नयी दिल्ली. कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की नकल उतारे जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हमले पर बुधवार को यह कहते हुए पलटवार किया कि यह मुद्दा उठा कर 140 से अधिक सांसदों के निलंबन से ध्यान भटकाने के लिए ”हताशा भरा प्रयास” किया जा रहा है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने भी कहा कि एक सांसद द्वारा की गई ‘मिमिक्री’ के गैरजरूरी मुद्दे को हवा देने के लिए पूरा ‘मोदी तंत्र’ सक्रिय है, लेकिन सांसदों के निलंबन पर चुप है.
मुख्य विपक्षी दल ने भाजपा पर उस समय निशाना साधा है जब उपराष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को फोन किया और संसद परिसर में कुछ सांसदों के ‘अशोभनीय आचरण’ पर अत्यंत दुख व्यक्त किया तथा खुद धनखड़ ने सदन में कहा कि उनके समुदाय (जाट) और किसान समाज का अपमान किया गया है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि ‘मिमिक्री’ (नकल उतारने) का मुद्दा उठाकर सांसदों के निलंबन से ध्यान भटकाने के अंधाधुंध प्रयास हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि संसद के इतिहास में आज तक कभी भी इतने बड़े पैमाने पर सांसदों का निलंबन नहीं हुआ है.
रमेश ने 2018 में राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को गले लगाने के बाद लोकसभा में प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए भाषण की एक वीडियो क्लिप साझा की और कहा, ”मिमिक्री की बात करने वाले ज.रा याद करें कि किसने किसकी मिमिक्री की थी और वह भी लोकसभा में?”
कांग्रेस महासचिव ने कहा, ”पूरा मोदी तंत्र अब तथाकथित मिमिक्री के गैर जरूरी मुद्दे पर सक्रिय हो रहा है. जबकि यह असली मुद्दे पर चुप है कि मैसूर के एक भाजपा सांसद ने 13 दिसंबर को लोकसभा में दो आरोपियों के प्रवेश क्यों और कैसे कराये, जिन पर अब आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए के तहत आरोप दर्ज किए गए हैं. पूरी तरह से वैध मांग करने के लिए 142 सांसदों के निलंबन पर भी यह तंत्र चुप है.”
उन्होंने एक अन्य पोस्ट में कहा, ”10 अगस्त 2017 को हामिद अंसारी की विदाई का दिन था, जो दस साल के लंबे कार्यकाल के बाद उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति पद से सेवानिवृत्त हो रहे थे. तब यह सबसे चौंकाने वाली बात थी कि प्रधानमंत्री ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित राजनयिकों में से एक अंसारी का मज.ाक उड़ाया, उनकी पहचान को उनके धर्म तक सीमित कर दिया था और वास्तव में आरोप लगाया था कि उनकी संपूर्ण व्यावसायिक और राजनीतिक उपलब्धियां उनकी धार्मिक पहचान के कारण थीं.”
रमेश ने कहा, ”संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के अपमान की बात करने वाले ऐसे प्रधानमंत्री और उनकी वाह-वाह करने वाले लोग पाखंडी और अवसरवादी हैं. यह संसद से 144 सांसदों के अलोकतांत्रिक निलंबन और 13 दिसंबर को लोकसभा में चौंकाने वाले सुरक्षा उल्लंघन से ध्यान भटकाने के अलावा और कुछ नहीं है.”
निलंबित सांसदों ने बुधवार को संसद के नए भवन के मकर द्वार पर धरना दिया था. इस दौरान तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सदस्य कल्याण बनर्जी ने राज्यसभा के सभापति और लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा, सदनों की कार्यवाही का संचालन किए जाने की नकल उतारी थी. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी बनर्जी द्वारा कार्यवाही के संचालन की नकल किए जाने का मोबाइल फोन से वीडियो बनाते देखे गए थे.
सुरक्षा चूक मामले में भाजपा सांसद सिम्हा से पूछताछ क्यों नहीं हुई : कांग्रेस
कांग्रेस ने संसद के दोनों सदनों से विपक्षी दलों के 141 सांसदों के निलंबन को लेकर बुधवार को सरकार पर निशाना साधा और प्रश्न किया कि सुरक्षा चूक के मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद प्रताप सिम्हा से अब तक पूछताछ क्यों नहीं की गई ”जिन्होंने दोनों आरोपियों को संसद में प्रवेश दिलाने में मदद की थी.” पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”लोकसभा में हुई बेहद गंभीर सुरक्षा चूक की घटना को ठीक एक सप्ताह हो चुका है. उस खतरनाक घटना ने पूरे देश को चौंका दिया.”
उन्होंने कहा,” प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष का कहना है कि मामले की जांच शुरू हो गयी है. ठीक है. लेकिन ऐसा क्यों है कि सात दिन के बाद भी भाजपा सांसद प्रताप सिम्हा, जिन्होंने लोकसभा में दो आरोपियों को प्रवेश दिलाने में मदद की, उनसे अभी तक पूछताछ नहीं की गई है?” रमेश ने कहा कि यह बहुत ही विचित्र स्थिति है क्योंकि आरोपियों के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए (गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत मामला दर्ज किया गया है. उन्होंने कहा, “इस बीच13 दिसंबर की घटना पर संसद में गृहमंत्री के बयान की सीधी, सरल और पूरी तरह से वैध मांग करने पर ‘इंडिया’ गठबंधन के 142 सांसदों को निलंबित कर दिया गया है.”
सांसदों के निलंबन पर सोनिया का आरोप : लोकतंत्र का गला घोंट रही है सरकार
कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने संसद से 141 विपक्षी सदस्यों के निलंबन को लेकर बुधवार को सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि यह सरकार लोकतंत्र का गला घोंट रही है. पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने यह दावा भी किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद की सुरक्षा में चूक की ‘अक्षम्य घटना’ पर संसद के बाहर अपने विचार रखे जिससे स्पष्ट है कि सदन की गरिमा की उन्हें कोई परवाह नहीं है.
सोनिया गांधी ने कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में कहा, “इस सरकार द्वारा लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है. इससे पहले कभी भी इतने सारे विपक्षी सांसदों को सदन से निलंबित नहीं किया गया, और वह भी केवल एक, बिल्कुल उचित और वैध मांग उठाने के लिए.” उन्होंने कहा कि संसद के विपक्षी सदस्यों ने 13 दिसंबर की असाधारण घटना को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में गृह मंत्री से एक बयान दिए जाने की मांग की थी. कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष के मुताबिक, सरकार की ओर से विपक्ष की मांग पर जैसा अहंकारपूर्ण व्यवहार किया गया, उसका वर्णन करने के लिए उनके पास शब्द नहीं हैं.
देश में एक पार्टी का शासन स्थापित करना चाहते हैं प्रधानमंत्री और भाजपा : खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद के दोनों सदनों से विपक्षी दलों के 141 सांसदों के निलंबन को लेकर बुधवार को सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा भारतीय जनता पार्टी देश में एक ही दल का शासन स्थापित करना चाहते हैं.
खरगे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “141 सांसदों को निलंबित कर दिया गया है क्योंकि वे गंभीर सुरक्षा उल्लंघन के मुद्दे पर गृह मंत्री से बयान चाहते थे. 6 आरोपियों पर आतंकवाद विरोधी यूएपीए कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है.” उन्होंने सवाल किया, “आरोपियों के प्रवेश में मदद करने वाले भाजपा सांसद (प्रताप सिम्हा) से अब तक पूछताछ नहीं की गई है. यह कैसी जांच है? संसदीय सुरक्षा के लिए जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों को जवाबदेह क्यों नहीं बनाया गया?”
खरगे ने यह भी पूछा, “जाहिर तौर पर घुसपैठिए महीनों से इसकी योजना बना रहे थे, तो फिर इस बड़ी खुफिया विफलता के लिए कौन जिम्मेदार है? संसद की बहुस्तरीय सुरक्षा के बावजूद, दो लोग अपने जूते में पीले रंग के धुएं वाली गैस के केन को छिपाकर सदन में प्रवेश करने में कैसे कामयाब हुए?” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी देश में “एक पार्टी का शासन” स्थापित करना चाहती है.
क्या मैं कहूं कि दलित होने की वजह से मुझे संसद में बोलने नहीं दिया जाता: खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को कहा कि जाति को हर मुद्दे में नहीं घसीटा जाना चाहिए. उन्होंने साथ ही यह सवाल भी किया कि क्या उन्हें हर बार राज्यसभा में बोलने की अनुमति नहीं मिलने पर यह कहना चाहिए कि दलित होने के कारण ऐसा हुआ है.
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने संसद परिसर में उनकी, तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद द्वारा नकल उतारे जाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए उच्च सदन में कहा कि संसद परिसर में उनकी नकल उतारकर किसान समाज और उनकी जाति (जाट) का अपमान किया गया है. खरगे ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सभापति का काम दूसरे सदस्यों को संरक्षण देना है लेकिन वह खुद इस तरह का बयान दे रहे हैं.
उन्होंने कहा, ”मुझे अक्सर राज्यसभा में बोलने की अनुमति नहीं दी जाती है. क्या मुझे यह कहना चाहिए कि मैं दलित हूं… इसलिए… उन्हें जाति के नाम पर बोल कर लोगों को नहीं भड़काना चाहिए.” कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यह देश के लिए बहुत दुखद दिन है जब संवैधानिक पदों पर बैठे लोग अपनी जातियों के बारे में बात करते हैं.