छत्तीसगढ़ में हुए शराब घोटाले में EOW-ACB की जांच के बाद आबकारी अपर आयुक्त आशीष श्रीवास्तव को सस्पेंड कर दिया गया है।
विगत 14 अक्टूबर को रायपुर की विशेष अदालत में आशीष श्रीवास्तव के खिलाफ पूरक चालान पेश किया गया था और पहली नजर में उनके खिलाफ आरोप सही पाए गए थे। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 14 अक्टूबर 2026 से ही निलंबन का आदेश माना जाएगा।
कुछ दिन पूर्व ही छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा/भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ईओडब्ल्यू/एसीबी) ने बुधवार को कथित शराब घोटाले में अपना 10वां पूरक आरोप पत्र दाखिल किया। इसमें कांग्रेस की छत्तीसगढ़ इकाई के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल सहित 20 व्यक्तियों और 22 फर्मों/कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि 27 हजार पन्नों का यह आरोप पत्र सहायक दस्तावेजों के साथ रायपुर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विशेष अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
आरोप पत्र में नामजद अन्य व्यक्तियों में नवीन केडिया, राजेंद्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल, भूपेंद्र पाल सिंह भाटिया उर्फ गोल्डी भाटिया, प्रिंस भाटिया, विधु गुप्ता, अशोक सिंह, नवनीत गुप्ता, सत्येंद्र प्रकाश गर्ग, विकास कुमार, राजीव द्विवेदी, एन उदय राव, आशीष सौरभ केडिया, सुमित कुमार मालू उर्फ टिंकू मालू, रवि बजाज, आशीष श्रीवास्तव, यश टुटेजा, अख्तर ढेबर, बीआर लोहिया और कुमार भाई ठक्कर उर्फ खंजन ठक्कर शामिल हैं। ईडी के अनुसार, जांच में सबूत मिले हैं कि रामगोपाल अग्रवाल ने पार्टी फंड के नाम पर एक हजार करोड़ से अधिक की नकद राशि प्राप्त की, उसका प्रबंधन किया और उसे स्थानांतरित किया।
कथित घोटाले के तहत कमीशन दो श्रेणियों में दिया गया था-वैध शराब की आपूर्ति के लिए ‘पार्ट-ए’ कमीशन और आपूर्ति क्षेत्रों/जोन तथा मार्केट शेयर के आधार पर ‘पार्ट-सी’ कमीशन।
इसके अतिरिक्त, डिस्टिलरीज से आबकारी शुल्क चुकाए बिना अतिरिक्त मात्रा में देसी शराब बनवाई जाती थी। ‘पार्ट-बी’ के रूप में वर्णित इस शराब की नकली होलोग्राम और फर्जी या डुप्लिकेट परिवहन परमिट का उपयोग करके सरकारी शराब दुकानों में आपूर्ति की जाती थी। इसकी बिक्री का रिकॉर्ड आधिकारिक खातों में दर्ज नहीं होता था, और नकद राशि को अलग से एकत्र करके सिंडिकेट को सौंप दिया जाता था।
एजेंसी का अनुमान है कि 15 जिलों में अवैध रूप से बेची गई ‘पार्ट-बी’ शराब की 60,50,950 पेटियों का कुल बिक्री मूल्य लगभग 2,174.67 करोड़ रुपये था।