धोखाधड़ी मामला : अदालत ने पूजा खेडकर को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 12 Aug 2024 07:26 PM
धोखाधड़ी मामला : अदालत ने पूजा खेडकर को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी
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नयी दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने धोखाधड़ी करने और अन्य पिछड़ा वर्ग व दिव्यांगता के आरक्षण का गलत तरीके से लाभ उठाने के आरोप में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की पूर्व परिवीक्षाधीन अधिकारी पूजा खेडकर को सोमवार को गिरफ्तारी से 21 अगस्त तक अंतरिम सुरक्षा प्रदान की. न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने खेडकर की अग्रिम जमानत याचिका पर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के साथ ही दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया और उनसे जवाब देने को कहा.

न्यायमूर्ति प्रसाद ने कहा, ”मौजूदा मामलों में तथ्यों पर गौर करते हुए अदालत का यह मानना है कि याचिकाकर्ता को सुनवाई की अगली तारीख तक गिरफ्तार न किया जाए.” अदालत ने मामले पर अगली सुनवाई के लिए 21 अगस्त की तारीख तय की है.
खेडकर पर आरक्षण का लाभ पाने के लिए यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, 2022 के लिए अपने आवेदन में ‘गलत जानकारी प्रस्तुत करने’ का आरोप लगाया गया है.

यूपीएससी ने 31 जुलाई को खेडकर की उम्मीदवारी रद्द कर दी थी और उन्हें भविष्य की परीक्षाओं में हिस्सा लेने से भी रोक दिया था.
दिल्ली की एक सत्र अदालत ने एक अगस्त को खेडकर को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं जिनकी ”विस्तृत जांच करने की आवश्यकता है.” सुनवाई के दौरान, उच्च न्यायालय ने पुलिस और यूपीएससी से मामले में उनकी हिरासत की आवश्यकता बताने को कहा, क्योंकि यह दस्तावेज में गलत सूचना का मामला है और खेडकर ‘व्यवस्था से छेड़छाड़ करने के लिए व्यवस्था में नहीं हैं’ तथा कथित तौर पर उन्होंने अकेले ही अपराध किया.

अदालत ने कहा, ”आपको उनकी हिरासत की आवश्यकता क्यों है? मामला उनके द्वारा अपने फॉर्म में दिए गए झूठे बयान का प्रतीत होता है… ये सभी बातें उनके फॉर्म में ही हैं. इसमें किसी और के शामिल होने का सवाल ही कहां उठता है जिसके लिए उन्हें हिरासत में लेने की आवश्यकता होगी?” उच्च न्यायालय ने कहा कि गिरफ्तारी पूर्व जमानत से इनकार करते हुए निचली अदालत ने कथित अपराध के मामले को देखा लेकिन इस बारे में एक भी शब्द नहीं कहा कि राहत क्यों नहीं दी जानी चाहिए. यूपीएससी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश कौशिक ने कहा कि खेडकर ‘आम नागरिक नहीं हैं’ और वह व्यवस्था का हिस्सा नहीं होने पर भी ‘प्रभावशाली और हेरफेर करने में सक्षम’ हैं.

अदालत ने पुलिस से कहा, ”अगले चार दिन अगर आपके पास उन्हें गिरफ्तार करने की कोई वजह नहीं है तो गिरफ्तार मत कीजिए.” खेडकर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने पक्ष रखा. यूपीएससी की ओर से अधिवक्ता वर्द्धमान कौशिक भी पेश हुए.
यूपीएससी ने पिछले महीने खेडकर के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी जिनमें फर्जी पहचान के साथ सिविल सेवा परीक्षा देने के लिए उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करना शामिल है. खेडकर ने यह कहते हुए सत्र अदालत का रुख किया था कि उन्हें ”तुरंत गिरफ्तारी का खतरा है.”

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