लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों की परिवहन सुरक्षा को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने प्रदेश में विद्यालय परिवहन सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए जिला स्तर पर समितियों के गठन और उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा है।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए।
मुख्य सचिव को एक सप्ताह में जारी करने होंगे निर्देश
अदालत ने मुख्य सचिव को आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा है। इन निर्देशों के जरिए जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समिति (DSVSC) की नियमित बैठकें सुनिश्चित करने और स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों (STSC) के कामकाज की निगरानी करने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
डीएम को एक महीने में देनी होगी रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने जिलाधिकारियों को नियमों के तहत विद्यालय परिवहन सुरक्षा समितियों का विधिवत गठन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। साथ ही इन समितियों को निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन करने के लिए भी कहा गया है।
सभी जिलाधिकारियों को एक महीने के भीतर अदालत के आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
नियमों के तहत स्कूल वाहनों की निगरानी का प्रावधान
सुनवाई के दौरान परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने उत्तर प्रदेश मोटर वाहन नियमों में स्कूल वाहनों से संबंधित प्रावधानों की जानकारी अदालत के सामने रखी। बताया गया कि नियम 222A के तहत स्कूली वाहनों के लिए परमिट अनिवार्य है। शिक्षा संस्थानों और निजी बसों के लिए अलग-अलग प्रावधान निर्धारित किए गए हैं।
वहीं, नियम 222E के तहत जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली समिति को स्कूल वाहनों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
समिति के गठन को लेकर सामने आई स्थिति
अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि नियम 222G के तहत गठित विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति वर्तमान में प्रभावी रूप से कार्यरत नहीं है। इसी व्यवस्था को सक्रिय करने और नियमों के अनुरूप समितियों के कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने निर्देश जारी किए हैं।
सीबीएसई और आईसीएसई भी मामले में पक्षकार
हाईकोर्ट ने मामले में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE/ICSE) को भी पक्षकार बनाया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को निर्धारित की गई है।
15 सितंबर को अधिकारी हुए थे अदालत में पेश
मामले की सुनवाई के दौरान परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन और डीसीपी ट्रैफिक रवीना त्यागी 15 सितंबर को अदालत के समक्ष उपस्थित हुए थे। जनहित याचिका में स्कूलों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे।
क्या होगा आगे?
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब जिलों में स्कूल वाहन सुरक्षा समितियों के गठन और उनके कामकाज पर निगरानी बढ़ने की संभावना है। मुख्य सचिव के निर्देश जारी होने के बाद जिलाधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अनुपालन सुनिश्चित करना होगा और इसकी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करनी होगी।