बांग्लादेशियों की संलिप्तता वाले अंग प्रतिरोपण गिरोह का भंडाफोड़, चिकित्सक समेत सात लोग गिरफ्तार

नयी दिल्ली. बांग्लादेश और दिल्ली-एनसीआर में कथित तौर पर गुर्दा प्रतिरोपण गिरोह चलाने के मामले में दिल्ली की 50 वर्षीय एक महिला चिकित्सक सहित कम से कम सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी.
अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा एक गुप्त सूचना के आधार पर दो महीने से इस मामले की जांच कर रही थी. उन्होंने बताया कि ज्यादातर अंग दान करने और प्राप्त करने वाले बांग्लादेश के हैं जिन्हें सर्जरी के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत लाया गया.

अधिकारियों ने बताया कि महिला चिकित्सक की पहचान डी. विजया राजकुमारी के रूप में हुई है, जो अब दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में ‘प्रति मरीज शुल्क’ के आधार पर गुर्दा प्रतिरोपण सर्जन के रूप में काम कर रही है. वह कथित तौर पर 2021 से 2023 के बीच बांग्लादेश से आए करीब 15 लोगों की प्रतिरोपण सर्जरी में शामिल थीं. उन्होंने बताया कि डॉ. राजकुमारी ने कथित सर्जरी नोएडा के यथार्थ अस्पताल में की जहां पर वह परामर्शदाता के तौर पर अपनी सेवाएं देती हैं.

अधिकारियों ने बताया कि अन्य गिरफ्तार आरोपियों की पहचान डॉक्टर के सहायक विक्रम सिंह और तीन बांग्लादेशी नागरिक रसेल, मोहम्मद सुमन मियां और मोहम्मद रुकुन उर्फ ??राहुल सरकार उर्फ ??बिजय मंडल के रूप में की गई है. पुलिस ने बताया कि ये गिरफ्तारियां गत दो सप्ताह में की गई है. अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों के पास से 23 टिकट, गुर्दा प्रतिरोपण के मरीजों और दानकर्ताओं की जाली फाइल तथा जाली आधार कार्ड सहित आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई.

पुलिस उपायुक्त (अपराध) अमित गोयल ने बताया कि रसेल इस गिरोह का सरगना है जो 2019 में भारत आया था और उसने एक बांग्लादेशी मरीज को अपना एक गुर्दा दान किया था. उन्होंने बताया कि सर्जरी के बाद रसेल ने गिरोह चलाना शुरू कर दिया. वह अलग-अलग हितधारकों के बीच समन्वय करता था और बांग्लादेश के संभावित गुर्दा दानकर्ताओं और मरीजों से संपर्क साधता था.

अधिकारी ने बताया कि उसका एक सहयोगी इफ्ती दानकार्ताओं की तलाश करता था और वह इस समय बांग्लादेश में है. उन्होंने बताया कि प्रतिरोपण के बाद उन्हें आमतौर पर 20-25 प्रतिशत कमीशन मिलता था और एक मरीज को आम तौर पर प्रतिरोपण के लिए 25 से 30 लाख रुपये खर्च करने पड़ते थे.

गोयल ने बताया कि रसेल ने अपोलो अस्पताल के पास जसोला में एक मकान किराए पर लिया था, जहां से उसे, रुकुन, सुमन मिया और त्रिपुरा निवासी रतेश पाल को 16 जून को गिरफ्तार किया गया. पुलिस उपायुक्त ने बताया कि उनकी निशानदेही पर तीन गुर्दा दान का इंतजार कर रहे मरीजों और तीन दानकर्ताओं की पहचान की गई. एक अन्य अधिकारी ने बताया कि पूछताछ के दौरान चारों आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे बांग्लादेश के डायलिसिस केंद्रों पर जाकर वहां के गुर्दा मरीजों को अपना निशाना बनाते थे.

अधिकारी ने बताया कि वे बांग्लादेश से दानदाताओं की व्यवस्था करते थे. वे उनकी खराब वित्तीय पृष्ठभूमि का लाभ उठाते थे और उन्हें भारत में नौकरी दिलाने के बहाने उनका शोषण करते थे. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी भारत पहुंचने के बाद दानकर्ता के पासपोर्ट जब्त कर लेते थे. इसके बाद रसेल, सुमन मिया, रुकुन और रतेश पाल की मदद से मरीज और दानकर्ता के बीच संबंध दिखाने के लिए उनके जाली दस्तावेज तैयार करते थे क्योंकि भारतीय कानून के तहत केवल रिश्तेदार ही अंग दान कर सकते हैं.

अधिकारियों ने बताया कि डॉ. राजकुमारी का निजी सहायक विक्रम मरीजों की फाइल तैयार करने में मदद करता था और मरीज तथा दानकर्ता का हलफनामा तैयार करने में सहायक की भूमिका निभाता था. उन्होंने बताया कि विक्रम प्रति मरीज 20,000 रुपये लेता था.
रसेल ने मोहम्मद शरीक के नाम का भी खुलासा किया है जो डॉ. राजकुमारी से मरीजों का ‘अपॉइंटमेंट’ लेता था और दानदाकर्ताओं और मरीजों की पैथोलॉजिकल जांच करवाता था और प्रति मरीज 50,000 से 60,000 रुपये लेता था. पुलिस ने बताया कि विक्रम और शरीक को 23 जून को गिरफ्तार किया गया था.

अधिकारियों ने रसेल, विक्रम और शरीक के खुलासे के हवाले से दावा किया कि डॉ. राजकुमारी को आरोपियों द्वारा जाली कागजात के आधार पर किए जा रहे प्रत्येक अवैध कार्य के बारे में पूरी जानकारी थी. उन्होंने बताया कि डॉ.राजकुमारी को मामले में एक जुलाई को गिरफ्तार किया गया. अधिकारियों ने बताया कि उन लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है जिनका गिरोह ने प्रतिरोपण कराया था.

इस बीच, यथार्थ अस्पताल के प्रवक्ता ने कहा कि नोएडा स्थित उनके अस्पताल का डॉ. राजकुमारी से कोई सीधा संबंध नहीं है. उन्होंने बताया कि आरोपी किसी अन्य अस्पताल का हिस्सा हैं. इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल (आईएएच) ने भी प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने एक चिकित्सक को हिरासत में लिया है और लेकिन वह अस्पताल की कर्मचारी नहीं है बल्कि प्रति मरीज शुल्क के आधार पर अपनी सेवा देती थीं. आईएएच ने जांच में सहयोग करने की भी बात की है.

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