एअर इंडिया विमान हादसे की पूर्ण जांच से पहले दोषारोपण ठीक नहीं : एफआईपी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 16 Jul 2025 08:46 PM
एअर इंडिया विमान हादसे की पूर्ण जांच से पहले दोषारोपण ठीक नहीं : एफआईपी
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मुंबई. पेशेवर पायलट के संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (एफआईपी) ने एअर इंडिया बोइंग 787 विमान दुर्घटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि गहन, पारदर्शी और आंकड़ों पर आधारित जांच से पहले दोषारोपण करना ”समय से पहले और गैर-जिम्मेदाराना” है.

एफआईपी ने बुधवार को एक बयान में मीडिया, टिप्पणीकारों और अधिकारियों सहित सभी हितधारकों से आग्रह किया कि वे ”आंशिक आख्यानों का प्रसार करने या निराधार धारणाएं बनाने से बचें”. विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने 12 जून को हुई दुर्घटना पर अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कहा कि टाटा समूह द्वारा संचालित एअर इंडिया की उड़ान संख्या एआई 171 के उड़ान भरने के तुरंत बाद एक सेकंड के अंतराल में इंजन के ईंधन स्विच बंद हो गए थे, जिससे कॉकपिट में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी. इस दुर्घटना में 260 लोग मारे गए थे.

दुर्घटना की जांच की शनिवार को जारी 15 पृष्ठों की प्रारंभिक रिपोर्ट में कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए कहा गया है कि एक पायलट ने पूछा कि स्विच क्यों बंद किया गया, तो दूसरे पायलट ने जवाब दिया कि उसने ऐसा नहीं किया था. एफआईपी के अध्यक्ष सी. एस. रंधावा ने बयान में कहा, ”सबसे पहले, हम जांच प्रक्रिया से पायलट प्रतिनिधियों को बाहर रखे जाने पर अपना असंतोष दर्ज कराना चाहते हैं. हम प्रारंभिक रिपोर्ट की व्याख्या और सार्वजनिक प्रस्तुति के तरीके पर भी कड़ी आपत्ति जताते हैं.” फेडरेशन ने कहा कि जारी की गई रिपोर्ट में ”व्यापक” आंकड़ों का अभाव है और ऐसा प्रतीत होता है कि इसमें पायलट की गलती का संकेत देने तथा उड़ान चालक दल की पेशेवर क्षमता और ईमानदारी पर सवाल उठाने के लिए चुनिंदा रूप से कॉकपिट की आवाज की रिकॉर्डिंग पर भरोसा किया गया है. उसने कहा, ”यह दृष्टिकोण न तो वस्तुनिष्ठ है और न ही पूर्ण है.”

एफआईपी ने कहा कि इसलिए वह अपने सदस्यों और आम जनता से आग्रह करता है कि वे ”ऐसे अपरिपक्व निष्कर्षों पर विश्वास न करें.” बयान में कहा, ”एफआईपी अहमदाबाद में एअर इंडिया की उड़ान संख्या एआई-171 की दुखद दुर्घटना से संबंधित प्रारंभिक निष्कर्षों और सार्वजनिक चर्चा के संबंध में गंभीर चिंता व्यक्त करता है.” एफआईपी ने बयान में कहा, ”संपूर्ण, पारदर्शी और आंकड़ों पर आधारित जांच से पहले किसी पर दोष मढ.ना जल्दबाजी और गैर-ज.म्मिेदाराना है. इस तरह की अटकलबाजी भरी टिप्पणियां उच्च प्रशिक्षित चालक दल के सदस्यों के पेशेवर क्षमता को कमजोर करती हैं और उनके परिवारों और सहर्किमयों को अनावश्यक परेशानी का कारण बनती हैं.”

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