झीरम घाटी कांड : न्यायिक फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगा आदिवासी समाज, कानूनी लड़ाई के लिए गांव-गांव से जुटाया जायेगा चंदा

Author: Navabharat News Group
UPDATED: Sat, 19 Sep 2026 11:49 PM
झीरम घाटी कांड : न्यायिक फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगा आदिवासी समाज, कानूनी लड़ाई के लिए गांव-गांव से जुटाया जायेगा चंदा

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झीरम घाटी कांड पर हाल ही में आए एक न्यायिक फैसले के खिलाफ आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। माओवादी हमले से जुड़े मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद सर्व आदिवासी समाज ने कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

विगत शुक्रवार को परपा स्थित कोया समाज भवन में बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों और सजा पाए आरोपियों के परिजनों की बैठक हुई, जिसमें मामले की जांच, आरोपियों की भूमिका और फैसले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर चर्चा की गई।
समाज के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने बताया कि आरोपियों के परिजनों ने उनके निर्दोष होने का दावा किया है।

उनका कहना है कि स्थानीय ग्रामीणों को मामले में गलत तरीके से फंसाया गया, जबकि घटना के पीछे कथित तौर पर बड़ी साजिश और बाहरी माओवादी नेटवर्क की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। बैठक में यह तय किया गया कि मजबूत कानूनी पैरवी के लिए जरूरत पड़ने पर मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी ले जाया जाएगा। कानूनी खर्च जुटाने के लिए समाज गांव-गांव से आर्थिक सहयोग लेने की तैयारी में है।

सूत्रों के मुताबिक पारंपरिक मुखियाओं के माध्यम से प्रत्येक परिवार से 20 रुपये जुटाए जाएंगे। समाज के प्रतिनिधि सोमवार को हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से मुलाकात कर आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। वहीं, कांग्रेस ने भी झीरम मामले को लेकर रायपुर स्थित राजीव भवन में बैठक बुलाई है, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ शहीद परिवारों के सदस्य, घायल और विधि विशेषज्ञ शामिल होकर मामले के कानूनी व राजनीतिक पहलुओं पर विचार करेंगे।

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