पटनायक ने एनसीईआरटी की किताब से पाइका विद्रोह को हटाने को बहुत बड़ा अपमान बताया

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 22 Jul 2025 09:11 PM
पटनायक ने एनसीईआरटी की किताब से पाइका विद्रोह को हटाने को बहुत बड़ा अपमान बताया
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भुवनेश्वर. ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मंगलवार को दुख व्यक्त करते हुए कहा कि एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक से पाइका विद्रोह को हटाना राज्य के नायकों का बहुत बड़ा अपमान है. विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजद) के प्रमुख पटनायक ने कहा कि पाइका विद्रोह ओडिशा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण था, क्योंकि उन्होंने 1817 में दमनकारी अंग्रेजों के खिलाफ असाधारण साहस के साथ लड़ाई लड़ी थी.

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “यह जानकर बहुत चिंता हुई कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने ओडिशा के पाइका विद्रोह को अपनी पाठ्य पुस्तकों से हटा दिया है.” विपक्ष के नेता ने कहा, “मैंने भारत सरकार से कई बार आग्रह किया था कि इसे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम घोषित किया जाए.”

उन्होंने कहा, “सिपाही विद्रोह (1857 की क्रांति) से 40 साल पहले जो ‘पाइका विद्रोह’ हुआ था, उसे एनसीईआरटी की किताबों में शामिल न करना विद्रोह के 200 साल बाद हमारे वीर पाइका योद्धाओं का बहुत बड़ा अपमान है. यह विद्रोह ब्रिटिश शासन के खिलाफ लोगों के आंदोलन की एक शुरुआत थी.ह्व पटनायक ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि “पाइका विद्रोह और ओडिशा के साथ न्याय हो.”

एनसीईआरटी ने एक बयान में कहा कि पाठ्यपुस्तक के दूसरे खंड के सितंबर-अक्टूबर 2025 में जारी होने की उम्मीद है और इसमें क्षेत्रीय प्रतिरोध आंदोलनों/सशस्त्र विद्रोहों जैसे ओडिशा के पाइका विद्रोह/खुर्दा विद्रोह, पंजाब में कूका आंदोलन/सिखों के विद्रोह आदि से संबंधित विषयों को इस खंड में शामिल किया जाएगा.

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