ओलंपिक: देश के लिये और श्रीजेश के लिये भारतीय हॉकी टीम ने जीता कांस्य पदक

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 08 Aug 2024 09:27 PM
ओलंपिक: देश के लिये और श्रीजेश के लिये भारतीय हॉकी टीम ने जीता कांस्य पदक
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पेरिस/नयी दिल्ली. तोक्यो की कहानी को पेरिस ओलंपिक में दोहराते हुए भारतीय हॉकी टीम ने कप्तान हरमनप्रीत सिंह के दो गोल की मदद से स्पेन को 2-1 से हराकर देश के लिये और अपने सुनहरे कैरियर पर विराम लगाने वाले पी आर श्रीजेश के लिये कांस्य पदक जीता .
जीत के बाद श्रीजेश को कंधे पर बिठाकर मैदान का चक्कर लगाने वाले कप्तान हरमनप्रीत सिंह के साथ टीवी के सामने नजरें गड़ाये बैठे करोड़ों भारतीयों की भी आंखें नम हो गई . ओलंपिक पदक के साथ विदा लेने वाले श्रीजेश जीत के बाद गोलपोस्ट के ऊपर जाकर बैठे तो अपने जज्बात पर काबू नहीं रख सके .

जर्मनी के हाथों सेमीफाइनल में मिली हार का गम भुलाकर डेढ दिन बाद भारतीय टीम फिर युवेस डु मनोइर स्टेडियम पर उतरी तो हर खिलाड़ी का एक ही लक्ष्य था कि खाली हाथ नहीं लौटना है . एक गोल से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए भारत ने दूसरे और तीसरे क्वार्टर में गोल करके न सिर्फ जीत दर्ज की बल्कि पेरिस ओलंपिक में कल पहलवान विनेश फोगाट को फाइनल से पहले अयोग्य करार दिये जाने से देश भर में छाई मायूसी को दूर करने का प्रयास भी किया .

इस जीत के साथ ही भारत के लिये 336 मैच खेलने वाले महान गोलकीपर श्रीजेश ने भी अंतरराष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कह दिया . भारतीय टीम के लिये हरमनप्रीत सिंह ने (30वें, 33वें मिनट) जबकि स्पेन के लिये मार्क मिरालेस (18वां मिनट) ने गोल दागे .
आठ बार की चैम्पियन भारतीय पुरूष हॉकी टीम का यह 13वां ओलंपिक पदक है और पचास साल बाद लगातार दो ओलंपिक में पदक जीते हैं . इससे पहले 1968 में मैक्सिको और 1972 में म्युनिख ओलंपिक में भारत ने कांस्य जीता था .

सेमीफाइनल में नीदरलैंड से चार गोल से एकतरफा पराजय का सामना करने वाली स्पेनिश टीम ने आक्रामक शुरूआत की और पहले क्वार्टर में भारत को एक भी पेनल्टी कॉर्नर नहीं बनाने दिया . भारत के पास छठे मिनट में खाता खोलने का मौका था जब हार्दिक सिंह ने सर्कल पर से डी के भीतर सुखजीत सिंह को पास दिया लेकिन वह सही निशाना नहीं साध सके . स्पेन के लिये 10वें मिनट में मोस मारिया बास्टेरा के शॉट का हरमनप्रीत ने बचाव किया. पहले क्वार्टर तक कोई टीम गोल नहीं कर सकी. दूसरे क्वार्टर में स्पेन को 18वें मिनट में पेनल्टी स्ट्रोक मिला जिस पर मिरालेस ने आसानी से गोल कर दिया .

स्पेन को दो मिनट बाद पेनल्टी कॉर्नर भी मिला लेकिन रोहिदास ने जबर्दस्त बचाव किया . रोहिदास ने खास तौर पर डिफेंस में बेहतरीन प्रदर्शन किया जिनकी कमी जर्मनी के खिलाफ सेमीफाइनल में उनके प्रतिबंधित होने के कारण खली थी. स्पेन की टीम 25वें मिनट में एक और गोल करने के करीब पहुंची जब गेरार्ड क्लापेस ने सुमित से गेंद छीनी और श्रीजेश के ठीक सामने उन्हें चकमा देकर गोल के भीतर डालने की कोशिश की और भारतीय टीम भाग्यशाली रही कि उनका निशाना ठीक नहीं लगा.

स्पेन को दो मिनट बाद मिला पेनल्टी कॉर्नर भी बचा लिया गया . भारत को मैच का पहला पेनल्टी कॉर्नर 28वें मिनट में मिला लेकिन रोहिदास गोल नहीं कर सके . हाफटाइम से कुछ सेकंड पहले मिले पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करके हरमनप्रीत ने भारत को बराबरी दिलाई.
ब्रेक के बाद भारतीय टीम आक्रामक तेवरों के साथ उतरी और तीसरे ही मिनट में मिले पेनल्टी कॉर्नर को तब्दील करके हरमनप्रीत ने 2 . 1 से बढत दिला दी . हरमनप्रीत का यह टूर्नामेंट में 11वां गोल था . दो मिनट बाद जवाबी हमले में स्पेन को मिले पीसी पर मिरालेस गोल नहीं कर सके . वहीं भारत को 37वें और स्पेन को 40वें मिनट में मिला पेनल्टी कॉर्नर बेकार गया . आखिरी पंद्रह मिनट में सुखजीत ने फिर एक मौका गंवाया जबकि स्पेन को 59वें मिनट में दो और फिर आखिरी मिनट में मिले दो और पेनल्टी कॉर्नर बेकार गए.

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दी भारतीय हॉकी टीम को कांसा जीतने पर बधाई

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को पेरिस ओलंपिक में लगातार दूसरा कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम को बधाई दी. राष्ट्रपति मुर्मू ने ‘एक्स’ पर लिखा, ”पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने पर हमारी हॉकी टीम को हार्दिक बधाई. पांच दशक से भी अधिक समय के बाद भारत ने लगातार दो ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक जीता है. ”

उन्होंने लिखा, ”भारतीय हॉकी के पुनरुत्थान के लिए टीम प्रशंसा की पात्र है. उन्होंने भारत को गौरवान्वित किया है. इस टीम द्वारा दिखाई गई निरंतरता, कौशल, एकजुटता और लड़ने की भावना हमारे युवाओं को प्रेरित करेगी. ‘वेल डन’ भारतीय हॉकी टीम. ” मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, ”एक ऐसी उपलब्धि जिसे आने वाली पीढि.यां याद रखेंगी. ”

उन्होंने लिखा, ”भारतीय हॉकी टीम ने ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीता. यह और भी खास है क्योंकि यह ओलंपिक में उनका लगातार दूसरा पदक है. ” उन्होंने खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा, ”उनकी सफलता कौशल, दृढ़ता और टीम भावना की जीत है. उन्होंने बहुत हिम्मत और लचीलापन दिखाया. खिलाड़ियों को बधाई. हर भारतीय का हॉकी से भावनात्मक जुड़ाव है और यह उपलब्धि हमारे देश के युवाओं के बीच इस खेल को और भी लोकप्रिय बनाएगी. ”

गृहमंत्री अमित शाह ने लिखा, ”क्या शानदार प्रदर्शन. पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने पर हमारी पुरुष हॉकी टीम को बहुत-बहुत बधाई. आपका दमदार प्रदर्शन और बेहतरीन खेल भावना खेल के लिए एक नया जोश जगाएगी. आपकी उपलब्धि ने देश का गौरव बढ़ाया है. ”

हर अग्निपरीक्षा में भारतीय हॉकी के ‘संकटमोचक’ साबित हुए श्रीजेश

बोर्ड के इम्तिहान में ग्रेस अंक पाने के लिये खेलों में उतरने से लेकर ‘भारतीय हॉकी की दीवार’ बनने तक पराट्टू रवींद्रन श्रीजेश का सफर उपलब्धियों से भरपूर रहा और हर बड़ी चुनौती में संकटमोचक बनकर उभरे इस नायाब खिलाड़ी को पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद अपने कंधे पर बिठाकर भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह की टीम ने आज विदाई दी . 36 वर्ष के श्रीजेश ने ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम को मिले 13वें और लगातार दूसरे पदक के साथ अंतरराष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कह दिया .

तोक्यो ओलंपिक में जर्मनी के खिलाफ प्लेआफ मुकाबले में निर्णायक पेनल्टी बचाकर 41 साल बाद भारत को ओलंपिक पदक दिलाना हो या पेरिस में ओलंपिक खेलों में आस्ट्रेलिया पर 52 साल बाद मिली जीत हो या ब्रिटेन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में पेनल्टी शूटआउट में भारत को मिली जीत हो, हर जुबां पर एक ही नाम था पी आर श्रीजेश .

आठ मई 1988 को केरल के अर्नाकुलम जिले के किझाकम्बलम गांव में जन्मे श्रीजेश ने पहले ‘ भाषा’ से बातचीत में बताया था कि वह बोर्ड की परीक्षा में ग्रेस अंक लेने के लिये एथलेटिक्स में उतरे थे और बाद में उनके स्कूल के कोच ने उन्हें हॉकी गोलकीपर बनने की सलाह दी हालांकि केरल में उस समय एथलेटिक्स और फुटबॉल की ही लोकप्रियता थी . लेकिन कोच की वह सलाह श्रीजेश और भारतीय हॉकी के लिये वरदान साबित हुई .

उन्होंने कहा था ,” मेरा सफर सपने जैसा रहा है . बोर्ड परीक्षा में ग्रेस अंक लेने के लिये खेलना शुरू किया तो कभी सोचा नहीं था कि भारत की जर्सी पहनूंगा और ओलंपिक खेलूंगा . चौथा ओलंपिक सपना ही लगता है . अब तक धनराज पिल्लै ने ही चार ओलंपिक, चार विश्व कप, चैम्पियंस ट्रॉफी और एशियाई खेलों में भाग लिया . चार ओलंपिक खेलने वाला मैं पहला गोलकीपर हूं , विश्वास नहीं होता .” कोलंबो में 2006 में दक्षिण एशियाई खेलों के जरिये भारत की सीनियर टीम में पदार्पण करने वाले श्रीजेश 2011 तक एड्रियन डिसूजा और भरत छेत्री जैसे सीनियर गोलकीपरों के रहते टीम में स्थायी जगह नहीं पा सके . वह 2011 से टीम के अभिन्न अंग बने और 2014 एशियाई खेल फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ दो पेनल्टी स्ट्रोक बचाकर स्टार बने .

इसके बाद उन्होंने मुड़कर नहीं देखा और ओलंपिक, विश्व कप, चैम्पियंस ट्रॉफी, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल , प्रो लीग सभी टूर्नामेंटों में उनका जलवा रहा . खेल रत्न, पद्मश्री , विश्व के सर्वश्रेष्ठ एथलीट, एफआईएच के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी , 336 अंतरराष्ट्रीय मैच उनकी उपलब्धियों की गवाही खुद ब खुद देते हैं .

यही वजह है कि धनराज पिल्लै उन्हें मेजर ध्यानचंद, बलबीर सिंह सीनियर, मोहम्मद शाहीद जैसे महानतम खिलाड़ियों की सूची में रखते हैं तो दिलीप तिर्की उन्हें भारतीय गोलकीपिंग का भगवान कहते हैं . मनप्रीत सिंह जैसे अनुभवी मिडफील्डर अपनी परेशानियां उनसे साझा करते हैं तो राजकुमार पाल या अभिषेक जैसे युवा खिलाड़ियों को वे दबाव झेलने का हौसला देते हैं . कप्तान हरमनप्रीत सिंह उनकी उपस्थिति में अपना बोझ हलका महसूस करते हैं तो करोड़ों भारतीय हॉकी प्रेमियों को आखिरी पल तक उम्मीद रहती है कि श्रीजेश है तो गोल नहीं होने देगा .

रजनीकांत के फैन श्रीजेश भारतीय हॉकी खिलाड़ियों के ऐसे ‘थाला’ (बड़े भाई) रहे जिन्होंने गलती होने पर डांटा और अच्छा खेलने पर पीठ भी थपथपाई . मैदान पर गोल के सामने अकेले खड़े होने पर भी वह अकेले नहीं रहते और लगातार बोलते हुए खिलाड़ियों का मनोबल बढाते रहते हैं . मलयालम भाषी श्रीजेश कभी पंजाबी में भी बोलते सुनाई दे जाते हैं तो कभी मैच जीतने पर गोलपोस्ट पर बैठे नजर आते हैं .

पिछले दो दशक से अधिक समय से हॉकी खेल रहे श्रीजेश के लिये जिंदगी हॉकी के मैदान तक सिमटी रही है . यही वजह है कि पेरिस ओलंपिक कांस्य पदक के मैच से पहले उन्होंने एक्स पर लिखा, ” अब जबकि मैं आखिरी बार पोस्ट के बीच खड़ा होने जा रहा हूं तब मेरा दिल कृतज्ञता और गर्व से फूलकर कुप्पा हो रहा है. सपनों में खोए रहने वाले एक युवा लड़के से भारत के सम्मान की रक्षा करने वाले व्यक्ति तक की यह यात्रा असाधारण से कम नहीं है.”

उन्होंने कहा,”आज मैं भारत के लिए अपना आखिरी मैच खेल रहा हूं. मेरा हर बचाव, प्रत्येक डाइव, दर्शकों का शोर हमेशा मेरे दिल में गूंजते रहेंगे. आभार भारत, मुझ पर विश्वास करने के लिए, मेरे साथ खड़े होने के लिए. यह अंत नहीं है, यह संजोई गई यादों की शुरुआत है. वाकई भारतीय हॉकी टीम जब भी मैदान पर उतरेगी तो उनका जोश, उनकी मुस्कुराहट, उनकी गोलकीपिंग और उनका ‘स्वैग’ जरूर याद आयेगा . भविष्य में शायद एक कोच के रूप में या किसी और भूमिका में वह भारतीय हॉकी से फिर जुडें . इंतजार रहेगा .

मेरा फैसला नहीं बदलेगा , श्रीजेश ने संन्यास पर पुर्निवचार से इनकार किया

भारत के महान गोलकीपरों में शुमार पी आर श्रीजेश ने लगातार दूसरा ओलंपिक कांस्य पदक जीतने के बाद अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास के अपने फैसले को बदलने की संभावना से इनकार करते हुए कहा ,” यह विदा लेने का सही समय है .” श्रीजेश ने स्पेन को कांस्य पदक के मुकाबले में 2 . 1 से हराने के बाद कहा ,” मुझे लगता है कि ओलंपिक खेलों से विदा लेने का यह सही तरीका है, एक पदक के साथ . हम खाली हाथ घर नहीं जा रहे जो बड़ी बात है .”

उन्होंने मैच के बाद कहा ,”मैं लोगों की भावनाओं का सम्मान करता हूं लेकिन कुछ फैसले कठिन होते हैं . सही समय पर फैसला लेने से हालात खूबसूरत हो जाते हैं . इसलिये मेरा फैसला नहीं बदलेगा .” उन्होंने कहा ,” टीम ने शानदार प्रदर्शन किया है और इस मैच को इतना यादगार बना दिया .” तोक्यो में 41 साल बाद ओलंपिक पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे श्रीजेश ने कहा ,” तोक्यो में मिले पदक की मेरे दिल में खास जगह है . इससे हमें आत्मविश्वास मिला कि हम ओलंपिक में पदक जीत सकते हैं .’

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