महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने शुक्रवार को भाजपा पर गोकुल डेयरी के बोर्ड में पांच अतिरिक्त निदेशकों की नियुक्ति का फैसला लेकर ”अनुचित हथकंडे” अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि सत्तारूढ़ दल वास्तव में लोकतंत्र का सम्मान करता, तो ऐसा कदम कभी नहीं उठाता। मनसे नेता ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भाजपा को ”विचित्र पार्टी” बताते हुए सत्ता में जमीनी स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक काबिज होने के बावजूद ”लोकतंत्र बचाओ” रैलियां निकालने के लिए उसका मजाक उड़ाया। उन्होंने इसे एक अभूतपूर्व कदम बताते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल विपक्ष के खिलाफ मार्च निकाल रहा है।
आमतौर पर ‘गोकुल डेयरी’ के नाम से र्चिचत कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ के हालिया चुनाव में कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य सतेज पाटिल के समर्थन वाले ‘रार्जिष शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी’ ने 25 में से 13 सीट जीतीं। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले ‘महायुति’ सर्मिथत पैनल को 12 सीट पर जीत हासिल हुई। अध्यक्ष पद रिक्त है, क्योंकि चुनाव के लिए बुलाई गई बैठकों में 14 निदेशकों की आवश्यक संख्या नहीं होने के कारण कोरम पूरी नहीं हो सका।
राज्य मंत्रिमंडल ने एक ऐसे प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिससे सहकारी संस्था में सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। इसके तहत सरकार को इसके निदेशक मंडल में पांच निदेशक नियुक्त करने का अधिकार मिलेगा, जिनमें से चार को मतदान का अधिकार होगा।
मनसे प्रमुख ने अपनी पोस्ट में कहा, ”यदि भाजपा वास्तव में लोकतंत्र की रक्षा के लिए इतनी प्रतिबद्ध है, तो गोकुल डेयरी के चुनाव में आपके (भाजपा के) पैनल के 12 और सतेज पाटिल पैनल के 13 उम्मीदवारों के निर्वाचित होने के तुरंत बाद आपकी सरकार ने अपने ही (यानी अपनी ही पार्टी के) पांच अतिरिक्त निदेशकों की नियुक्ति क्यों की और उन्हें मतदान का अधिकार क्यों दिया?” उन्होंने कहा कि भाजपा को ‘अनुचित हथकंडे’ अपनाने और हार स्वीकार करने से इनकार करने से बाज आना चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्वाचित उम्मीदवारों ने गुप्त मतदान के जरिए कराये गये चुनाव में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत जीत हासिल की थी।
ठाकरे ने कहा, ”यदि आप वास्तव में लोकतंत्र का सम्मान करते और उसकी परवाह करते, तो कभी ऐसा कदम नहीं उठाते। क्या सिर्फ इसलिए कि आप गोकुल डेयरी पर नियंत्रण हासिल करने में नाकाम रहे, अब अपने सारे सिद्धांतों को छोड़ने के लिए तैयार हैं? और विडंबना यह है कि इसके बाद आप लोकतंत्र बचाने की लड़ाई लड़ने का दावा करते हुए रैलियां आयोजित करते हैं।” ठाकरे ने आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए भाजपा लोकतंत्र बचाने के दावे के साथ रैलियां आयोजित करती है, जबकि खुद वही लोकतंत्र का गला घोंटने का काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा के शासनकाल में आतंकवादी हमले हुए और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी, फिर भी वह देश को आतंकवाद से बचाने का दावा करते हुए रैलियां आयोजित करती है। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की हालत बेहद खराब है, इसलिए शायद अब भाजपा ”अर्थव्यवस्था बचाओ” रैलियां भी आयोजित करेगी। ठाकरे ने कहा, ”अब जब देश की जनता विपक्ष के पक्ष में अपना समर्थन देना शुरू कर रही है, तो भाजपा को भी इस बदलाव को स्वीकार करना सीखना चाहिए।”
0611 1558 मुंबई