जमा वृद्धि के कर्ज से पीछे रहने से हो सकती है संरचनात्मक नकदी की समस्या: दास

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 19 Jul 2024 08:23 PM
जमा वृद्धि के कर्ज से पीछे रहने से हो सकती है संरचनात्मक नकदी की समस्या: दास
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मुंबई. जमा वृद्धि अगर कर्ज बढ़ने के मुकाबले पीछे है, तो संरचनात्मक नकदी संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने शुक्रवार को बैंकों को आगाह किया. दास ने असुरक्षित ऋण के मोर्चे पर और भी समस्याओं की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा कि बैंकों के पास पर्याप्त बड़े पोर्टफोलियो होने के बावजूद, ऐसे जोखिम भरे ऋण के लिए उच्च सीमा है. उन्होंने बैंकों से सतर्क रहने को कहा.

दास ने बैंकों से ऋण तथा जमा वृद्धि के बीच उचित संतुलन बनाए रखने का आग्रह करते हुए कहा कि घरेलू बचत का एक बड़ा हिस्सा जो पहले जमा के रूप में बैंकिंग प्रणाली में आता था, अब म्यूचुअल फंड जैसे अन्य साधनों में जा रहा है. उन्होंने अखबार फाइनेंशियल एक्सप्रेस के एक कार्यक्रम में कहा, ”ऋण वृद्धि को जमा वृद्धि से बहुत आगे नहीं बढ़ना चाहिए. खासकर तब, जब बैंकों को सीआरआर, एसएलआर, एलसीआर बनाए रखने की आवश्यकता होती है.” दास ने कहा कि पिछले कुछ समय से जमा राशि जुटाने की प्रक्रिया ऋण वृद्धि से पिछड़ रही है. इससे प्रणाली में संरचनात्मक नकदी संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.

उन्होंने कहा कि बैंकों और एनबीएफसी तथा अन्य ऋणदाताओं को संरचनात्मक परिवर्तनों की पहचान करनी चाहिए और उनके अनुसार अपनी रणनीति तैयार करनी चाहिए. डिजिटल धोखाधड़ी के बारे में उन्होंने कहा कि आरबीआई फर्जी खातों की जांच करने के लिए बैंकों और जांच एजेंसियों के साथ काम कर रहा है.

आर्थिक वृद्धि मजबूत, मुद्रास्फीति को काबू में लाने पर ध्यान: गवर्नर दास

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने शुक्रवार को कहा कि मौजूदा माहौल में जब आर्थिक वृद्धि दर अच्छी है, मौद्रिक नीति को स्पष्ट रूप से मुद्रास्फीति पर ध्यान देना चाहिए. तटस्थ दरों को लेकर बहस के बीच, दास ने कहा कि सैद्धांतिक और अमूर्त अवधारणाएं किसी व्यक्ति के निर्णय पर आधारित होती हैं और ये वास्तविक दुनिया में नीति निर्धारित नहीं कर सकती हैं.

गौरतलब है कि आरबीआई लगातार नीतिगत दर पर यथास्थिति बनाए हुए है और दर पर फैसला करने वाली समिति के कुछ सदस्यों के बीच असहमति बढ. रही है. ये सदस्य आर्थिक वृद्धि को बढ.ावा देने के लिए नीतिगत दर में कटौती के पक्ष में हैं. अधिक ब्याज दर के कारण वृद्धि पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताने वालों को जवाब देते हुए दास ने कहा कि मौजूदा नीतिगत दर के बावजूद वृद्धि मजबूत रही है.

उन्होंने कहा कि आरबीआई को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए उसका 7.2 प्रतिशत वास्तविक जीडीपी वृद्धि का लक्ष्य हासिल हो जाएगा. उन्होंने कहा कि यह गति दूसरी तिमाही में भी जारी रहेगी. आरबीआई गवर्नर ने कहा कि पिछले तीन साल में भारत की औसत वृद्धि 8.3 प्रतिशत रही है. दास ने यहां फाइनेंशियल एक्सप्रेस के एक कार्यक्रम में कहा, ”वृद्धि स्थिर बनी हुई है. अब हमें मुद्रास्फीति पर स्पष्ट रूप से ध्यान केंद्रित करना होगा.” उन्होंने कहा कि आरबीआई विशेष रूप से खाद्य मुद्रास्फीति के मोर्चे पर ध्यान दे रहा है और थोक मूल्य मुद्रास्फीति (डब्ल्यूपीआई) पर भी नजर है.

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