मुंबई हवाई अड्डे पर तुर्किये की कंपनी सेलेबी को सेवा से हटाने के मामले में एमआईएएल को अदालत से राहत

Author: navabharat digital
UPDATED: Wed, 23 Jul 2025 03:06 PM
मुंबई हवाई अड्डे पर तुर्किये की कंपनी सेलेबी को सेवा से हटाने के मामले में एमआईएएल को अदालत से राहत
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मुंबई: मुंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एमआईएएल) को तुर्किये की कंपनी ‘सेलेबी’ का अनुबंध समाप्त होने के बाद ‘ग्राउंड और ‘ब्रिज हैंडंिलग’ सेवाओं के लिए निविदाओं को अंतिम रूप देने से रोकने वाले अपने पहले के अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया।
न्यायमूर्ति सोमशेखर सुंदरेशन की पीठ ने कहा कि मई में दी गई अंतरिम सुरक्षा जारी नहीं रह सकती क्योंकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने इसी महीने की शुरूआत में दिल्ली हवाई अड्डे के इसी तरह के अनुबंध को समाप्त करने और सुरक्षा मंजूरी को रद्द करने के खिलाफ ‘सेलेबी’ की याचिका खारिज कर दी थी।

अदालत ने कहा, ‘‘अब यह स्पष्ट है कि कंपनी के स्थान पर किसी और को सेवा पर रखने के फैसले को रोकना संभव और उचित नहीं है। अंतरिम आदेश को जारी रखना अब उचित नहीं है और इसलिए इसे रद्द किया जाता है।’’

अदालत ने कहा कि सुरक्षा मंजूरी रद्द होने के बाद याचिकाकर्ता कंपनी के सभी कर्मचारियों और उपकरणों को एक अन्य कंपनी ‘इंडो थाई एयरपोर्ट र्सिवसेज लिमिटेड’ के नियंत्रण में रखा गया है, जो अब मुंबई हवाई अड्डे पर ‘ग्राउंड हैंडंिलग और ब्रिज माउंंिटग’ सेवाएं प्रदान कर रही है।

‘ग्राउंड हैंडंिलग’ का मतलब हवाईअड्डे पर विमान के संचालन से संबंधित सभी जमीनी गतिविधियों और सेवाओं से है जिनमें यात्रियों के दस्तावेजों की जांच सामान व कॉर्गों संबंधी गतिविधियों और विमान उड़ान की तैयारियां आदी शामिल होती हैं। जबकि ‘ब्रिज माउंंिटग’ आमतौर पर हवाई अड्डे के र्टिमनल गेट से हवाई जहाज तक फैला होता है। जिससे यात्रियों को बाहर जाए बिना और खराब मौसम के संपर्क में आए बिना विमान में चढ़ने और उतरने की सुविधा मिलती है।

अदालत ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता कंपनी ने हवाई अड्डे तक सभी प्रत्यक्ष पहुंच खो दी है।’’ उच्च न्यायालय ने कहा कि अनुबंध समझौते के अनुसार, संबंधित पक्षों के बीच सुलह के प्रयास हो रहे हैं और ‘सेलेबी’ द्वारा दायर याचिकाओं का निपटारा कर दिया गया है।

‘आॅपरेशन ंिसदूर’ के दौरान तुर्किये द्वारा पाकिस्तान को दिए गए समर्थन पर भारत में तीखी प्रतिक्रिया के बीच भारत के विमानन सुरक्षा नियामक बीसीएएस (नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो) ने राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित आधार पर ‘सेलेबी एयरपोर्ट र्सिवसेज इंडिया’ की सुरक्षा मंजूरी रद्द कर दी थी।

कंपनी ने अपनी सुरक्षा मंजूरी रद्द करने और बाद में एमआईएएल के साथ अपने अनुबंध को समाप्त करने के ख़लिाफ उच्च न्यायालय का रुख किया था। सुरक्षा मंज़ूरी रद्द करने को चुनौती देने वाली कंपनी की याचिका मुंबई उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के समक्ष लंबित है और बृहस्पतिवार को इस पर सुनवाई होने की संभावना है।

‘सेलेबी’ के पास ‘सेलेबी नैस एयरपोर्ट र्सिवसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ में 59 प्रतिशत हिस्सेदारी है। याचिका में भारत के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत बीसीएएस द्वारा दी गई सुरक्षा मंज़ूरी रद्द करने के प्रशासनिक निर्णय को निलंबित और निरस्त करने का अनुरोध किया गया था।

इसमें एमआईएएल द्वारा ‘ब्रिज माउंटेड इक्विपमेंट र्सिवस एग्रीमेंट’, ‘कंसेशन एग्रीमेंट’ और ‘ग्राउंड हैंडंिलग र्सिवसेज’ की समाप्ति को भी रद्द करने का अनुरोध किया गया था। अंतरिम राहत के तौर पर ‘सेलेबी’ ने उच्च न्यायालय से एमआईएएल को इन सेवाओं के लिए एक नयी ‘ग्राउंड हैंडंिलग एजेंसी’ के चयन के लिए 17 मई को जारी निविदाओं पर कोई भी अंतिम निर्णय लेने से रोकने का अनुरोध किया था।

अवकाश पीठ ने 26 मई को एमआईएएल को निविदाओं पर अपना अंतिम निर्णय लेने से रोकते हुए एक अंतरिम आदेश पारित किया था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुरक्षा मंजूरी रद्द करने के खिलाफ ‘सेलेबी’ की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इसमें ‘‘अनिवार्य राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी विचार’’ और ‘‘भू-राजनीतिक विचार’’ शामिल हैं, जिसने केंद्र को मंजूरी रद्द करने के लिए ‘‘बाध्य’’ किया।

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