‘क्या हमें फर्जी मतदाताओं को मतदान करने देना चाहिए’, बिहार मुद्दे पर चुनाव आयोग ने पूछे गंभीर सवाल

Author: navabharat digital
UPDATED: Thu, 24 Jul 2025 12:32 PM
‘क्या हमें फर्जी मतदाताओं को मतदान करने देना चाहिए’, बिहार मुद्दे पर चुनाव आयोग ने पूछे गंभीर सवाल
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पटना: बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण की मांग को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। इसे लेकर बिहार विधानसभा और संसद में हंगामा जारी है। अब चुनाव आयोग ने बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण मामले पर बयान जारी किया है और सवाल किया है कि क्या चुनाव आयोग को फर्जी मतदाताओं को भी मतदाता सूची में शामिल कर लेना चाहिए?

क्या फर्जी मतदाताओं को मतदान करने देना चाहिए’

चुनाव आयोग ने बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण मामले पर हो रही आलोचना को लेकर कहा कि ‘भारत का संविधान, भारतीय लोकतंत्र की मां है। तो क्या विरोध से डरकर चुनाव आयोग को कुछ लोगों के दबाव में भ्रमित हो जाना चाहिए और उन लोगों का रास्ता साफ कर देना चाहिए, जो मृत मतदाताओं के नाम पर फर्जी मतदान करते हैं? जो मतदाता स्थायी तौर पर पलायन कर गए हैं, जो मतदाता फर्जी या विदेशी हैं, क्या उन्हें संविधान के खिलाफ जाकर, पहले बिहार में और फिर पूरे देश में मतदान करने दें?’

चुनाव आयोग ने पूछा कि ‘क्या हमें निष्पक्ष प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची को तैयार नहीं करना चाहिए? मतदाता सूची ही निष्पक्ष चुनाव और मजबूत लोकतंत्र का आधार होती है। इन सभी सवालों पर हम सभी भारतीयों को गंभीरता से और राजनीतिक वैचारिकता से परे जाकर विचार करना चाहिए। इन सभी मुद्दों पर अब गंभीरता से विचार करने का सही समय आ गया है।’

लाखों मतदाताओं के कट सकते हैं नाम
बिहार में चुनाव आयोद द्वारा मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जा रहा है। जिसका विपक्ष द्वारा विरोध किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि पुनरीक्षण में बिहार में कम से कम 56 लाख मतदाताओं के नाम कट सकते हैं। इसमें 20 लाख मतदाताओं का निधन हो चुका है। 28 लाख ऐसे मतदाताओं की पहचान की गई जो अपने पंजीकृत पते से स्थाई रूप से पलायन कर गए हैं। वहीं, एक लाख मतदाता ऐसे हैं जिनका कुछ पता नहीं है। 7 लाख मतदाता एक से अधिक स्थान पर पंजीकृत पाए गए हैं।

चुनाव आयोग के इस विशेष अभियान से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि करीब 15 लाख मतदाता अभी भी ऐसे हैं जिन्होंने अपने गणना प्रपत्र वापस नहीं किए हैं। इन्हें लेकर चुनाव आयोग राजनीतिक दलों के साथ गणना प्रपत्र एकत्र करने की कवायद कर रहा है। अब तक 7.7 करोड़ से ज्यादा मतदाता फॉर्म (कुल मतदाताओं का 90.89 फीसदी) मिल चुके हैं और इनकी डिजिटलीकरण भी कर दिया गया है।

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