जले नोटों का वीडियो वेबसाइट पर अपलोड करने का मतलब यह नहीं कि प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण हो गई : न्यायालय

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 30 Jul 2025 07:36 PM
जले नोटों का वीडियो वेबसाइट पर अपलोड करने का मतलब यह नहीं कि प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण हो गई : न्यायालय
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की इस दलील से सहमति जताई कि उनके आवास पर मिली जली हुई नोटों की गड्डियों का वीडियो शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया जाना चाहिए था. हालांकि, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एजी मसीह की पीठ ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि वीडियो वेबसाइट पर जारी हो गए हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण हो गई और न्यायमूर्ति वर्मा ”बिना किसी दंड के” निकल सकते हैं.

शीर्ष अदालत ने कहा कि महाभियोग की कार्यवाही आंतरिक रिपोर्ट के संदर्भ के बिना संसद में स्वतंत्र रूप से आयोजित की जाएगी.
शीर्ष अदालत में अपील करने में देरी के सवाल पर न्यायमूर्ति वर्मा की ओर से दलील देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर एक वीडियो जारी किया गया था और न्यायाधीश की छवि पहले ही खराब हो चुकी थी.
न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा, ”फिलहाल हम इस मामले में आपके साथ हैं. ऐसा नहीं किया जाना चाहिए था.”

हालांकि, न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा, ”इसका मतलब यह नहीं है कि प्रक्रिया में कोई चूक हुई है, जिससे आपके खिलाफ कार्रवाई करने की संसद की शक्तियां प्रभावित होती हैं, क्योंकि संसद की अपनी शक्तियां हैं.” उन्होंने कहा, ”संसद को न्यायपालिका क्या कहती है या प्रधान न्यायाधीश क्या सिफारिश करते हैं, इससे निर्देशित नहीं होना चाहिए. उसे स्वतंत्र रूप से कार्य करना चाहिए और यदि संसद प्रस्ताव स्वीकार करती है और यदि कोई जांच समिति गठित की जाती है, तो आप जानते हैं कि समिति के सदस्य कौन हो सकते हैं.” न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा, ”क्या आपको लगता है कि वे सदस्य, उच्च क्षमता वाले लोग, प्रारंभिक रिपोर्ट से प्रभावित होंगे. वहां आपको निष्कर्षों को खारिज करने का पूरा अवसर मिलेगा?”

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