शबरिमला सोना चोरी मामले में तंत्री की जमानत याचिका पर सतर्कता अदालत की टिप्पणियों पर रोक

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Tue, 17 Mar 2026 04:35 PM
शबरिमला सोना चोरी मामले में तंत्री की जमानत याचिका पर सतर्कता अदालत की टिप्पणियों पर रोक
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कोच्चि: केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार को शबरिमला सोना चोरी मामले में तंत्री (मुख्य पुजारी) कंदारारू राजीवरु के खिलाफ आरोपों और एसआईटी जांच को लेकर सतर्कता अदालत द्वारा की गई टिप्पणियों पर रोक लगा दी। न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने यह आदेश विशेष जांच दल (एसआईटी) की अपील पर दिया, जिसमें तंत्री को दी गई जमानत निरस्त करने और राजीवरु को राहत देते समय सतर्कता अदालत की टिप्पणियों को रद्द करने की मांग की गई थी।

उच्च न्यायालय ने एसआईटी की अपील पर तंत्री का पक्ष जानने के लिए उन्हें नोटिस भी जारी किया है। इस आदेश की पुष्टि अभियोजन महानिदेशक टी ए शाजी ने की। एसआईटी ने अतिरिक्त लोक अभियोजक पी नारायणन के माध्यम से दायर अपनी अपील में दावा किया है कि राजीवरु को दी गई राहत से “न्याय प्रक्रिया का घोर उल्लंघन” हुआ है।

कोल्लम स्थित जांच आयुक्त और विशेष न्यायाधीश (सतर्कता) की अदालत ने 18 फरवरी को तंत्री को यह कहकर जमानत दे दी थी कि मंदिर की कलाकृतियों से कथित रूप से सोना गायब होने के मामलों में तंत्री के खिलाफ “एक भी सबूत” नहीं है। एसआईटी मंदिर के द्वारपालक (संरक्षक देवता) की मूर्तियों और श्रीकोविल (गर्भगृह) के दरवाजों से कथित रूप से सोना चोरी होने की जांच कर रही है।

राजीवरु द्वारपालक मामले में 16वें आरोपी और श्रीकोविल मामले में 13वें आरोपी हैं और सतर्कता अदालत ने उन्हें दोनों मामलों में जमानत दे दी थी।
एसआईटी ने द्वारपालक मामले में तंत्री को दी गई जमानत को चुनौती दी है। एसआईटी ने दावा किया है कि विशेष अदालत द्वारा की गई “अनुचित और अनावश्यक टिप्पणियां” जांच में बाधा डालेंगी।

एसआईटी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि तंत्री द्वारा दी गई राय ही त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) द्वारा कलाकृतियों को पोट्टी को सौंपने के निर्णय का आधार बनी। सतर्कता अदालत ने पाया कि आपराधिक साजिश के संबंध में एसआईटी का मामला इस तथ्य के कारण विफल हो जाता है कि याचिकाकर्ता ने 20 जुलाई, 2019 के महत्वपूर्ण महजर पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।

एसआईटी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि राजीवुरु ने 20 जुलाई, 2019 को तैयार किए गए प्रथम महजर (निरीक्षण रिपोर्ट) पर हस्ताक्षर करने से जानबूझकर परहेज किया, जबकि वे सन्निधानम में उपस्थित थे, “इस प्रकार उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से पकड़े जाने से बचने का प्रयास किया, जबकि साथ ही पवित्र कलाकृतियों को मंदिर परिसर से बाहर अवैध रूप से सौंपने और उनके परिवहन के लिए सुविधा प्रदान की।”

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