वैचारिक जड़ों से भटक गई है कांग्रेस, जातिगत विभाजन को बढ़ावा दे रही: मिलिंद देवरा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 15 Jan 2024 09:05 PM
वैचारिक जड़ों से भटक गई है कांग्रेस, जातिगत विभाजन को बढ़ावा दे रही: मिलिंद देवरा
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मुंबई. पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवरा ने कांग्रेस छोड़ने और शिवसेना में शामिल होने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस अपनी वैचारिक एवं संगठनात्मक जड़ों से भटक गई है, वह जाति के आधार पर विभाजन को बढ़ावा दे रही है एवं कारोबारी घरानों को निशाना बना रही है.

देवरा ने कहा कि वह एक ऐसे नेता का सहयोग करना चाहते हैं जो रचनात्मक विचारों को महत्व देता है और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उनकी क्षमता को पहचाना है. पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवरा ने लोकसभा चुनावों से पहले मुंबई में कांग्रेस को झटका देते हुए रविवार की सुबह पार्टी छोड़ दी और शिंदे नीत शिवसेना में शामिल हो गए. इसी के साथ कांग्रेस के साथ उनके परिवार का ”55 साल पुराना नाता” खत्म हो गया. देवरा ने बाद में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के जरिए बताया कि उनके कांग्रेस छोड़ने के पीछे के क्या कारण हैं.

कांग्रेस के वरिष्ठ दिवंगत नेता मुरली देवरा के बेटे मिलिंद देवरा आगामी लोकसभा चुनाव में मुंबई दक्षिण सीट पर उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना (यूबीटी) द्वारा दावा किए जाने के बाद से नाराज थे. मिलिंद देवरा 2004 और 2009 में मुंबई दक्षिण सीट से चुने गए थे लेकिन 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में इस सीट पर (अविभाजित) शिवसेना के अरविंद सावंत से उन्हें शिकस्त मिली थी. सावंत अब ठाकरे गुट में हैं.

मिलिंद देवरा ने स्वीकार किया कि कांग्रेस से अलग होने का उनका निर्णय अत्यंत भावनात्मक है. उन्होंने साथ ही कहा कि वह एक ऐसे नेता का सहयोग करने की इच्छा रखते हैं जो रचनात्मक विचारों को महत्व देता है, उनकी योग्यता को पहचानता है और राष्ट्र एवं राज्य के विकास के लिए संसद में उनकी क्षमताओं का लाभ उठाने का लक्ष्य रखता है.

मिलिंद देवरा ने कहा, ”एकनाथ शिंदे जी को मेरी क्षमताओं पर भरोसा है और वह इस विश्वास का प्रतीक है कि कड़ी मेहनत से असंभव को भी संभव किया जा सकता है.” किसी का नाम लिए बगैर बिना देवरा ने हाल के वर्षों में अडाणी समूह की कड़ी आलोचना करने को लेकर कांग्रेस पर नाराजगी जताई.

उन्होंने कहा, ”जिस पार्टी ने देश में कभी आर्थिक उदारीकरण की पहल की थी, वह अब व्यापारिक घरानों को ‘राष्ट्र-विरोधी’ कहकर निशाना बनाती है. वह देश की विविध संस्कृतियों और धर्मों का जश्न मनाने से भटक गई है, वह जाति के आधार पर विभाजन को बढ़ावा दे रही है और उत्तर-दक्षिण विभाजन पैदा कर रही है. यह अपनी वैचारिक और संगठनात्मक जड़ों से भटक गई है.” देवरा ने कहा कि कांग्रेस न केवल सत्ता में लौटने में विफल रही बल्कि केंद्र में रचनात्मक विपक्ष के रूप में प्रभावी ढंग से काम करने में भी असफल रही है.

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और शिंदे की साधारण पृष्ठभूमि का जिक्र किया. देवरा ने कहा, ”आज, हम एक चायवाले को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री और एक ऑटोरिक्शा चालक को भारत के दूसरे सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करते हुए देख रहे हैं. यह परिवर्तन देश के राजनीतिक परिदृश्य को समृद्ध करता है और हमारे समतावादी मूल्यों की पुष्टि करता है.”

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