नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने 2006 के सनसनीखेज निठारी हत्याकांड में सुरेंद्र कोली को बरी करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के लिए सोमवार को सहमति जताई. न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने उच्च न्यायालय के 16 अक्टूबर, 2023 के फैसले के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की अलग-अलग याचिकाओं पर कोली से जवाब मांगा.
शीर्ष अदालत ने मामले में कोली को बरी करने के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाले एक पीड़ित के पिता की याचिका पर सुनवाई के लिए मई में सहमति जताई थी. इस मामले में मोहिंदर सिंह पंढेर को सत्र अदालत ने बरी कर दिया था जबकि कोली को 28 सितंबर 2010 को मौत की सजा सुनाई गई थी. पीठ ने सोमवार को कहा कि सीबीआई की याचिकाएं पीड़ित के पिता की उक्त याचिका के साथ सुनवाई के लिए आएंगी.
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीबीआई की ओर से कहा कि कोली ‘सीरियल किलर’ है जिसने छोटी बच्चियों को फुसलाया और उनकी हत्या कर दी. घटना को ‘जघन्य’ करार देते हुए मेहता ने कहा कि मामले में बहशीपन के आरोप हैं. उच्च न्यायालय ने कोली और उसके मालिक पंढेर को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे मामले में दोष साबित करने में विफल रहा.
पंढेर और कोली पर बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने और उनकी हत्या करने के आरोप था. उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी लेकिन उच्च न्यायालय ने उन्हें बरी कर दिया था. पंढेर और कोली के खिलाफ 2007 में कुल 19 मामले दर्ज किए गए थे. राष्ट्रीय राजधानी से लगे नोएडा के निठारी में 29 दिसंबर, 2006 को एक घर के पीछे नाले से आठ बच्चों के कंकाल के अवशेष मिलने से सनसनी फैल गई थी.
घर के आसपास इलाके में नालों की और खुदाई तथा तलाशी में और कंकाल मिले. इनमें से अधिकतर कंकाल उन गरीब बच्चों और लड़कियों के थे जो इलाके से लापता थे. सीबीआई ने 10 दिन के अंदर मामले में जांच संभाली थी और उसकी तलाशी में और कंकाल बरामद हुए थे.