नयी दिल्ली/कोलकाता. संसद के शीतकालीन सत्र में लोकसभा में अभी तक विपक्ष के कुल 95 सदस्यों को तख्तियां दिखाने और सदन की अवमानना के मामले में सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किया जा चुका है और इस तरह विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के करीब दो-तिहाई सदस्य सदन से बाहर हो गए हैं.
सदन में अब मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत नौ ही सदस्य रह गए हैं. लोकसभा में कांग्रेस के सदस्यों की कुल संख्या 48 है. निचले सदन में मंगलवार को 49 विपक्षी सदस्यों को संसद के वर्तमान शीतकालीन सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया. अब तक कुल 95 लोकसभा सदस्यों को निलंबित किया जा चुका है. इससे पहले गत सप्ताह बृहस्पतिवार को 13 सदस्यों को और सोमवार को 33 सदस्यों को निलंबित कर दिया गया था.
सदन में ‘इंडिया’ गठबंधन के सदस्यों की संख्या 138 है जिनमें से केवल 43 विपक्षी सदस्य ऐसे हैं जिन्हें निलंबित नहीं किया गया है.
निलंबित किए गए सदस्यों में सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंदोपाध्याय, द्रमुक के नेता टी आर बालू और जद(यू) के राजीव रंजन सिंह शामिल हैं.
तृणमूल कांग्रेस के कुल 22 लोकसभा सदस्यों में से 13 सदस्यों को निलंबित किया जा चुका है और अभिषेक बनर्जी, शत्रुघ्न सिन्हा, मिमी चक्रवर्ती और नुसरत जहां समेत 9 सदस्य सदन में बचे हैं. लोकसभा में द्रमुक के कुल 24 सदस्य हैं और इसके 16 सदस्यों को निलंबित किया जा चुका है.
‘इंडिया’ गठबंधन में शामिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के शरद पवार नीत धड़े के पांच लोकसभा सदस्यों में से सुप्रिया सुले समेत तीन सांसदों को निलंबित किया जा चुका है और केवल दो सदस्य सदन में रह गए हैं. इसी तरह समाजवादी पार्टी के तीन सदस्यों में से केवल शफीकुर्रहमान बर्क हैं जिन्हें निलंबित नहीं किया गया है.
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला भी निलंबित सदस्यों में शामिल हैं और उनकी पार्टी के तीन में से एक ही सदस्य सदन में रह गए हैं. शिवसेना के उद्धव ठाकरे नीत धड़े के एक भी सदस्य को सदन से निलंबित नहीं किया गया है. जद(यू) के लोकसभा में कुल 16 सदस्य हैं और 11 को निलंबित कर दिया गया है.
माकपा के कुल तीन लोकसभा सदस्यों में से दो को निलंबित कर दिया गया है और सदन में उसका एक ही सदस्य बचा है, वहीं भाकपा के दो सांसदों में से एक का निलंबन हुआ है और एक सदन में रह गए हैं. विपक्षी दल गत 13 दिसंबर को संसद में सुरक्षा चूक की घटना के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से बयान देने की मांग को लेकर पिछले कुछ दिन से सदन में तख्तियां दिखाकर प्रदर्शन कर रहे थे.
सदन की अवमानना के मामले में इन सदस्यों को निलंबित कर दिया गया है.
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सभी तीन लोकसभा सदस्यों को भी निलंबित कर दिया गया है. सदन में वीसीके, आरएसपी और आम आदमी पार्टी के एक-एक सदस्य हैं और इन तीनों को निलंबित कर दिया गया है. हाल में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से निलंबित किए गए लोकसभा सदस्य दानिश अली भी निचले सदन से निलंबित सदस्यों में शामिल हैं. बसपा ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा नहीं है.
टीएमसी ने सांसदों के निलंबन को ‘तानाशाही’ करार दिया, इसे विपक्ष को दबाने का प्रयास बताया
तृणमूल कांग्रेस ने मंगलवार को लोकसभा के 49 सदस्यों के निलंबन की निंदा की और इसे ”तानाशाही” रवैया और सदन में विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास करार दिया. पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल ने संसद में हालिया सुरक्षा चूक मामले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बयान की भी मांग की. संसद से 78 विपक्षी सदस्यों को निलंबित किए जाने के एक दिन बाद मंगलवार को कार्यवाही में बाधा डालने को लेकर लोकसभा के 49 सदस्यों को निलंबित कर दिया गया.
टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने सवाल किया, ”क्या संसद की सुरक्षा में चूक के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री से बयान की मांग करना अपराध है? अगर वह बयान नहीं देंगे, तो कौन देगा?” एक सोशल मीडिया पोस्ट में टीएमसी ने कहा कि विपक्ष को चुप कराने की कोशिशें निरर्थक साबित होंगी.
इसने कहा, ”विपक्ष को चुप करा दिया गया है, 140 से अधिक सांसदों को संसद से निलंबित कर दिया गया है. क्यों? केवल चर्चा, बहस और गृह मंत्री अमित शाह से एक बयान की मांग के लिए. भारत का लोकतंत्र खतरे में है.” भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने कहा कि टीएमसी को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबां में झांकना चाहिए. जिस तरह वह पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता को नियमित रूप से निलंबित कर रही है, उसे (टीएमसी) लोकतंत्र के बारे में बात करने का हक नहीं है.