रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल मंगलवार को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT), रायपुर के 17वें दीक्षांत समारोह एवं सात नव-स्थापित ‘सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस’ के भव्य शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी उपस्थित रहे।
समारोह के दौरान सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बी.टेक, बी.आर्क, एम.टेक, एम.एससी, एमसीए और पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने वाले सभी प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल एवं मंगलमय भविष्य की कामना की।
*केंद्रीय मंत्री ने पूरी की मांग, क्रिटिकल मिनरल्स सेंटर की मिली सौगात*
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विशेष आग्रह को स्वीकार करते हुए केंद्रीय मंत्री ने एनआईटी रायपुर में ‘क्रिटिकल मिनरल्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्वीकृति दी। उन्होंने बताया कि एनआईटी में शुरू हो रहे एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), क्रिटिकल मिनरल्स और कंप्यूटेशनल मैकेनिज्म सहित सभी सात उत्कृष्टता केंद्र देश के तकनीकी परिदृश्य को नई गति देंगे। भारत को महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और आयात पर निर्भरता घटाने में यह संस्थान अग्रणी भूमिका निभाएगा।
*संस्थान से जुड़ी पुरानी यादें कीं साझा*
अपने संबोधन में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने एनआईटी के साथ जुड़े अपने पुराने दिनों को भावुकता से याद किया। उन्होंने कहा, “जब यह केवल एक इंजीनियरिंग कॉलेज हुआ करता था, तब छात्र राजनीति और आंदोलनों के दौरान हमने यहाँ के हॉस्टलों में महीनों रहकर दिन-रात बिताए हैं। यह देश का पहला ऐसा इंजीनियरिंग कॉलेज रहा है जिसने खनन (माइनिंग) और मेटलर्जी की शुरुआत की।” उन्होंने उस दौर के कम खर्च और सादगी भरे दिनों का जिक्र करते हुए कहा कि यहाँ से निकले छात्र आज देश और दुनिया के बड़े-बड़े संस्थानों में शीर्ष पदों पर नेतृत्व कर रहे हैं।
*’रिसर्च और नवाचार का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे’*
पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में अपने अनुभवों को साझा करते हुए सांसद ने कहा कि शोध (Research) केवल 200-500 रिसर्च पेपर्स की फाइलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका असली मूल्यांकन इस बात से होना चाहिए कि उससे धरातल पर कितने लोगों के जीवन में सुधार और विकास हुआ।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की ओर तेजी से अग्रसर है। इस लक्ष्य को हासिल करने में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और एआई का सबसे बड़ा योगदान होगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे एआई जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग विध्वंस के बजाय मानवता के कल्याण और विकास के सशक्त साधन के रूप में करें और अपने ज्ञान से देश व एनआईटी रायपुर का नाम वैश्विक पटल पर रोशन करें।
कार्यक्रम में CSIR महानिदेशक डॉ. (श्रीमती) नल्लाथम्बी कलैसेल्वी, NIT रायपुर निदेशक डॉ. एन.वी. रमना राव जी,
अध्यक्ष शासी निकाय, NIT डॉ. सुरेश हावरे शिक्षकगण, स्कॉलर्स और विद्यार्थी उपस्थित रहे।