अंतरिक्ष में 64 प्रकाशवर्ष दूर स्थित गैस दानव ग्रह बीटा पिक्टोरिस बी से पहली बार रेडियो संकेतों को सीधे ग्रह से जोड़ने में वैज्ञानिकों को सफलता मिली है। दक्षिण अफ्रीका की मीरकैट रेडियो दूरबीन से मिले इन कमजोर लेकिन दोहराए जाने वाले संकेतों ने वैज्ञानिकों को इस दूरस्थ ग्रह के शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र की जानकारी दी है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इन रेडियो संकेतों को किसी एलियन सभ्यता का संदेश नहीं माना जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार ये संकेत ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र और उसके ऊपरी वायुमंडल में होने वाली प्राकृतिक ऑरोरा प्रक्रिया से पैदा होते हैं।
मीरकैट ने कैसे पकड़े रेडियो संकेत?
वैज्ञानिकों ने बीटा पिक्टोरिस ग्रह प्रणाली का रेडियो तरंगों के जरिए अध्ययन किया। शुरुआत में यह स्पष्ट नहीं था कि प्राप्त संकेत ग्रह से आ रहे हैं या उसके मूल तारे से। इसके लिए शोधकर्ताओं ने रेडियो स्रोत की स्थिति को दूर स्थित क्वासरों के सापेक्ष बेहद सटीक तरीके से निर्धारित किया।
इसके बाद रेडियो संकेतों की स्थिति की तुलना बीटा पिक्टोरिस तारे और उसके ग्रह की स्थिति से की गई। संकेत ग्रह बीटा पिक्टोरिस बी की स्थिति से मेल खाते पाए गए। इस तरह वैज्ञानिकों ने पहली बार किसी बाहरी ग्रह के रेडियो उत्सर्जन को सीधे उसके ग्रह से जोड़ने का प्रमाण प्राप्त किया।
प्राकृतिक ऑरोरा से पैदा हुई ‘रेडियो आवाज’
वैज्ञानिकों के अनुसार इन संकेतों का संबंध ग्रह के शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र से है। जब ऊर्जावान आवेशित कण चुंबकीय क्षेत्र की रेखाओं के साथ गति करते हैं और ग्रह के ऊपरी वायुमंडल के साथ संपर्क करते हैं, तो ऊर्जा का उत्सर्जन होता है।
इसी तरह की प्रक्रिया पृथ्वी पर भी होती है, जहां ध्रुवीय क्षेत्रों में ऑरोरा यानी उत्तरी या दक्षिणी रोशनी दिखाई देती है। बीटा पिक्टोरिस बी में इसी तरह की ऑरोरल गतिविधि रेडियो तरंगों के रूप में दर्ज की गई है।
बृहस्पति से भी ज्यादा शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र
इस खोज का एक महत्वपूर्ण पहलू ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र की ताकत है। वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक रेडियो उत्सर्जन वाले क्षेत्र में बीटा पिक्टोरिस बी का चुंबकीय क्षेत्र कम से कम 1,250 गॉस का हो सकता है।
यह आंकड़ा ग्रह के बेहद शक्तिशाली चुंबकीय वातावरण की ओर संकेत करता है। इससे पहले एक्सोप्लैनेट के चुंबकीय क्षेत्रों को समझने के लिए वैज्ञानिकों को मुख्य रूप से सैद्धांतिक मॉडल और अप्रत्यक्ष प्रमाणों पर निर्भर रहना पड़ता था।
युवा ग्रह से मिली महत्वपूर्ण जानकारी
बीटा पिक्टोरिस बी एक विशाल और अपेक्षाकृत युवा गैस दानव ग्रह है। ऐसे युवा ग्रहों के भीतर निर्माण के दौरान बची ऊर्जा और सक्रिय आंतरिक प्रक्रियाएं शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र बनाने में भूमिका निभा सकती हैं।
इस ग्रह से मिले रेडियो संकेतों के आधार पर सामने आया चुंबकीय क्षेत्र युवा और विशाल ग्रहों को लेकर की गई कुछ सैद्धांतिक भविष्यवाणियों के अनुरूप है। इससे वैज्ञानिकों को ग्रहों के अंदर चुंबकीय क्षेत्र बनने और समय के साथ उनके विकास को समझने में मदद मिल सकती है।
एक्सोप्लैनेट के अध्ययन का नया रास्ता
अब तक वैज्ञानिक बाहरी ग्रहों के अध्ययन के लिए मुख्य रूप से उनके तारों की रोशनी में होने वाले बदलाव, ग्रह की कक्षीय गति और वातावरण से जुड़े संकेतों का इस्तेमाल करते रहे हैं। रेडियो खगोल विज्ञान इस अध्ययन में एक नया तरीका जोड़ सकता है।
अगर भविष्य में अन्य विशाल एक्सोप्लैनेट से भी इसी तरह के रेडियो संकेतों की पहचान होती है, तो वैज्ञानिक अलग-अलग ग्रहों के चुंबकीय क्षेत्रों की तुलना कर सकेंगे। इससे ग्रहों की आंतरिक संरचना, निर्माण और विकास को समझने में नई जानकारी मिल सकती है।
क्या यह एलियन सभ्यता का संकेत है?
रेडियो संकेतों का नाम सुनकर एलियन जीवन या किसी दूसरी सभ्यता का सवाल उठना स्वाभाविक है, लेकिन बीटा पिक्टोरिस बी से मिले संकेतों को कृत्रिम संदेश का प्रमाण नहीं माना गया है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक ये संकेत प्राकृतिक ऑरोरल प्रक्रिया से उत्पन्न हुए हैं। हालांकि, इस खोज का महत्व इसलिए बड़ा है क्योंकि इससे पहली बार किसी एक्सोप्लैनेट के रेडियो उत्सर्जन को सीधे ग्रह से जोड़ने और उसके शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र का अध्ययन करने का अवसर मिला है।
64 प्रकाशवर्ष दूर मौजूद बीटा पिक्टोरिस बी ने भले ही इंसानों को कोई संदेश नहीं भेजा हो, लेकिन उसकी रेडियो तरंगों ने वैज्ञानिकों को उसकी अदृश्य चुंबकीय दुनिया की महत्वपूर्ण झलक जरूर दी है।