Mashaal Raas Garba : जलती आग के बीच गरबा करते हैं युवा, अधूरी है नवरात्रि इसे देखे बगैर

Author: Navabharat News Group
UPDATED: Thu, 15 Oct 2026 02:02 PM
Mashaal Raas Garba : जलती आग के बीच गरबा करते हैं युवा, अधूरी है नवरात्रि इसे देखे बगैर
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गुजरात के जामनगर में होने वाला मशाल रास एक ऐसा अनोखा लोकनृत्य है, जिसमें कलाकार हाथों में जलती मशालें लेकर नाचते हैं और जलते अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं।

गुजरात में नवरात्रि का त्योहार आते ही हर तरफ गरबा और गरबी की रौनक देखने को मिलती है. लेकिन जामनगर में होने वाला मशाल रास इस त्योहार को एक अलग पहचान देता है. छोटेकाशी के नाम से मशहूर इस शहर में श्री पटेल युवक गरबी मंडल की ओर से निभाई जा रही यह परंपरा सात दशकों से भी ज्यादा पुरानी है.

इस नृत्य शैली की शुरुआत श्री पटेल युवक गरबा मंडल ने वर्ष 1957 में की थी। यह जामनगर और पूरे सौराष्ट्र क्षेत्र में नवरात्रि उत्सव के दौरान मनाई जाने वाली अनूठी परंपराओं में से एक है। यह नृत्य शैली मुंबई के कुछ हिस्सों में भी फैल चुकी है। स्थानीय गरबा समूहों ने दशकों से इस नृत्य को संरक्षित रखने में योगदान दिया है।

मशाल रास में 12 पुरुष नर्तक शामिल होते हैं जो केडियु चोइयिनी पहनते हैं, जो एक प्लीटेड बंधनी ट्यूनिक और ट्राउजर होता है। नर्तक मशाल का उपयोग करते हैं, जो सूती कपड़े से बनी मशालें होती हैं जिन्हें लकड़ी के डंडों से ढका जाता है, तेल में भिगोया जाता है और जलाया जाता है।

भीतरी घेरे में छह नर्तक हैं, जबकि बाहरी घेरे में छह अन्य नर्तक हैं। दोनों घेरे विपरीत दिशाओं में गति करते हुए अग्नि और नृत्य के समन्वित पैटर्न बनाते हैं। नर्तकों द्वारा प्रस्तुत नृत्य शैली स्वस्तिक और त्रिशूल आकृतियों पर आधारित है।

मशालें अंधेरे को रोशन करती हैं, जबकि 12 पुरुष एक साथ नृत्य करते हुए आग की मनमोहक आकृतियाँ बनाते हैं। गुजरात के पारंपरिक वस्त्र पहने हुए नर्तक धधकती आग के ऊपर से छलांग लगाते हुए वृत्त और प्रतीकात्मक नृत्य करते हैं। यह जामनगर में नवरात्रि उत्सव के दौरान देवी दुर्गा के सम्मान में किया जाने वाला मशाल रास नृत्य है। यह 70 साल पुरानी परंपरा भक्ति, साहस और भव्यता का अनूठा संगम है।

नृत्य के साथ भक्तिपूर्ण नवरात्रि गीत भी बजते हैं, जैसे रमती आवे माड़ी, रमती आवे, आज मात मेल्डी, रमती आवे । जैसे-जैसे लय गति पकड़ती है, नर्तक अपनी गोलाकार संरचना को बरकरार रखते हुए अपनी गति तेज कर देते हैं।

इस प्रदर्शन का चरम बिंदु तब आता है जब घेरे के बाहरी किनारे पर खड़ा कोई व्यक्ति जलती हुई रुई की गेंदें प्रदर्शन क्षेत्र में फेंकता है। ये जलती हुई सामग्रियां एक अग्नि-वलय का निर्माण करती हैं, जिसके ऊपर से नर्तक बिना चोट खाए छलांग लगाते हैं। यह साहसी कार्य इस प्रदर्शन को अन्य गरबा और डांडिया रास नृत्यों से अलग करता है।

 

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