Maharashtra Farmer Crisis: महाराष्ट्र के धाराशिव और लातूर क्षेत्र में बारिश की कमी और पानी के संकट ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेती पर निर्भर परिवारों के सामने सिर्फ मौजूदा फसल के नुकसान की चिंता नहीं है, बल्कि आने वाले महीनों में घर का खर्च चलाने और अगली फसल की तैयारी करने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।
धाराशिव जिले में पिछले पांच वर्षों के दौरान औसत भूजल स्तर में करीब 7.2 मीटर की गिरावट बताई गई है। जिले की सभी आठ तहसील—धाराशिव, तुलजापुर, कलंब, वाशी, भूम, परंडा, लोहारा और उमरगा—सूखाग्रस्त घोषित की जा चुकी हैं।
सूखी फसल ने बढ़ाई किसानों की चिंता
धाराशिव के करजखेड़ा गांव में किसान सूखे सोयाबीन के पौधों को खेत से निकाल रहे हैं। कई परिवारों की उम्मीदें इसी फसल से जुड़ी थीं। सोयाबीन और गन्ने से मिलने वाली आय से घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अगले सीजन की खेती का इंतजाम होना था, लेकिन फसल खराब होने से पूरा आर्थिक गणित बिगड़ गया है।
किसानों के लिए समस्या केवल इस साल की कमाई तक सीमित नहीं है। खेत में लगाई गई लागत वापस नहीं आने की चिंता के साथ उन्हें यह भी सोचना पड़ रहा है कि अगली बुआई तक परिवार का खर्च कैसे चलेगा।
15 एकड़ में सोयाबीन, फिर भी हाथ खाली
काटी गांव के किसान अविनाश देशमुख ने 15 एकड़ में सोयाबीन और एक एकड़ में प्याज की खेती की थी। बारिश पर्याप्त नहीं होने के कारण फसल प्रभावित हुई। अब उनके सामने फसल से मिलने वाली संभावित आय के बजाय पहले से किए गए खर्च की भरपाई का सवाल खड़ा है।
कृषि पर निर्भर परिवारों के लिए फसल की आय पूरे साल के घरेलू खर्च का महत्वपूर्ण आधार होती है। ऐसे में फसल खराब होने का असर बच्चों की शिक्षा, घरेलू जरूरतों और अगली खेती की तैयारी तक पहुंच रहा है।
ग्रामीण परिवारों पर आर्थिक और सामाजिक दबाव
फसल नुकसान और खेती में बढ़ती अनिश्चितता का असर ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ रहा है। कर्ज और आय में कमी के कारण कई परिवारों के सामने भविष्य की योजनाओं को लेकर मुश्किलें बढ़ रही हैं।
रिपोर्ट में किसानों के परिवारों में युवाओं की शादी को लेकर भी चिंता का जिक्र है। पानी और खेती का संकट अब सिर्फ खेत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर ग्रामीण परिवारों के सामाजिक जीवन पर भी दिखाई दे रहा है।
तुलजापुर में किसान आत्महत्याओं का आंकड़ा
रिपोर्ट के अनुसार, धाराशिव जिले के तुलजापुर तालुका में 1 जनवरी से 30 सितंबर 2026 के बीच 19 किसानों की आत्महत्या की जानकारी सामने आई है। ऐसे मामलों के पीछे व्यक्तिगत, पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों का अलग-अलग योगदान हो सकता है।
कर्नाटक में भी सूखे से फसल प्रभावित
महाराष्ट्र के अलावा कर्नाटक में भी सूखे की स्थिति ने किसानों की परेशानी बढ़ाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 177 तालुकों में 47.09 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है और अनुमानित नुकसान करीब 46,324.5 करोड़ रुपये बताया गया है।
कर्नाटक सरकार की ओर से केंद्र से वित्तीय सहायता की मांग की गई है। राज्य ने खरीफ 2026 के लिए पहले 101 सूखा प्रभावित तालुकों के लिए 3,705.30 करोड़ रुपये की सहायता मांगी थी। बाद में 76 और तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया।
किसानों के सामने आगे की चुनौती
मौसम की अनिश्चितता, घटता भूजल स्तर और फसल नुकसान ने महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में कृषि आधारित परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक चुनौतियां खड़ी की हैं। किसानों के लिए तत्काल राहत के साथ पानी की उपलब्धता, फसल सुरक्षा और अगली बुआई के लिए संसाधनों की व्यवस्था महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।