हनुमान ध्वज विवाद : पंचायत विकास अधिकारी निलंबित, मुख्यमंत्री ने कहा ‘शांति भंग कर रहे गोडसे के वंशज’

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 30 Jan 2024 09:10 PM
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बेंगलुरु/मांड्या. मांड्या के एक गांव में हनुमान ध्वज हटाने को लेकर हुए विवाद के संबंध में पंचायत के एक अधिकारी को निलंबित कर दिया गया. वहीं मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा कि राज्य में शांति भंग करने के लिए ‘गोडसे के वंशज’ जिम्मेदार हैं. एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि ‘हनुमान ध्वज’ हटाने को लेकर केरागोडु गांव में तनाव फैल गया था लेकिन हालात अब सामान्य हो गये हैं.

मांड्या में 108 फुट ऊंचे ध्वजस्तंभ से हनुमान ध्वज हटाए जाने के खिलाफ सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल सेक्युलर ने व्यापक विरोध-प्रदर्शन किया. वहीं मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए विरोध प्रदर्शन करने का आरोप लगाया.

महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर यहां उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में सिद्धरमैया ने कहा, ”हमारे बीच ऐसे लोग भी हैं, जो (नाथूराम) गोडसे की पूजा करते हैं हालांकि वे महात्मा गांधी के बारे में भी बात करते हैं.” मांड्या में तनावपूर्ण स्थिति के बारे में सिद्धरमैया ने कहा कि शांति भंग करने के प्रयास किये जा रहे हैं.

महात्मा गांधी की हत्या के संदर्भ में उन्होंने कहा, ”जो शांति भंग कर रहे हैं, वे गोडसे के वंशज हैं.” मुख्यमंत्री ने कहा, ”लोगों को समाज में शांति के लिए प्यार और विश्वास से रहना चाहिए. किसी को भी सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.” सिद्धरमैया ने जोर देकर कहा कि केरागोडु पंचायत ने तिरंगा या फिर सिर्फ कर्नाटक का ध्वज फहराने की मंजूरी दी थी न कि कोई धार्मिक या राजनीतिक ध्वज.

उन्होंने आरोप लगाया, ”वे (केरागोडु में कार्यक्रम के आयोजक जिन्होंने भगवा झंडा फहराया था) कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति के लिए अपने लिखित हलफनामे के खिलाफ क्यों गए? यह राजनीतिक लाभ प्राप्त करने और समाज में अशांति पैदा करने के लिए किया गया.” अधिकारियों ने बाद में हनुमान ध्वज हटाकर राष्ट्रीय ध्वज लगा दिया. इस बीच, मांड्या जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शेख तनवीर आसिफ ने सोमवार को केरागोडु गांव के पंचायत विकास अधिकारी (पीडीओ) को निलंबित कर दिया.

आसिफ द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि गांव में केवल भारतीय ध्वज तिरंगा फहराने की अनुमति दी गई थी लेकिन पीडीओ ने न केवल लोगों को हनुमान ध्वज फहराने का मौका दिया बल्कि इसे हटाने के लिए भी कदम नहीं उठाया. पंचायत उपमंडल अधिकारी ने 28 जनवरी को तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर ध्वज हटा दिया जिससे कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो गई और इसके लिए पीडीओ को जिम्मेदार ठहराया गया.

इस बीच, कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने गांव के सभी घरों में तिरंगे वितरित किये और लोगों से देश के प्रति प्रतिबद्धता जताने को कहा.
मामले से संबंधित घटनाक्रम में केरागोडु पुलिस ने उन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की, जिन्होंने गांव में श्री गौरीशंकर ट्रस्ट द्वारा निर्मित ध्वजस्तंभ पर कथित रूप से हनुमान ध्वज फहराया था.

पुलिस के मुताबिक, कई लोगों पर भारतीय दंड संहिता की धाराओं 143 (गैरकानूनी जमावड़ा), 341 (गलत तरीके से रोकना), 353 (लोक सेवक को कर्तव्यों के निर्वहन से रोकना) और 149 (गैरकानूनी रूप से जमा हुए सभी लोगों की जवाबदेही) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.

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