सरकार जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगी : प्रधानमंत्री मोदी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 05 Aug 2024 08:56 PM
सरकार जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगी : प्रधानमंत्री मोदी
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के लोगों को विश्वास दिलाया कि केंद्र सरकार उनके लिए काम करती रहेगी और आने वाले समय में उनकी आकांक्षाओं को पूरा करेगी. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि देश की संसद द्वारा पांच साल पहले आज ही के दिन संविधान के अनुच्छेद 370 और 35 (ए) को निरस्त कर दिया गया था जो हमारे देश के इतिहास में एक ‘ऐतिहासिक क्षण’ था.

उन्होंने कहा, ”यह जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख में प्रगति और समृद्धि के एक नए युग की शुरुआत थी. इसका मतलब था कि भारत के संविधान को इन स्थानों पर, संविधान बनाने वाले महान पुरुषों और महिलाओं की दृष्टि के अनुरूप अक्षरश: लागू किया गया.”  धानमंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के साथ ही उन महिलाओं, युवाओं, पिछड़ों, आदिवासियों और हाशिए के समुदायों को सुरक्षा, गरिमा और अवसर मिला जो विकास के लाभ से वंचित थे.

उन्होंने कहा कि साथ ही इसने यह सुनिश्चित किया कि जम्मू एवं कश्मीर को भ्रष्टाचार से दूर किया जाए जिसने दशकों से इस पूर्ववर्ती प्रदेश को त्रस्त कर रखा था. उन्होंने कहा, ”मैं जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि हमारी सरकार उनके लिए काम करती रहेगी और आने वाले समय में उनकी आकांक्षाओं को पूरा करेगी.”

अनुच्छेद 370 पर फैसला जनता पर थोपने के बजाय उनकी सहमति से लेना चाहते थे : प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 निरस्त करने के उनकी सरकार के फैसले के बारे में कहा कि ”मेरे मन में यह बात बहुत स्पष्ट थी कि इस फैसले के क्रियान्वयन के लिए जम्मू कश्मीर की जनता को विश्वास में लेना नितांत आवश्यक है.” प्रधानमंत्री मोदी ने ”370 : अनडूइंग द अनजस्ट, ए न्यू फ्यूचर फॉर जम्मू कश्मीर” नामक नयी किताब की प्रस्तावना में ये टिप्पणियां की हैं.

उन्होंने पुस्तक में लिखा, ”हम चाहते थे कि जब भी यह निर्णय लिया जाए तो यह लोगों पर थोपने के बजाय उनकी सहमति से होना चाहिए.” यह किताब गैर-लाभकारी संगठन ‘ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन’ ने लिखी है और इसे पेंगुइन इंटरप्राइज ने प्रकाशित किया है.
किताब में विस्तार से उन जानकारियों का उल्लेख किया गया है कि मोदी ने अपने लिए जो लक्ष्य तय किए थे, उन्हें कैसे हासिल किया.
प्रकाशकों ने बताया कि इस पुस्तक का विमोचन अगस्त में ही किया जाना है. उन्होंने कहा कि यह किताब ”निस्संदेह भारत के इतिहास की सबसे बड़ी संवैधानिक उपलब्धि के साथ साथ यह भी बताती है कि कैसे प्रधानमंत्री मोदी ने असंभव प्रतीत होने वाला यह काम किया.”

पेंगुइन ने सोमवार को अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के पांच साल पूरे होने पर एक बयान में कहा कि यह पुस्तक ”स्वतंत्रता के समय की गयी कई भूलों पर प्रकाश डालती है, जिसकी परिणति अनुच्छेद 370 के अन्यायपूर्ण क्रियान्वयन के रूप में हुई. यह 1949 में लागू किए जाने के बाद से ही अनुच्छेद 370 के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करती है.” प्रकाशकों ने दावा किया है कि यह ”मोदी सरकार पर अपनी तरह की पहली किताब है जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित शीर्ष निर्णय निर्माताओं के साथ बातचीत के माध्यम से असल में निर्णय लेने की प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण किया गया है.”

इस पुस्तक की प्रशंसा करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, ”एक ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय का अत्यंत पठनीय विवरण, जिसने जम्मू-कश्मीर के विकास और सुरक्षा परिदृश्य को बदलते हुए राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा दिया है. यह पुस्तक इस पर प्रकाश डालती है कि कैसे पहले के युग के राजनीतिक समीकरणों और व्यक्तिगत रुझानों का राष्ट्रीय भावना ने अंतत: प्रतिकार किया.”

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