ताइवान ने भी सैन्य अभ्यास शुरू किया, चीन पर लगाया आक्रमण की तैयारी करने का आरोप

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 09 Aug 2022 09:46 PM
ताइवान ने भी सैन्य अभ्यास शुरू किया, चीन पर लगाया आक्रमण की तैयारी करने का आरोप

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बीजिंग/पिंगतुंग (ताइवान). मुश्किल स्थिति का सामना कर रहे ताइवान ने मंगलवार को आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया और द्वीपीय देश के आसपास चीन के अभूतपूर्व सैन्य अभ्यास का मुकाबला करने के लिए अपना सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया. चीन का सैन्य अभ्यास पांचवें दिन में प्रवेश कर गया है.

ताइवान ने अपने सैन्य अभ्यास की शुरुआत करते हुए बींिजग पर पिछले सप्ताह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी की ताइपे यात्रा का उपयोग स्व-शासित द्वीप पर आक्रमण की तैयारी के लिए करने का आरोप लगाया है. ताइवान को चीन अपनी एक-चीन नीति के तहत अपना हिस्सा बताता है.

ताइवान की सेना की आठवीं कोर के प्रवक्ता लू वोई-जे ने ताइपे में मीडिया को बताया कि ताइवान की सेना ने कई घंट तक अपने ‘फायंिरग टारगेट फ्लेयर्स’ और तोपखाने से गोले दागे. ताइवान की सेना ने कहा कि अभ्यास बृहस्पतिवार को एक बार फिर होगा जिसमें सैकड़ों सैनिकों और 40 हॉवित्जर की तैनाती शामिल होगी.

चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के पूर्वी थिएटर कमान ने घोषणा की कि वह 9 अगस्त को ताइवान द्वीप के आसपास के जल और हवाई क्षेत्र में संयुक्त सैन्य अभ्यास और प्रशिक्षण आयोजित करना जारी रखे हुए है, जिसमें संयुक्त नाकाबंदी और संयुक्त समर्थन कार्यों पर जोर दिया गया.

ताइवान के सैन्य अभ्यास पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने मंगलवार को बींिजग में एक मीडिया ब्रींिफग में कहा कि ताइवान जलडमरूमध्य में मौजूदा तनाव का मूल कारण यह है कि डीपीपी (सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी) के अधिकारी स्वतंत्रता की चाहत और उकसावे के लिए विदेशी ताकतों के साथ मिलीभगत कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘हम ताइवान के अधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि इतिहास की प्रवृत्ति के खिलाफ जाने या सैन्य बल के साथ पुर्निमलन का विरोध करने का कोई भी प्रयास सभी चीनी लोगों द्वारा अस्वीकार किया जाएगा और व्यर्थ होगा. इस तरह के प्रयासों का विफल होना तय है.’’ पीएलए ने शुरू में ताइवान जलडमरूमध्य में 4-7 अगस्त तक अपनी सेना के सभी हथियारों को शामिल करते हुए अभूतपूर्व सैन्य अभ्यास की घोषणा की थी, लेकिन यह निर्धारित समय से आगे भी जारी रहा और इसका कोई अंत नहीं दिखता.

चीन की आधिकारिक मीडिया की खबरों में कहा गया है कि ताइवान के आसपास अभ्यास जारी रखना एक नयी सामान्य बात होगी.
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के चुनावों से पता चलता है कि ताइवान की अधिसंख्यक जनता चीन के साथ किसी भी तरह के एकीकरण का विरोध करती हैं और लोगों का एक बड़ा हिस्सा खुद को “ताइवानी” मानता है, न कि “चीनी”.

ताइपे में, ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय मीडिया को अपने संबोधन में आरोप लगाया कि “चीन ने अपने सैन्य अभ्यास का इस्तेमाल ताइवान पर आक्रमण की तैयारी के लिए किया है’’ और पेलोसी की यात्रा को बहाने के रूप में इस्तेमाल किया है.

पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में प्रभुत्व स्थापित करना चाहता है चीन: ताइवान

ताइवान ने मंगलवार को कहा कि चीनी सैन्य अभ्यास न केवल स्वशासित द्वीप पर आक्रमण करने के लिए एक पूर्वाभ्यास है, बल्कि यह पश्चिमी प्रशांत के बड़े क्षेत्रों को नियंत्रित करने की उसकी महत्वाकांक्षाओं को भी दर्शाता है. इस बीच, ताइवान ने अपना खुद का भी सैन्य अभ्यास किया और कहा कि यह आत्मरक्षा की तैयारी के लिए है.

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी की हाल की ताइवान यात्रा से नाराज चीन ने सैन्य जहाजों और विमानों को मध्य रेखा के पार भेजा है जो ताइवान जलडमरूमध्य में दोनों पक्षों को अलग करती है. बींिजग ने द्वीप के आसपास पानी में प्रक्षेपास्त्र भी दागे हैं. बृहस्पतिवार से शुरू हुए चीन के इस अभ्यास ने वैश्विक व्यापार के लिए सबसे व्यस्त क्षेत्रों में से एक में उड़ानों और नौवहन को बाधित कर दिया है.

तनाव को शांत करने के आ’’ान को नजरअंदाज करते हुए बींिजग ने सैन्य अभ्यास और विस्तारित कर दिया है तथा यह भी घोषणा नहीं की है कि यह कब समाप्त होगा. ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने कहा कि 1949 में गृहयुद्ध के दौरान मुख्य भूमि से अलग हुए द्वीप को जोड़ने के लक्ष्य से भी परे चीन पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहता है.

उन्होंने ताइपे में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इसमें ताइवान जलडमरूमध्य के माध्यम से पूर्वी और दक्षिण चीन सागर को नियंत्रित करना तथा हमले की स्थिति में अमेरिका और उसके सहयोगियों को ताइवान की सहायता करने से रोकने के लिए नाकाबंदी करना शामिल है. वू ने कहा कि अभ्यास चीन की “ताइवान से परे भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं” को भी दर्शाता है.

उन्होंने कहा कि ताइवान के लोकतंत्र या अन्य देशों के साथ उसकी बातचीत में “चीन को हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है.’’ चीन का कहना है कि उसने पिछले सप्ताह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के जवाब में सैन्य अभ्यास शुरू किया था, लेकिन वू ने कहा कि चीन उनकी यात्रा को एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है.

पेलोसी की यात्रा के बाद चीन ने ताइवान की ओर से कुछ खाद्य सामग्रियों के आयात पर भी रोक लगा दी है. इसके अलावा उसने जलवायु परिवर्तन समेत कई मुद्दों को लेकर अमेरिका के साथ संवाद बंद कर दिया है. वू ने कहा कि चीन यथास्थिति में बदलाव करना और ताइवान पर आक्रमण करना चाहता है. उन्होंने कहा कि चीन का अभ्यास ताइवान पर आक्रमण की तैयारी है, जिसके जरिए चीन यह चाहता है कि अन्य देश ताइवान की मदद के लिए आगे न आएं.

चीन ताइवान को अपना क्षेत्र बताता है. वह लंबे से कहता आया है कि अगर जरूरत पड़ी तो ताइवान को बलपूर्वक मुख्य भूमि चीन में शामिल किया जा सकता है. वह विदेशी अधिकारियों के ताइवान दौरे का विरोध करता रहा है. साथ ही वह ताइवान के बारे में किसी भी टिप्पणी पर तुरंत प्रतिक्रिया देता रहा है.

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