RBI का 2024-25 में वृद्धि दर 7% रहने का अनुमान, बही-खाता पाकिस्तान के GDP का ढाई गुना

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 30 May 2024 08:02 PM
RBI का 2024-25 में वृद्धि दर 7% रहने का अनुमान, बही-खाता पाकिस्तान के GDP का ढाई गुना
ऑडियो सुनें

मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के सात प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया है. यह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि की सबसे तेज रफ्तार होगी. केंद्रीय बैंक ने 2023-24 की वार्षिक रिपोर्ट में कुल मुद्रास्फीति में कमी आने की उम्मीद जताई है. हालांकि, खाद्य मुद्रास्फीति के बढ़ने का संकेत देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि यह आपूर्ति पक्ष के झटकों के कारण संवेदनशील बनी रहेगी.

भारतीय रिजर्व बैंक के बही-खाते का आकार मार्च, 2024 तक 11.08 प्रतिशत बढ़कर 70.47 लाख करोड़ रुपये हो गया है. यह पाकिस्तान के कुल सकल घरेलू उत्पाद (करीब 340 अरब अमेरिकी डॉलर) का करीब 2.5 गुना है. रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने 2023-24 (अप्रैल 2023 से मार्च 2024 वित्त वर्ष) में मजबूत गति से विस्तार किया, जिससे वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर बढ़कर 7.6 प्रतिशत हो गई है. यह 2022-23 में सात प्रतिशत थी. यह लगातार तीसरे वर्ष सात प्रतिशत या उससे अधिक रही. वित्त वर्ष 2023-24 में अर्थव्यवस्था ने लगातार चुनौतियों के बावजूद जुझारुपन दिखाया.

जीडीपी वृद्धि को बैंकों तथा कॉरपोरेट जगत की स्वस्थ बैलेंस शीट, पूंजीगत व्यय पर सरकार के ध्यान देने और विवेकपूर्ण मौद्रिक, नियामकीय तथा राजकोषीय नीतियों से समर्थन मिला है. हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था प्रतिकूल वैश्विक समष्टि आर्थिक तथा वित्तीय परिवेश से जूझ रही है. वित्त वर्ष 2023-24 के खरीफ और रबी दोनों मौसम में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ने सभी फसलों के लिए उत्पादन लागत पर न्यूनतम 50 प्रतिशत लाभ सुनिश्चित किया. रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था, व्यापक आर्थिक तथा वित्तीय स्थिरता के परिदृश्य में अगले दशक में वृद्धि की गति को तेज करने की अच्छी स्थिति में है.

इसमें कहा गया, ” कुल (हेडलाइन) मुद्रास्फीति के निर्धारित स्तर की ओर बढ़ने से खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोग मांग में तेजी आएगी. बा’ क्षेत्र की मजबूती और विदेशी मुद्रा भंडार घरेलू आर्थिक गतिविधियों को वैश्विक प्रभावों से बचाएंगे.” हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भू-राजनीतिक तनाव, भू-आर्थिक विखंडन, वैश्विक वित्तीय बाजार में अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय जिंस कीमतों में उतार-चढ़ाव और अनिश्चित मौसमी घटनाक्रम वृद्धि के कम होने तथा मुद्रास्फीति के बढ़ने का जोखिम उत्पन्न करते हैं.

आरबीआई ने कहा, ” 2024-25 के लिए वास्तविक (सकल घरेलू उत्पाद) जीडीपी वृद्धि सात प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसमें जोखिम दोनों तरफ बराबर है.” आरबीआई ने कहा कि 2022-23 में उसके बही-खाते तक का आकार 63.45 लाख करोड़ रुपये था. यह वित्त वर्ष 2023-24 में 7,02,946.97 करोड़ रुपये बढ़ा है. बही-खाते मार्च 2024 के अंत तक भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 24.1 प्रतिशत हो गए जो एक साल पहले 23.5 प्रतिशत थे.

वित्त वर्ष 2024 में केंद्रीय बैंक की आय में 17.04 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि व्यय में 56.3 प्रतिशत की कमी आई. विदेशी प्रतिभूतियों से ब्याज आय में उछाल के साथ ही आरबीआई का अधिशेष 141.23 प्रतिशत बढ़कर 2.11 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिसे उसने पिछले सप्ताह केंद्र सरकार को हस्तांतरित कर दिया. इसके अलावा आरबीआई ने वित्त वर्ष 2023-24 में आकस्मिकता निधि (सीएफ) के लिए 42,820 करोड़ रुपये प्रदान किए.

आरबीआई को विदेशी मुद्रा लेनदेन से 83,616 करोड़ रुपये का लाभ हुआ. विदेशी प्रतिभूतियों से ब्याज आय बढ़कर 65,328 करोड़ रुपये हो गई, जिससे उसे अपनी आकस्मिकता निधि का आकार बढ़ाने में मदद मिली. वार्षिक रिपोर्ट आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की एक वैधानिक रिपोर्ट है. रिपोर्ट में अप्रैल 2023 से मार्च 2024 की अवधि के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के कामकाज और कार्यों को शामिल किया गया है.

वित्तीय क्षेत्र पर आरबीआई ने कहा कि बैंकों के पास दावा न किए गए जमा में मार्च 2024 के अंत में सालाना आधार पर 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 78,213 करोड़ रुपये हो गई. जमाकर्ता शिक्षा व जागरूकता कोष में राशि 62,225 करोड़ रुपये थी. सहकारी बैंकों सहित सभी बैंक, खाताधारकों की 10 या अधिक वर्षों से उनके खातों में पड़ी हुई दावा न की गई जमाराशियों को भारतीय रिजर्व बैंक के जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता (डीईए) कोष में स्थानांतरित करते हैं. बैंकों से जुड़े धोखाधड़ी के मामले बीते वित्त वर्ष (2023-24) में बढ़कर 36,075 रहे. हालांकि, इस दौरान धोखाधड़ी वाली राशि 46.7 प्रतिशत घटकर 13,930 करोड़ रुपये हो गई.

रिपोर्ट के अनुसार, धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने व भुगतान अनुभव को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से नए अधिनियम ‘डिजिटल व्यक्तिगत सूचना संरक्षण कानून, 2023’ के अनुपालन के तहत वास्तविक रूप से कोष अंतरण से पहले भुगतान प्राप्त करने वाले के नाम की वास्तविक समय पर सत्यापन की संभावना टटोली जाएगी. पिछले तीन साल में धोखाधड़ी के मामलों के आकलन से संकेत मिलता है कि जहां निजी क्षेत्र के बैंकों ने सबसे ज्यादा धोखाधड़ी के मामलों की सूचना दी, वहीं धोखाधड़ी में शामिल राशि के मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का योगदान पहले की तरह सबसे ज्यादा रहा.

इसमें कहा गया, ”संख्या के संदर्भ में धोखाधड़ी मुख्य रूप से कार्ड/ इंटरनेट जैसे डिजिटल भुगतान श्रेणी में हुई. वहीं मूल्य के संदर्भ में, धोखाधड़ी मुख्य रूप से कर्ज (अग्रिम श्रेणी) के मामले में रही.” छोटी राशि के कार्ड/इंटरनेट धोखाधड़ी के मामले में निजी क्षेत्र के बैंकों में सबसे ज्यादा मामले सामने आए. वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में धोखाधड़ी मुख्य रूप से कर्ज श्रेणी में रही. इसके अलावा, 2022-23 और 2023-24 के दौरान रिपोर्ट की गई धोखाधड़ी की घटनाओं का विश्लेषण करने से पता चलता है कि धोखाधड़ी की घटना की तारीख और उसका पता लगाने के बीच एक महत्वपूर्ण समय-अंतराल दिखता है.

रिपोर्ट में कहा गया, ”मूल्य के संदर्भ में पिछले वित्त वर्ष में हुई धोखाधड़ी में शामिल राशि 2022-23 में रिपोर्ट की गई धोखाधड़ी का 94 प्रतिशत है.” आरबीआई ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय अर्थव्यवस्था को एआई/एमएल (कृत्रिम मेधा/मशीन र्लिनंग) प्रौद्योगिकियों को तेजी से अपनाने के साथ-साथ बार-बार आने वाले जलवायु झटकों से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करना होगा.

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By Yogesh Kumar Sahu