर्जा आई है.

सोनिया गांधी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा उम्मीद जताई कि खरगे के नेतृत्व में पार्टी मजबूत होगी. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि उनसे पूरी पार्टी को प्रेरणा मिलेगी, एक संदेश मिलेगा और इनके नेतृत्व में कांग्रेस मजबूत होगी.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे विश्वास है कि पार्टी के सभी कार्यकर्ता और नेता आपस में मिलजुलकर ऐसी शक्ति बनेंगे जो हमारे महान देश के सामने खड़ी चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकेगी.’’ कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने यह भी कहा, ‘‘कांग्रेस के सामने पहले भी बड़े-बड़े संकट आए हैं, लेकिन पार्टी ने कभी हार नहीं मानी है. सभी को मिलकर, संकल्प के साथ और एकता के साथ आगे बढ़ना है.’’

खरगे ने पार्टी के लिए सोनिया के योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘‘आपने नि:स्वार्थ भावना से पार्टी को संभाला और हमेशा सच्चाई की राह पर चलती रहीं. सिर्फ सत्ता के लिए राजनीति करने के इस दौर में त्याग और समर्पण की जो मिसाल आपने कायम की है, उसका दूसरा उदाहरण मिलना मुश्किल है. ’’ पदभार ग्रहण करने से पहले, खरगे ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्रियों पंडित जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी तथा पूर्व उप-प्रधानमंत्री जगजीवन राम को भी श्रद्धांजलि अर्पित की.

नए कांग्रेस अध्यक्ष के सामने चुनौतियों का अंबार
कांग्रेस के नए अध्यक्ष का कार्यभार बुधवार को संभालने वाले मल्लिकार्जुन खरगे की इस जिम्मेदारी को अगर ‘कांटों का ताज’ कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योंकि एक ओर उन्हें पार्टी के चुनावी प्रदर्शन में सुधार लाना है वहीं उन्हें आम लोगों में पार्टी की पकड़ को भी मजबूत बनाने की चुनौती का सामना करना है.

उनका कार्यकाल ऐसे समय पर शुरू हुआ है जब कांग्रेस चुनावी रूप से सबसे खराब स्थिति में है और उसे लगातार दो लोकसभा चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा है. इसके अलावा 2020 से पार्टी करीब 10 चुनाव हार चुकी है. साथ ही उसे विपक्ष में भी क्षेत्रीय दलों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है. खरगे को पार्टी संगठन को पुनर्जीवित कर कांग्रेस को चुनावी लड़ाई के लिए तैयार करना है वहीं राज्यों में गुटबाजी दूर करने पर भी ध्यान देना होगा.

खरगे के पार्टी अध्यक्ष बनने के साथ ही 137 साल पुरानी पार्टी का इरादा, एक परिवार द्वारा संचालित संगठन की छवि को दूर करना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘‘वंशवादी राजनीतिक दलों’’ पर हमला बोलते हुए हाल ही में आरोप लगाया था कि ऐसे दल लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं. खरगे के सामने विपक्षी दलों के बीच कांग्रेस का प्रभुत्व बहाल करने की चुनौती है, वहीं उदयपुर में मई में आयोजित ंिचतन शिविर में पार्टी द्वारा घोषित सुधारों को लागू करने की भी जिम्मेदारी है.

जगजीवन राम ने 1969 में कांग्रेस का नेतृत्व किया था और उनके बाद 50 साल में यह पद संभालने वाले खरगे दूसरे दलित नेता हैं. 24 साल बाद गांधी परिवार से बाहर का कोई व्यक्ति कांग्रेस का अध्यक्ष बना है. खरगे कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) प्रमुख भी नियुक्त किए गए. लोकसभा में वर्ष 2014 से 2019 तक खरगे कांग्रेस के नेता रहे. जून, 2020 में खरगे कर्नाटक से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए और हाल तक उच्च सदन में विपक्ष के नेता थे.

खरगे ने ऐसे समय में कार्यभार संभाला है जब कांग्रेस अपने दम पर सिर्फ दो राज्यों राजस्थान एवं छत्तीसगढ़ में सत्ता में है और तत्काल उसे हिमाचल प्रदेश और गुजरात में विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरना है. खरगे के सामने तात्कालिक चुनौती हिमाचल प्रदेश और गुजरात में विधानसभा चुनाव है. दोनों राज्यों में उसे आक्रामक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आम आदमी पार्टी (आप) से मुकाबला करना है.

उन्हें अगले साल छत्तीसगढ़, राजस्थान और अपने गृह राज्य कर्नाटक सहित नौ विधानसभा चुनावों के लिए तैयार रहना होगा. कर्नाटक में वह नौ बार विधायक रहे और पार्टी एवं सरकार में लगभग सभी अहम पदों पर रहे, हालांकि वह कभी भी राज्य के मुख्यमंत्री नहीं बन सके. इन प्रारंभिक चुनावी चुनौतियों के बाद खरगे के लिए एक अहम परीक्षा 2024 के आम चुनावों से पहले विपक्ष में कांग्रेस की प्रमुखता बहाल करना होगा.

खरगे ऐसे समय में पार्टी अध्यक्ष बने हैं जब पार्टी आंतरिक उठा-पटक का सामना कर रही है और कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है.
उन्हें पार्टी के भीतर “पुराने बनाम नए” चुनौती का भी कुशलता से हल निकालना होगा क्योंकि पार्टी ने युवा पीढ़ी के नेताओं को 50 प्रतिशत पद देने का वादा किया है.

खरगे के कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालने के बाद भाजपा ने बुधवार को हैरानी जताई कि यदि गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों में विपक्षी पार्टी का प्रदर्शन खराब होता है तो क्या उन्हें बलि का बकरा बनाया जाएगा. मौजूदा चुनौतियों को स्वीकार करते हुए खरगे ने कहा कि हिमाचल प्रदेश और गुजरात के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी चुनाव होंगे तथा भाजपा को पराजित करने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को अपना सर्वस्व दांव पर लगाना होगा. खरगे ने कहा, “हमें इन राज्यों में जोरदार प्रदर्शन करना होगा और हमें इन राज्यों में सफल होने के लिए सभी की ताकत और ऊर्जा की जरूरत होगी

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