बेंगलुरु. कर्नाटक में साइनबोर्ड पर कन्नड़ भाषा में जानकारी प्रर्दिशत करने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कानून अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ बृहस्पतिवार को चेतावनी दी और कहा कि विरोध कोई भी कर सकता है, लेकिन सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए.
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए एक अध्यादेश लाएगी कि साइनबोर्ड और नाम पट्टिका पर 60 फीसदी जगह कन्नड़ भाषा को सर्मिपत हो. यह अध्यादेश 28 फरवरी 2024 से अमल में आएगा. उन्होंने कहा कि सरकार कन्नड़ भाषा व्यापक विकास अधिनियम (केएलसीडीए) – 2022 की धारा 17(6) में भी संशोधन करेगी, जिसे पिछली भाजपा सरकार 10 मार्च 2023 को विधानसभा चुनाव से पहले लाई थी.
सिद्धरमैया ने कन्नड़ भाषा एवं संस्कृति विभाग और बेंगलुरु नगर निकाय एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ह्ललोगों को नियमों का पालन करना होगा और अगर कोई उनकी अनदेखी करता है, तो उन्हें परिणाम भुगतने होंगे. यह मैं सभी को स्पष्ट कर रहा हूं. मैं सभी संगठनों और कार्यकर्ताओं से अपील करता हूं कि वे कानून अपने हाथ में न लें.ह्व बेंगलुरु में बुधवार को कन्नड़ समर्थक संगठन कर्नाटक रक्षणा वेदिके (टी ए नारायण गौड़ा गुट) के कार्यकर्ताओं द्वारा ऐसी दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ की गई, जहां साइनबोर्ड, विज्ञापन और नाम पट्टिकाएं कन्नड़ भाषा में नहीं थीं. मुख्यमंत्री इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे.
कर्नाटक रक्षणा वेदिके मांग कर रहा है कि साइनबोर्ड पर कन्नड़ भाषा के लिए 60 प्रतिशत जगह होनी चाहिए. मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने तोड़फोड़ की निंदा करते हुए कहा, ”हम विरोध-प्रदर्शन के खिलाफ नहीं हैं. हम अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाले या न्याय की मांगने वाले किसी भी व्यक्ति का विरोध नहीं करेंगे, लेकिन कानून को हाथ में लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे.”
उन्होंने कहा, ”कन्नड़ बोर्ड जरूरी हैं. यह कन्नड़ प्रदेश है और यहां बोर्ड कन्नड़ में होने चाहिए. हम अन्य भाषाओं के विरोधी नहीं हैं, लेकिन कन्नड़ प्रमुख होनी चाहिए.” सिद्धरमैया ने कहा कि मुख्यमंत्री के अपने पिछले कार्यकाल में उन्होंने 24 मार्च 2018 को एक परिपत्र जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि नाम पट्टिका और साइनबोर्ड पर 60 प्रतिशत जानकारी कन्नड़ में होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि आज सरकार ने निर्णय लिया कि साइनबोर्ड और नामपट्टिका पर जानकारी पिछले परिपत्र के अनुसार 60 फीसदी कन्नड़ में और 40 फीसदी अन्य भाषा में होनी चाहिए.
मुख्यमंत्री ने कहा, ह्लहम (केएलसीडीए) अधिनियम की धारा 17(6) में एक संशोधन लाएंगे.” उन्होंने कहा, ”मैंने अधिकारियों से अध्यादेश लाने को कहा है, क्योंकि विधानसभा सत्र नहीं चल रहा है. यह अध्यादेश 28 फरवरी 2024 को लागू होगा. सभी दुकानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, होटल, मॉल और अस्पतालों को इस अध्यादेश का पालन करना होगा.” उपद्रव के बाद गिरफ्तार किये गये कर्नाटक रक्षणा वेदिके के अध्यक्ष नारायण गौड़ा सहित 53 से अधिक कन्नड़ कार्यकर्ताओं को बेंगलुरु की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने 10 जनवरी तक 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. उन्हें परप्पाना अग्रहारा सेंट्रल जेल में रखा गया है. पुलिस ने 1,000 से अधिक लोगों को एहतियातन हिरासत में भी लिया है.
कन्नड़ कार्यकर्ताओं द्वारा सरकार पर कन्नड़ हितों के लिए लड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाने तथा लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सबक सिखाने को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा, ह्लहमने उन्हें विरोध करने से नहीं रोका है, लेकिन हमने उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिन्होंने कानून अपने हाथ में लिया है… जहां तक चुनाव की बात है तो उसे चुनाव के वक्त देखेंगे. सरकार यहां कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए है.ह्व कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार और गृहमंत्री जी परमेश्वर ने भी कहा कि कन्नड़ भाषा के लिए आवाज उठाने के नाम पर राज्य में किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं है.
शिवकुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा, ”हम कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ताओं के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए. बेंगलुरु में संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटना को स्वीकार नहीं किया जा सकता.” उन्होंने कहा, ”हमें कन्नड़ भाषा को बचाना है और हम उन लोगों का सम्मान करते हैं, जो इसके लिए आवाज उठा रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होना चाहिए कि सरकार उपद्रव के प्रति अपनी आंखें मूंद लेगी.”
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि साइनबोर्ड, विज्ञापन और नाम पट्टिका में 60 प्रतिशत कन्नड़ भाषा होनी चाहिए और इसे लागू करने का एक तरीका है, यथा- इस नियम का उल्लंघन करने वालों को नोटिस जारी करना. उन्होंने कहा कि लोग अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं और नारे लगा सकते हैं, लेकिन संपत्ति को नुकसान पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने कहा, “दुनिया के विभिन्न हिस्सों से निवेशक यहां आए हैं. लोग अपनी आजीविका कमाने के लिए यहां रह रहे हैं. उन्हें धमकाया नहीं जाना चाहिए.”