विगत 14 अक्टूबर को श्रीनगर के सिविल सचिवालय में ‘मिशन युवा’ पर आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान, IAS अधिकारी राजीव रंजन और राज्य सेवा सर्विस की अधिकारी बीनीश वानी के बीच तीखी बहस हो गई। इस दौरान एक-दूसरे पर अपशब्द कहने के आरोप लगे और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई। दूसरी ओर मामला मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तक पहुंचा है और उन्होंने आइएएस के व्यवहार पर आश्चर्य जताया है।
घटना के विवरण के अनुसार, यह विवाद दोपहर करीब 3 बजे ‘मिशन युवा’ (Mission YUVA – युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने की एक पहल) की समीक्षा के दौरान हुआ।
2010 बैच के IAS अधिकारी राजीव रंजन, जो श्रम और रोजगार विभाग में प्रशासनिक सचिव के पद पर तैनात हैं, इस योजना के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ‘राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ (NRLM) के साथ विभाग के समन्वय की समीक्षा कर रहे थे।
बैठक के दौरान, उन्होंने 2015 बैच की JKAS अधिकारी बीनीश वानी से विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को लेकर सवाल पूछा। वानी वर्तमान में गांदरबल के जिला रोजगार और परामर्श केंद्र में सहायक निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।
बताया गया है कि जब वानी समन्वय से जुड़ी समस्याओं को समझाने की कोशिश कर रही थीं, तो तनाव बढ़ गया। आरोप है कि रंजन ने बार-बार उन्हें बीच में ही रोक दिया और चुप रहने के लिए कहा।
जब वानी ने बीच में रोके जाने पर आपत्ति जताई, तो रंजन ने कथित तौर पर अपशब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “यू आर ब्लडी शिट!” (You are bloody shit!) और “आई एम योर बॉस, स्टुपिड!” (I am your boss, stupid!)।
इसके जवाब में वानी ने कहा, “टू हेल विद यू” (To hell with you – भाड़ में जाओ), जिसके बाद उन्हें बैठक से बाहर जाने के लिए कह दिया गया।
इस घटना ने सरकारी कामकाज के दौरान पेशेवर आचरण और अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस विवाद के बाद, रंजन ने वानी को तुरंत निलंबित करने की मांग की और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) से उनके खिलाफ कार्रवाई करने, यहां तक कि उन्हें सेवा से हटाने की भी अपील की।
बताया गया है कि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वानी की टिप्पणियों को आधिकारिक कार्यवाही में विशेष रूप से दर्ज किया जाए, ताकि उनके खिलाफ ‘आदेश न मानने’ (insubordination) के आरोप को साबित किया जा सके।
घटनाक्रम को पूरी तरह समझने के लिए, उन परिस्थितियों की जांच की जानी चाहिए जिनके कारण यह विवाद हुआ, जिसमें दोनों अधिकारियों का आचरण भी शामिल है। इस घटना ने सरकारी बैठकों के दौरान सरकारी अधिकारियों से अपेक्षित पेशेवर व्यवहार के मानकों की ओर ध्यान खींचा है।
‘ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स, 1968’ में IAS अधिकारियों के लिए आचरण के मानक तय किए गए हैं। कदाचार के किसी भी आरोप की जांच लागू सेवा नियमों और स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार की जानी चाहिए।
जहां वरिष्ठ अधिकारी अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होते हैं, वहीं अनुचित व्यवहार के आरोपों की भी निष्पक्ष और तटस्थ तरीके से जांच की जानी चाहिए।
सामने आई इस बहस या टकराव की परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए संबंधित अधिकारियों या जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया जरूरी होगी। इन आरोपों और बताई गई टिप्पणियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
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