पश्चिम बंगाल में ईडी अधिकारियों पर हमले से बढ़ा सियासी पारा, राष्ट्रपति शासन की मांग हुई तेज

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 05 Jan 2024 09:49 PM
पश्चिम बंगाल में ईडी अधिकारियों पर हमले से बढ़ा सियासी पारा, राष्ट्रपति शासन की मांग हुई तेज
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल में छापेमारी के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के एक नेता के समर्थकों द्वारा हमला किए जाने और उन्हें गंभीर रूप से घायल करने के बाद यहां का सियासी पारा चढ़ गया है. विपक्ष ने जहां एक ओर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है. वहीं दूसरी ओर राज्यपाल सी.वी.आनंद बोस ने जोर देकर कहा कि यह राज्य सरकार का कर्तव्य है कि वह ऐसी ‘बर्बरता’ को रोके. उन्होंने जोर देकर कहा कि बंगाल ‘बनाना रिपब्लिक’ नहीं हैं.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखली में हुई घटना को संघीय ढांचे पर सीधा हमला बताया है जबकि कांग्रेस ने राज्य में तत्काल राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की. हालांकि, सत्तारूढ़ टीएमसी ने आरोपों को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को उकसाया.

राज्यपाल ने संकेत दिया कि वह सभी संवैधानिक विकल्पों पर विचार करेंगे और मामले पर उचित कार्रवाई करेंगे. उन्होंने पुलिस से भी आसपास अराजकता न देखने का दिखावा करने का शुतुरमुर्ग जैसा रवैया खत्म करने को कहा. यह घटना तब हुई जब ईडी अधिकारियों ने तृणमूल कांग्रेस नेता शेख शाहजहां के आवास पर छापेमारी की और उन्हें शाहजहां के समर्थकों के हमलों का सामना करना पड़ा. समर्थकों ने अधिकारियों और उनके वाहनों को नुकसान पहुंचाया.

शाहजहां को राज्य मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक का करीबी सहयोगी माना जाता है. ज्योतिप्रिय मल्लिक को करोड़ों रुपये के राशन वितरण घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है. यह छापेमारी करोड़ों रुपये के राशन वितरण घोटाले में एजेंसी की चल रही जांच के लिए अहम मानी जा रही थी.

एक अधिकारी ने बताया कि जब ईडी अधिकारी सुबह संदेशखली इलाके में शेख के आवास पर पहुंचे तो बड़ी संख्या में तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों ने ईडी अधिकारियों और उनके साथ आए केंद्रीय बलों के जवानों को घेर लिया. इसके बाद उन्होंने प्रदर्शन किया और फिर उन पर हमला कर दिया जिसके बाद अधिकारियों को ऑटो रिक्शा और दो पहिया वाहन पर सवार होकर वहां से जाने पर मजबूर होना पड़ा.

उन्होंने बताया कि कम से कम दो अधिकारियों को गंभीर चोट लगी है और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा. हमलावरों ने ईडी के अधिकारियों के गए केंद्रीय अर्धसैनिक बल के र्किमयों को भी नहीं छोड़ा और उनपर भी हमला किया. ईडी के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”इस तरह का हमला अप्रत्याशित है. हमने शेख शाहजहां को लेकर दिल्ली कार्यालय में रिपोर्ट भेजेंगे.” एक अधिकारी ने बताया कि इस बीच पुलिस ने ईडी अधिकारियों पर हमला करने में कथित तौर पर संलिप्त 10 लोगों को हिरासत में लिया है.

इस प्रकरण की राज्यपाल बोस ने भी तीखी आलोचना की. उन्होंने संदेशखली में हमले को रोकने में असमर्थता के लिए राज्य सरकार की ‘शुतुरमुर्ग वाले रवैये’ की आलोचना की. बोस ने राजभवन से जारी एक ऑडियो संदेश में कहा, ”संदेशखली में हुई भयावह घटना चिंताजनक और निंदनीय है. लोकतंत्र में बर्बरता और गुंडागर्दी को रोकना एक सभ्य सरकार का कर्तव्य है. एक राज्यपाल के रूप में, मैं उचित तरीके से उचित कार्रवाई के लिए अपने सभी संवैधानिक विकल्पों का पता लगाऊंगा.” उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल कोई ‘बनाना रिपब्लिक’ नहीं है और सरकार को लोकतंत्र में बर्बरता और गुंडागर्दी रोकनी चाहिए.

बोस ने बयान में कहा, ”बेहतर होगा कि सरकार अपनी आंखें खोले और वास्तविकता को देखे और प्रभावी ढंग से कार्य करे या परिणाम भुगते. आसपास की अराजकता न देखने का दिखावा करने वाली पुलिस को शुतुरमुर्ग का रवैया खत्म करना चाहिए.” इस घटना ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में तूफान ला दिया है. विपक्षी दलों ने बिगड़ती कानून व्यवस्था की आलोचना की.

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री निसिथ प्रमाणिक ने केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने में संबंधित राज्य सरकारों की विफलता पर जोर देते हुए कहा, ”केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों पर हमला राज्य के संघीय ढांचे पर हमला है.” उन्होंने कहा कि केंद्र इस घटना को गंभीरता से ले रहा है और यह जांच करने को प्रतिबद्ध है कि पश्चिम बंगाल में लगातार ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं.

भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर तत्काल राष्ट्रीय जांच अभिकरण (एनआईए) से मामले की जांच कराने और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की. उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’पर पोस्ट किया, ”संदेशखली में ईडी अधिकारियों पर हुए जघन्य हमले के बाद पश्चिम बंगाल में कानून और व्यवस्था की स्थिति चरमरा गई है और इसकी वजह तृणमूल कांग्रेस है. मैंने माननीय गृह मंत्री अमित शाह को बंगाल के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मामले की एनआईए जांच शुरू करने के लिए लिखा है.” मजूमदार ने जांच प्रक्रियाओं की सुचिता को बरकरार रखने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती का भी अनुरोध किया है.

विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने जोर देकर कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने मुद्दा बनाने और जांच को बाधित करने के इरादे से केंद्रीय बलों को गोली चलाने पर मजबूर करने की योजना बनाई थी. उन्होंने कहा, ”तृणमूल ने एक ऐसा परिदृश्य बनाने की योजना बनाई जिसमें केंद्रीय बलों को गोलीबारी का सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़े. इसके बाद तृणमूल का उद्देश्य अन्य घोटालों में केंद्रीय एजेंसी की जांच में बाधा डालने के लिए परिस्थितियां पैदा करना था. मैं ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच संयम दिखाने के लिए केंद्रीय बलों को धन्यवाद देता हूं.” प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने भी इसी तरह की भावना व्यक्त की.

उन्होंने कहा, ” तृणमूल कांग्रेस के शासन में पश्चिम बंगाल में कानून और व्यवस्था का अस्तित्व समाप्त हो गया है. हमारी मांग है कि पश्चिम बंगाल में तुरंत राष्ट्रपति शासन लगाया जाए.” विपक्षी दलों के आरोप का जवाब देते हुए वरिष्ठ तृणमूल कांग्रेस की मंत्री शशि पांजा ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को उकसाया जिसकी वजह से यह स्थिति उत्पन्न हुई.

उन्होंने कहा, ”केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने संघीय ढांचे पर हमले की बात कही. राज्य का बकाया रोकना सही मायनों में संघीय ढांचे पर हमला है.” तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता कुणाल घोष ने कांग्रेस और भाजपा की आलोचना करते हुए दावा किया कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था कई अन्य राज्यों से कहीं बेहतर है.

उन्होंने कहा, ”राज्यपाल पूरे प्रकरण पर निष्पक्ष तरीके से विचार करने के बजाय सीधे नतीजे निकाल रहे हैं. उन्हें भाजपा नेता की तरह काम नहीं करना चाहिए.” ईडी की छापेमारी का कवर करने गए समाचार चैनलों के र्किमयों को भी भीड़ ने निशाना बनाया और उनके वाहनों में भी तोड़फोड़ की.

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