जयपुर. राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को अपने मंत्रिपरिषद का विस्तार करते हुए इसमें 22 और मंत्री शामिल किए. इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता किरोड़ी लाल मीणा शामिल हैं. 22 में से 17 पहली बार मंत्री बने हैं.
भाजपा ने मंत्रिपरिषद में दो ब्राह्मणों, चार जाटों, राजपूत और अनुसूचित जाति/जनजाति के तीन-तीन विधायकों सहित अन्य समाज के वधिायकों को शामिल करके जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की है. शनिवार को शामिल किए गए 12 कैबिनेट मंत्रियों में राठौड़ और मीणा के साथ साथ 10 राज्य मंत्री हैं.
लगभग दो सप्ताह पहले भाजपा ने शर्मा को मुख्यमंत्री पद के लिए चुनकर पार्टी की राज्य इकाई में जिस बदलाव का संकेत दिया था, वह शनिवार के मंत्रिपरिषद विस्तार में और मजबूत होता दिखा है. राज्य में अब मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री सहित कुल 25 मंत्री हैं. इनमें से बीस पहली बार मंत्री बने हैं.
राज्यपाल कलराज मिश्र ने राजभवन में नए मंत्रियों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई. राज्य के नए मंत्रिपरिषद में युवा और अनुभवी नेताओं का मिश्रण है. इसमें वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री मीणा, गजेंद्र सिंह खींवसर और मदन दिलावर को कैबिनेट मंत्री जबकि ओटाराम देवासी को राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया है.
वहीं, कैबिनेट मंत्री राठौड़, राज्य मंत्री के.के बिश्नोई और जवाहर सिंह बेढम पहली बार विधायक बने हैं. सत्तारूढ़ भाजपा ने करणपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे अपने उम्मीदवार सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी को भी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया है. इस सीट पर पांच जनवरी को मतदान होना है. कांग्रेस ने इसके लिए भाजपा की आलोचना की है.
मंत्रिपरिषद विस्तार में भाजपा ने क्षेत्रीय संतुलन भी साधने की कोशिश की है. हालांकि इस मंत्रिपरिषद में जयपुर का प्रतिनिधित्व सबसे अधिक है. मुख्यमंत्री शर्मा, उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और कैबिनेट मंत्री राठौड़ जयपुर शहर की सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं. उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा दूदू सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं. अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली पूर्व सरकार द्वारा अलग जिला बनाए जाने से पहले दूदू, जयपुर जिले का हिस्सा था.
नवनियुक्त मंत्रिपरिषद में किरोड़ी लाल मीणा (72) सबसे उम्रदराज और अविनाश गहलोत (42) सबसे कम उम्र के हैं. नवनियुक्त कैबिनेट मंत्रियों में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, गजेंद्र सिंह खींवसर, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, बाबूलाल खराड़ी, मदन दिलावर, जोगाराम पटेल, सुरेश सिंह रावत, अविनाश गहलोत, जोराराम कुमावत, हेमंत मीणा, कन्हैयालाल चौधरी व सुमित गोदारा शामिल हैं.
वहीं, संजय शर्मा, गौतम कुमार, झाबर सिंह खर्रा, सुरेंद्रपाल टीटी व हीरालाल नागर को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ दिलाई गई. इसके अलावा ओटाराम देवासी, डॉ. मंजू बाघमार, विजय सिंह चौधरी, के. के. बिश्नोई व जवाहर सिंह बेढम ने राज्यमंत्री के तौर पर शपथ ली.
कैबिनेट मंत्री बनाए गए किरोड़ी मीणा (सवाई माधोपुर) छठी बार के विधायक हैं. वह दो बार लोकसभा सदस्य और एक बार राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं. वह पूर्व मंत्री भी रहे हैं. वहीं, गजेंद्र सिंह खींवसर चौथी बार के विधायक हैं. वह जोधपुर जिले की लोहावट सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं. वह भी पहले मंत्री रह चुके हैं.
जयपुर की झोटवाड़ा विधानसभा सीट से जीतने वाले राज्यवर्धन सिंह राठौड़ पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं और जयपुर (ग्रामीण सीट) से दो बार लोकसभा सदस्य रहे हैं. वह पहली बार विधायक बने हैं. राठौड़ ओलंपिक पदक विजेता और सेना के पूर्व अधिकारी हैं. बाबूलाल खराड़ी उदयपुर की झाड़ोल विधानसभा सीट से विधायक हैं. वह चौथी बार विधायक चुने गए हैं. पूर्व मंत्री मदन दिलावर छठी बार विधायक चुने गए हैं. लूणी से विधायक जोगाराम पटेल व पुष्कर से विधायक सुरेश सिंह रावत तीसरी बार के विधायक हैं.
दूसरी बार विधायक बने अविनाश गहलोत पाली जिले की जैतारण सीट जबकि जोराराम कुमावत पाली की सुमेरपुर सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं. वहीं, हेमंत मीणा प्रतापगढ़ से पहली बार विधायक बने हैं. वह पूर्व मंत्री नंदलाल मीणा के बेटे हैं. कन्हैया लाल चौधरी मालपुरा (टोंक) से तीसरी बार के विधायक हैं. अन्य कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा बीकानेर जिले की लूणकरणसर सीट से विधानसभा सदस्य हैं और दूसरी बार विधायक बने हैं.
राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा (अलवर शहर), गौतम कुमार दक (बड़ी सादड़ी), झाबर सिंह खर्रा (श्रीमाधोपुर) और हीरालाल नागर (सांगोद) दूसरी बार के विधायक हैं. तीसरी बार विधायक बने ओटाराम देवासी (सिरोही), वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में राज्य मंत्री थे. उन्हें इस बार भी राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया है.
नागौर जिले की जायल सीट से विधायक और दलित समुदाय से आने वाली मंजू बाघमार को भी राज्यमंत्री बनाया गया है. वहीं राज्यमंत्री बने विजय सिंह चौधरी नावां (नागौर) से विधायक हैं. वह दूसरी बार के विधायक हैं. मंत्रिपरिषद में शामिल किए गए के. के. बिश्नोई (गुड़ामालानी) और जवाहर सिंह बेढम (नगर) पहली बार विधायक बने हैं.
जाति के हिसाब से देखा जाए तो नवगठित मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री शर्मा सहित ब्राह्मण समाज के दो, जाट समाज के चार, राजपूत समाज के तीन, अनुसूचित जाति व जनजाति समाज के तीन-तीन विधायकों को मंत्री बनाया गया है. पूरे मंत्रिपरिषद को देखा जाए तो मुख्यमंत्री व दो उपमुख्यमंत्रियों को मिलाकर कुल 25 मंत्री हो गए हैं इनमें से 20 ऐसे हैं जो पहली बार मंत्री बने हैं. मंत्रिपरिषद में दो महिलाएं शामिल हैं.
शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री शर्मा ने कैबिनेट मंत्रियों को बधाई देते हुए कहा, ”नया विजन और नया मिशन… हमारा लक्ष्य – आत्मनिर्भर व सर्वश्रेष्ठ राजस्थान.” उन्होंने कहा, ”पराक्रम एवं पुरुषार्थ की वीर भूमि राजस्थान प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री पद की शपथ लेने पर सभी ऊर्जावान साथियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं.” शर्मा ने अन्य मंत्रियों को भी बधाई दी. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व वसुंधरा राजे शपथ ग्रहण समारोह में नहीं दिखे.
गहलोत ने नई मंत्रिपरिषद को बधाई देते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा,’राजस्थान सरकार में नवनिर्मित मंत्रिपरिषद के सदस्यों को बधाई एवं शुभकामनाएं. आशा करता हूं कि आप सब राजस्थान को नंबर 1 राज्य बनाने के मिशन को आगे बढ़ाने में अपना पूरा योगदान देंगे एवं जनकल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाकर जनता की सेवा करेंगे.’ राज्य में विधानसभा की 200 में से 199 सीटों के लिए 25 नवंबर को मतदान हुआ था. चुनाव परिणाम तीन दिसंबर को घोषित किया गया था. इसमें भाजपा को 115 व कांग्रेस को 69 सीट मिलीं.
राज्य की करणपुर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी गुरमीत सिंह कुन्नर के निधन के कारण चुनाव स्थगित कर दिया गया था. इस सीट पर अब पांच जनवरी को मतदान होगा. यहां भाजपा की ओर से सुरेंद्रपाल टीटी उम्मीदवार हैं तो कांग्रेस ने कुन्नर के बेटे रुपिंदर सिंह को प्रत्याशी बनाया है.
वहीं कांग्रेस ने टीटी को आज मंत्री बनाए जाने की आलोचना की है. पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत, पार्टी के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसको लेकर भाजपा पर निशाना साधा. गहलोत ने कहा कि यह भाजपा आलाकमान के अहंकार को दर्शाता है.
गहलोत ने ‘एक्स’ पर लिखा,’करणपुर में पांच जनवरी को होने वाले मतदान की आचार संहिता के प्रभावी होने के बावजूद वहां से भाजपा प्रत्याशी को मंत्री बनाना आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन एवं वहां के मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास है. चुनाव आयोग को इस पर संज्ञान लेकर अविलंब कार्रवाई करनी चाहिए.’ उन्होंने लिखा, ‘इस तरह के असंवैधानिक कदम उठाना लोकतंत्र में दुर्भाग्यपूर्ण है. यह भाजपा आलाकमान के अहंकार को दर्शाता है.’ डोटासरा ने कहा कि पार्टी इस मामले को निर्वाचन आयोग के संज्ञान में लाकर कार्रवाई की मांग करेगी.
वहीं भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि टीटी की राज्यमंत्री के रूप में ली गई शपथ संविधान के प्रावधानों के अनुरूप ही है. उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ”संविधान की तीसरी अनुसूची के अनुसार ली गई शपथ किसी प्रकार की आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है. पूर्ववर्ती सरकार में भी मंत्री पद पर रहते हुए दर्जनों मंत्रियों ने चुनाव लड़ा है.”