गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में बढ़ती नशाखोरी: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में बढ़ती नशाखोरी को लेकर चिंता सामने आ रही है। शराब और गांजे के सेवन से लेकर कच्ची महुआ शराब, रॉकेट-मुनक्का, नशीली दवाइयों और इंजेक्शन के इस्तेमाल तक की चर्चाएं हो रही हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि युवा भी नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। ऐसे में नशीले पदार्थों की उपलब्धता के स्रोतों की पहचान करने और अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने की जरूरत बताई जा रही है।
सुनसान जगहों पर नशेड़ियों के जुटने की चर्चा
गौरेला में रेलवे स्टेशन के आउटर क्षेत्र, ज्योतिपुर स्थित धरना स्थल के पीछे बने खाली भवन, अंजनी रोड के आसपास के सुनसान मकानों और अन्य निर्जन स्थानों पर नशा करने वालों के जुटने की चर्चा है। वहीं पेंड्रा में आबकारी विभाग के कार्यालय वाले क्षेत्र के आसपास कच्ची महुआ शराब की कथित अवैध भट्टियां चलने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि इन स्थानों पर नशीले पदार्थों की उपलब्धता, अवैध गतिविधियों और इनके पीछे सक्रिय लोगों की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित स्थानों की जांच कर यह पता लगाना जरूरी है कि नशीले पदार्थ कहां से आ रहे हैं और उनकी आपूर्ति कौन कर रहा है।
युवाओं तक कैसे पहुंच रहे नशीले इंजेक्शन?
नशे के बदलते स्वरूप के बीच सबसे बड़ा सवाल नशीली दवाइयों और इंजेक्शन की उपलब्धता को लेकर है। सवाल उठ रहा है कि ये पदार्थ युवाओं तक कैसे पहुंच रहे हैं और क्या इनके पीछे कोई संगठित सप्लाई नेटवर्क सक्रिय है। अगर प्रतिबंधित या नियंत्रित दवाइयों की अवैध बिक्री हो रही है, तो पुलिस और औषधि निरीक्षक को मिलकर इसकी जांच करनी चाहिए, ताकि आपूर्ति के स्रोत का पता लगाकर जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई हो सके।
स्थानीय स्तर पर पिछले महीने तीन दिनों के भीतर दो युवकों की मौत की चर्चा भी सामने आई है। इन मौतों को नशीले इंजेक्शन के इस्तेमाल से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन मौतों के वास्तविक कारणों की पुष्टि नहीं हुई है। चिकित्सकीय और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच जरूरी है, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके और किसी अपुष्ट जानकारी को तथ्य के रूप में पेश करने से बचा जा सके।
200 से अधिक लोगों ने कराया नशामुक्ति उपचार
जिले में 200 से अधिक लोगों के नशा छोड़ने के लिए उपचार कराने की जानकारी सामने आई है। इनमें युवाओं की संख्या ज्यादा बताई जा रही है। यह स्थिति नशामुक्ति सेवाओं को मजबूत बनाने की जरूरत की ओर भी ध्यान दिलाती है। उपचार के साथ नियमित काउंसलिंग, परिवार का सहयोग और पुनर्वास की व्यवस्था जरूरी है, ताकि नशा छोड़ने वाले लोग दोबारा इसकी गिरफ्त में न आएं।
प्रभावी कार्रवाई की जरूरत
जीपीएम पुलिस समय-समय पर नशे के खिलाफ कार्रवाई करती रही है। हालांकि नशीले पदार्थों की उपलब्धता और कथित अवैध बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के लिए पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, आबकारी विभाग और औषधि निरीक्षक के बीच समन्वय जरूरी है।
संभावित ठिकानों की जांच, नशीली दवाइयों की बिक्री की निगरानी और सप्लाई नेटवर्क की पहचान के साथ नशे की गिरफ्त में आए लोगों के उपचार और पुनर्वास पर भी ध्यान देना होगा। समन्वित प्रयासों से ही नशे की समस्या पर अंकुश लगाया जा सकता है और खासकर युवा पीढ़ी को इसके दुष्प्रभावों से बचाया जा सकता है।