उच्च न्यायालय ने फिल्म में करण जौहर का नाम इस्तेमाल करने से रोका

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 13 Jun 2024 07:25 PM
उच्च न्यायालय ने फिल्म में करण जौहर का नाम इस्तेमाल करने से रोका
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मुंबई. बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को एक अंतरिम आदेश में फिल्म ‘शादी के डायरेक्टर करण और जौहर’ के निर्माताओं को शीर्षक या फिल्म में फिल्म निर्माता करण जौहर के नाम का उपयोग करने से रोक दिया. न्यायालय ने फिल्म निर्माताओं को शीर्षक या फिल्म में करण जौहर की व्यक्तिगत पहचान का उपयोग करने से रोका और ऐसा करने को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है.

न्यायमूर्ति आर आई छागला की पीठ ने फिल्म जारी किए जाने पर रोक लगा दी है. पीठ ने कहा कि जब तक करण जौहर का नाम और उनकी व्यक्तिगत पहचान का उल्लेख शीर्षक और फिल्म से हटा नहीं दिया जाता, तब तक फिल्म को सिनेमाघरों या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रर्दिशत नहीं किया जाएगा. ‘शादी के डायरेक्टर करण और जौहर’ फिल्म 14 जून को रिलीज होने वाली थी.
करण जौहर ने इस फिल्म को लेकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. उन्होंने फिल्म के निर्माताओं इंडियाप्राइड एडवाइजरी और संजय सिंह तथा लेखक और निर्देशक बबलू सिंह के खिलाफ फिल्म के शीर्षक में उनके नाम का इस्तेमाल करने पर स्थायी रोक लगाने के लिए याचिका दायर की थी.

करण जौहर के वकील जाल अन्ध्यार्जुन ने कहा कि फिल्म निर्माता के नाम का अनाधिकृत रूप से उपयोग किया जा रहा है और फिल्म के निर्माताओं का उनके नाम का उपयोग करके अनुचित और गैरकानूनी लाभ प्राप्त करने का दुर्भावनापूर्ण इरादा है. न्यायमूर्ति आर आई चागला की एकल पीठ ने जौहर की अंतरिम अर्जी मंजूर करते हुए कहा कि फिल्म के शीर्षक में डायरेक्टर शब्द का इस्तेमाल किया गया है और इसमें करण और जौहर का नाम भी है.

न्यायमूर्ति आर आई छागला ने करण जौहर की अंतरिम अर्जी मंजूर करते हुए कहा कि फिल्म के शीर्षक में ‘डायरेक्टर’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है और इसमें करण और जौहर का नाम भी है. प्रथम दृष्टया, ऐसा लगता है कि फिल्म के निर्माता करण जौहर को निशाना बना रहे हैं. पीठ ने माना कि इस तरह से किसी के नाम का अनाधिकृत इस्तेमाल करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.
न्यायलय ने कहा, “किसी व्यक्ति के नाम का इस्तेमाल उसकी अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता. ऐसा करना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.” अदालत ने यह भी कहा कि वादी द्वारा जारी नोटिस के बावजूद प्रतिवादी उपस्थित होने में विफल रहे हैं. अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को तय की है.

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