राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं दी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 08 Aug 2023 06:58 PM
राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं दी
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रायपुर. राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर प्रदेश के सर्व आदिवासी समाज एवं नागरिकों को शुभकामनाएं दी है.

अपने संदेश में राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन ने कहा है कि आज का दिन अपनी संस्कृति, रीति-रिवाज, भाषा, मान्यताओं और विचारों पर गौरवान्वित होेने का दिन है. राज्यपाल ने कहा कि जनजाति समाज के लोग सरल, सहज और निश्छल होते है. प्रकृति से इनका सहज नाता होता है. जिसके सानिध्य में रहते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए अपनी भूमिका का निर्वहन करते है. वीरता और स्वाभिमान उनके प्राकृतिक गुण होते हैं. इतिहास गवाह है कि समय आने पर वे देश की रक्षा के लिए डटे रहे और अपना सर्वाेच्च बलिदान भी दिया. आदिवासी समाज के शहीद बिरसा मुण्डा, वीर नारायण सिंह, वीर गुंडाधूर, रानी दुर्गावती, जैसे असंख्य क्रांतिवीरों को मैं इस अवसर पर नमन करता हूं. देश के विकास मेें आदिवासी समाज का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. केन्द्र शासन और राज्य शासन आदिवासियों के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास कर रही है.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि आदिवासी जनजातियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए पूरी दुनिया में 09 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है. जनजाति बाहुल्य प्रदेश होने के कारण छत्तीसगढ़ को जनजातियों की प्राचीन कला और संस्कृति की अनमोल धरोहर विरासत में मिली है. छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासियों की प्राचीनतम विरासत और संस्कृति को सहेजते हुए उनके विकास और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध है. प्रकृति के करीब जीवन जीने वाली यहां की आदिवासी आबादी को सभी आवश्यक नागरिक सुविधाएं और आगे बढ़ने के सभी साधन सुलभ कराने का हर संभव प्रयास राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है.

बघेल ने कहा कि जनजातियों के विकास और हित को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने कई अहम फैसले लिये हैं. लोहंडीगुड़ा में आदिवासियों की 4200 एकड़ जमीन की वापसी, जेलों में बंद आदिवासियों के मामलों की समीक्षा के लिए समिति का गठन, जिला खनिज न्यास की राशि से आदिवासियों के जीवन स्तर में सुधार का निर्णय, बस्तर और सरगुजा में कर्मचारी चयन बोर्ड की स्थापना और यहां आदिवासी विकास प्राधिकरणों में स्थानीय अध्यक्ष की नियुक्ति से आदिवासी समाज के लिए बेहतर काम करने की कोशिशें जारी हैं.

उन्होंने कहा है कि आदिवासी समाज की जरूरतों और अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई योजनाओं से उनका जीवन अधिक सरल हो सका है. तेंदूपत्ता संग्रहण दर को 2500 से बढ़ाकर 4 हजार रूपए प्रति मानक बोरा करने, 67 तरह के लघु वनोपजों के समर्थन मूल्य पर संग्रहण और विक्रय के साथ ही इनका स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन से हजारों आदिवासियों की आय में बढ़ोत्तरी हुई है. राज्य सरकार ने वन अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन पर अधिकार को मजबूत किया है. वन अधिकार पट्टों के मिलने से हजारों आदिवासियों की आवास और आजीविका की चिंता दूर हुई है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासियों की सांस्कृतिक विरासत को नया आयाम देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार लगातार प्रयास कर रही है. आदिवासी संस्कृति का परिचय देश-दुनिया से कराने के लिए प्रदेश में राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव जैसे आयोजनों की शुरूआत की गई है. विश्व आदिवासी दिवस पर सामान्य अवकाश घोषित किया गया हैै. देवगुड़ियों और घोटुलों के संरक्षण और संवर्धन से आदिम जीवन मूल्यों को सहेजने और संवारने का काम राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है.

विगत साढ़े चार वर्षों में देवगुड़ी ठाकुरदेव एवं सांस्कृतिक केंद्र, घोटुल निर्माण, मरम्मत योजना के तहत दी जाने वाली राशि में उल्लेखनीय रूप से पांच गुना वृद्धि की गई है. साथ ही आदिवासी तीज-त्यौहारों के उत्साहपूर्ण आयोजन के लिए आदिवासी परब सम्मान निधि योजना शुरू की गई है. आदिवासी पर्वों के गरिमामय आयोजन के लिए ग्राम पंचायतों को 10 हजार रूपए की अनुदान सहायता दी जा रही है. इससे लोगों को आदिवासी समाज की परंपराओं और संस्कृतियों को समझने का अवसर मिला है.

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