अभी अर्नब चक्रवात को आए एक हफ्ते भी नहीं हुए कि बंगाल की खाड़ी से एक और चक्रवाती तूफ़ान 120 किमी प्रति घण्टे की रफतार से निकल कर उत्तर पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है।
इस चक्रवाती तूफान को भारत ने नाम दिया है ‘MURASU’. मुरासू चक्रवाती तूफ़ान की वजह से हवाओं की स्पीड 120 किमी प्रति घंटे हो गई है। चेन्नई में 3 नवंबर को यानी मंगलवार को सभी स्कूलों को बंद करने की घोषणा की गई है. MURASU अगले 12 घंटों में खतरनाक रूप ले सकता है. तमिलनाडु के कई इलाकों और आंध्र प्रदेश के बार्डर एरियाज में भारी बारिश शुरू हो गई है. 110 से 125 किमी प्रति घंटे की स्पीड से तेज हवा चल सकती है. आईएमडी ने लोगों से सतर्क रहने को कहा है.भारत ने WMO/ESCAP की नॉर्थ इंडियन ओशन साइक्लोन लिस्ट में “मुरासु” नाम दिया है। यह एक तमिल शब्द है, जिसका मतलब एक पारंपरिक ढोल यानी ड्रम है। पुराने ज़माने में इस ढोल से खबरें सुनाई जाती थीं और आपदाओं की चेतावनी दी जाती थी। यह लिस्ट 2020 में फाइनल हुई थी।
तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में इस समय भारी बारिश और वज्रपात हो रहा है। सरकार ने तेलंगाना के दो जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है।
चक्रवात मुरासु का आंध्र प्रदेश पर आज रात ट्रकराने का खतरा है। एनडीआरएफ तैनात कर दी गई है। 10 उड़ानें रद्द हो गई है और चेन्नई में भारी बारिश शुरू हो गई है। स्कूल बंद कर दिए गए हैं। इंडिगो ने विजयवाड़ा से जाने वाली आठ उड़ानें रदद कर दी हैं।
मौसम विभाग ने तटीय इलाकों को तूफान की चेतावानी जारी की है इस समय हवा की स्पीड 100से 120km प्रति घंटा बताई है। ये तूफान 3 तारीख को तट से टकराएगा जिसके चलते वहां तेज बारिश भी हो सकती है। मौसम विभाग की जानकारी को ध्यान में रखते हुए लोगों को अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए.
कैसे बनते हैं चक्रवात
गंगा, ब्रह्मपुत्र, महानदी, गोदावरी और कृष्णा जैसी बड़ी नदियां बंगाल की खाड़ी में भारी मात्रा में मीठा पानी पहुंचाती हैं। इसके अलावा यहां बारिश भी काफी होती है।
इससे समुद्र की ऊपरी सतह का पानी अपेक्षाकृत कम खारा हो जाता है। कम खारा पानी हल्का होने के कारण ऊपर बना रहता है और नीचे के ज्यादा खारे पानी के साथ आसानी से नहीं मिलता। इस स्थिति को समुद्र में पानी का स्तरीकरण कहते हैं।
जब तेज तूफान समुद्र के ऊपर से गुजरता है तो उसकी हवाएं समुद्र के पानी को हिलाती हैं। आमतौर पर इससे नीचे का ठंडा पानी ऊपर आ सकता है और समुद्र की सतह ठंडी होने लगती है। लेकिन बंगाल की खाड़ी में पानी की अलग-अलग परतों के कारण यह मिश्रण सीमित रहता है। नतीजा यह होता है कि समुद्र की सतह अपेक्षाकृत गर्म बनी रह सकती है और चक्रवात को ऊर्जा मिलती रहती है।