प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आज बड़ी कार्यवाही करते हुए 15 करोड़ रुपए की ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग करने वाले आरोपी केके श्रीवास्तव की 3.25 करोड़ की चल-अचल संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क कर ली है। ईडी ने विशेष न्यायालय (पीएमएलए), रायपुर में अभियोजन परिवाद दाखिल किया है.
श्रीवास्तव पर ठगी, जालसाजी, आपराधिक धमकी और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोप हैं जैसे कांग्रेस सरकार के दौरान 2023 में केके श्रीवास्तव ने रावत एसोसिएट्स के संचालक को कथित तौर पर यह भरोसा दिलाया कि करीब 500 करोड़ रुपए का रायपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट सब-कॉन्ट्रैक्ट के लिए उपलब्ध है. इसके लिए 15 करोड़ रुपए की परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जमा करने की बात कही गई. इस झांसे में आकर रावत एसोसिएट्स की ओर से 15 करोड़ रुपए पांच बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए.
ईडी के मुताबिक, 15 करोड़ रुपए में से 3.40 करोड़ रुपए संदिग्ध और विभिन्न स्तरों से घुमाए गए धन से पीड़ित को वापस किए गए और इसे सामान्य भुगतान के रूप में दिखाया गया. वहीं 11.60 करोड़ रुपए की राशि अब तक वापस नहीं की गई. जानते चलें कि कृष्ण कुमार श्रीवास्तव को ईडी ने 30 जुलाई 2026 को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद उसे विशेष न्यायालय (पीएमएलए), रायपुर के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे ईडी की हिरासत में भेजा गया था. जांच पूरी करने के बाद ईडी ने 22 सितंबर को 3.25 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया.
ईडी के अनुसार, जिन लोगों के नाम पर खाते खोले गए थे, उनकी जानकारी के बिना कथित तौर पर फर्जी तरीके से खाते खोले गए थे. साथ ही संबंधित संस्थाएं अपने पंजीकृत पते पर भी मौजूद नहीं मिलीं. इसी तरह ईडी की जांच में सामने आया कि ठगी से हासिल रकम को शेल और कंड्यूट संस्थाओं के नेटवर्क के माध्यम से अलग-अलग स्तरों पर घुमाया गया. इसके बाद फर्जी व्यावसायिक विवरण, जैसे माल ढुलाई शुल्क और कंटेनर लीजिंग के नाम पर रकम विदेश भेजे जाने की बात सामने आई. जांच एजेंसी के अनुसार रकम के लाभार्थी दुबई, हांगकांग, चीन और सिंगापुर में स्थित थे.