नेमप्लेट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- किसी को नाम लिखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता……

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Fri, 26 Jul 2024 02:42 PM
नेमप्लेट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- किसी को नाम लिखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता……
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नई दिल्ली: कावड़ यात्रा रूट पर दुकानों और भोजनालयों के लिए नेमप्लेट विवाद पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि हमें शिव भक्त कांवड़ियों के भोजन की पसंद का भी सम्मान करना चाहिए.’

जस्टिस हृषिकेश रॉय और एसवी एन भट्टी की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हमारा आदेश साफ है कि अगर कोई अपनी मर्जी से दुकान के बाहर अपना नाम लिखना चाहता है तो हमने उसे रोका नहीं है. हमारा आदेश था कि नाम लिखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता.’

कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के कांवड़ यात्रा रूट की दुकानों पर अनिवार्य रूप से नेमप्लेट लगाने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी जिसे शुक्रवार को भी जारी रखा गया. सर्वोच्च अदालत ने कहा कि मध्य प्रदेश और उत्तराखंड की ओर से काउंटर एफिडेविट दायर किया जाए. मामले में अब अगली सुनवाई सोमवार को होगी.

सुनवाई के दौरान सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया कि उन्हें बीती रात 10:30 बजे यूपी सरकार की तरफ से जवाब मिल गया था. उत्तराखंड ने जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा है. उत्तराखंड के वकील ने कहा कि ऐसा कानून है जो दुकान मालिकों को अपना नाम उजागर करने के लिए अनिवार्य करता है. यात्राएं वर्षों से होती आ रही हैं. ऐसे उपनियम हैं जिन्हें हम लागू कर रहे हैं.

उत्तराखंड ने कहा कि दुकानदारों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है. अंतरिम आदेश से काफी दिक्कतें हो रही हैं. ये उपनियम सिर्फ खाने तक ही सीमित नहीं हैं. सभी व्यवसायों के लिए नेमप्लेट अनिवार्य होनी चाहिए. जस्टिस रॉय ने कहा कि हमें दिखाएं कि आपने अपने राज्यों में कहां-कहां ऐसी जानकारी मांगी है.

उत्तराखंड ने कहा कि इस आदेश से कानून व्यवस्था बनाए रखने में दिक्कत आएगी. मान लीजिए कोई आम के ठेले पर नशीला पदार्थ लेकर आ जाए तो इसकी पहचान नहीं होगी. कम से कम कानून तो लागू करें. उत्तर प्रदेश की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि अगर कानून नाम प्रदर्शित करने की अनुमति देता है तो सुप्रीम कोर्ट का आदेश राज्य के कानून के विपरीत होगा.

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